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चौधरी परिवार के सहारे खड़ी सपा की राजनीतिक दीवार : सांसद
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संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत। पूर्व सीएम व सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के बिना नाम लिए रालोद अध्यक्ष चाैधरी जयंत सिंह पर की गई टिप्पणी से रालोद नेता भड़क गए। सांसद डॉ. राजकुमार सांगवान ने कहा कि सपा की राजनीतिक दीवार ही चौधरी परिवार के सहारे खड़ी है। चौधरी चरण सिंह का सहारा न होता तो इस परिवार का राजनीति में नाम व निशान ही नहीं होता।
डॉ. राजकुमार सांगवान ने कहा कि अखिलेश यादव को दिख रहा है कि उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव में उनकी हार निश्चित है। उनके हाथ कुछ नहीं लगने वाला है, इसलिए वह परेशान व हताश हैं और इस तरह के बयान दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के आशीर्वाद से मुलायम सिंह यादव नेता बने और उनकी विरासत अखिलेश यादव को मिली। इसलिए जयंत सिंह उनके सहारे नहीं, बल्कि अखिलेश यादव ही चौधरी परिवार के सहारे यहां तक पहुंचे हैं। छपरौली से रालोद विधायक डॉ. अजय कुमार ने कहा कि चुनाव से पहले ही अखिलेश यादव की बौखलाहट साफ दिखने लगी है। यूपी में रालोद के सहारे ही उनको पिछले चुनाव में अधिकतर सीटों पर जीत मिली थी और इस बार उनका यह सपना भी टूट गया है। उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव में ज्यादा सीट का वादा करके अपने प्रत्याशी उतारकर अखिलेश यादव ने धोखा किया था। यही धोखा लोकसभा चुनाव में करना चाहते थे, इसलिए गठबंधन टूटा था।
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बागपत। पूर्व सीएम व सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के बिना नाम लिए रालोद अध्यक्ष चाैधरी जयंत सिंह पर की गई टिप्पणी से रालोद नेता भड़क गए। सांसद डॉ. राजकुमार सांगवान ने कहा कि सपा की राजनीतिक दीवार ही चौधरी परिवार के सहारे खड़ी है। चौधरी चरण सिंह का सहारा न होता तो इस परिवार का राजनीति में नाम व निशान ही नहीं होता।
डॉ. राजकुमार सांगवान ने कहा कि अखिलेश यादव को दिख रहा है कि उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव में उनकी हार निश्चित है। उनके हाथ कुछ नहीं लगने वाला है, इसलिए वह परेशान व हताश हैं और इस तरह के बयान दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के आशीर्वाद से मुलायम सिंह यादव नेता बने और उनकी विरासत अखिलेश यादव को मिली। इसलिए जयंत सिंह उनके सहारे नहीं, बल्कि अखिलेश यादव ही चौधरी परिवार के सहारे यहां तक पहुंचे हैं। छपरौली से रालोद विधायक डॉ. अजय कुमार ने कहा कि चुनाव से पहले ही अखिलेश यादव की बौखलाहट साफ दिखने लगी है। यूपी में रालोद के सहारे ही उनको पिछले चुनाव में अधिकतर सीटों पर जीत मिली थी और इस बार उनका यह सपना भी टूट गया है। उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव में ज्यादा सीट का वादा करके अपने प्रत्याशी उतारकर अखिलेश यादव ने धोखा किया था। यही धोखा लोकसभा चुनाव में करना चाहते थे, इसलिए गठबंधन टूटा था।
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