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बाजार में नहीं विज्ञान वर्ग की पुस्तकें, कैसे करें पढ़ाई
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यूपी बोर्ड की कक्षा नौ से 12 वीं तक की किताबों की छपाई के टेंडर नहीं होने से बनी समस्या
पांच से दस गुना महंगी है निजी प्रकाशकों की किताबें, उनकी भी करानी पड़ रही पहले बुकिंग
अमर उजाला एक्सक्लूसिव
65 हजार छात्र हैं यूपी बोर्ड से संबद्ध स्कूलों में नौ वीं कक्षा से लेकर 12 वीं तक
3200 विज्ञान वर्ग के छात्रों के सामने खड़ी हुई किताबों के नहीं मिलने से समस्या
मुकेश पंवार
फोटो संख्या 8........
बड़ौत। यूपी बोर्ड के विज्ञान वर्ग विषयों के पाठ्यक्रमों की एनसीईआरटी की पुस्तकें बाजार में उपलब्ध नहीं हैं और निजी प्रकाशकों की पुस्तकें स्कूलों में लगाने पर रोक है। अब छात्रों के सामने बड़ी समस्या है कि वह पढ़ाई कैसे करें। कक्षा नौ से 12 वीं तक के करीब 3200 छात्र-छात्राएं इस समस्या से जूझ रहे हैं। मजबूरी में छात्रों को निजी प्रकाशकों की चार से पांच गुना महंगी किताबें खरीदनी पड़ रही है, इसके लिए भी दुकानों पर पहले से बुकिंग करानी पड़ रही है।
जिले में 71 कॉलेज सहायता प्राप्त, 52 वित्तविहीन मान्यता, 13 राजकीय हाईस्कूल व छह राजकीय इंटर कॉलेज है। जिनमें लगभग 65 हजार विद्यार्थी हैं। इनमें 3200 से अधिक छात्र-छात्राएं विज्ञान विषय के हैं। कक्षा 12 में पढ़ रहे गांव सिनौली निवासी आशीष ने बताया कि दुकानदार को किताब के लिए पहले से बोलना पड़ रहा है, तब जाकर मुश्किल से किताब मिल पाती है। कई बार तो वापस ही लौटना पड़ता है। बड़ौत निवासी 11वीं के छात्र आकाश ने बताया कि एनसीईआरटी की किताबें जरूरी हैं। इनसे आगे की प्रतियोगी परीक्षाओं में भी मदद मिलती है।
शिक्षक बोले, सीबीएसई बोर्ड की तुलना में मामूली है अंतर
दिगंबर जैन इंटर कॉलेज के शिक्षक अजयराज शर्मा ने बताया कि यूपी बोर्ड के स्कूलों में यूपी एनसीईआरटी की किताबें लगी हैं। इनमें सीबीएसई बोर्ड की एनसीईआरटी की तुलना में पाठ्यक्रम में मामूली अंतर है।
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बोले पुस्तक विक्रेता
बड़ौत। वीके प्रकाशन से राजेश जैन भारती ने बताया कि साइंस की किताबों को छोड़कर अन्य किताबें तो मिल रही हैं, लेकिन विज्ञान की किताबें नहीं आने से दिक्कत हो रही हैं। अभी किताबों के लिए टेंडर जारी नहीं हुआ। है। इस वजह से किताबें नहीं आ रही है। अन्य ऐसे में छात्र मजबूरन निजी प्रकाशकों की किताबें खरीद रहे हैं।
बड़ौत। पिंटी किताब के संचालक वीरेंद्र कुमार जैन ने बताया कि रोजाना छात्र और अभिभावक विज्ञान की किताबें लेने आते हैं, लेकिन किताबों के न आने पर दिक्कतें हो रही है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों को इस ओर ध्यान देना चाहिए। संवाद
स्कूल लगवा रहे निजी प्रकाशकों की पुस्तकें
बड़ौत। बोर्ड ने स्कूलों को एनसीईआरटी की किताबें लगाने के निर्देश दिए थे। लेकिन यह किताबें अब मार्केट में उपलब्ध नहीं हैं, ऐसे में निजी प्रकाशकों की किताबें स्कूल लगवा रहे हैं। एनसीईआरटी की किताब 50 से 60 रुपये में आ जाती है। निजी प्रकाशक की किताब पांच से दस गुना महंगी आती हैं। इससे छात्रों के अभिभावकों की जेब पर भार बढ़ रहा है।
ये बोले प्रधानाचार्य-----
बड़ौत। श्री राम शिक्षा मंदिर इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य राजीव तोमर ने बताया कि सरकार ने इस बार यूपी बोर्ड के स्कूलों में एनसीईआरटी के किताबें अनिवार्य कर दी है, लेकिन जिन फर्मों को टेंडर दिया, वे पर्याप्त संख्या में किताबें नहीं छापा पा रहे हैं, इस वजह से किताबों की कमी बनी हुई है। शिक्षा विभाग को भी चिंता है, वे लगातार इस संबंध में उच्चाधिकारियों से बातचीत कर रहे हैं।
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पांच से दस गुना महंगी है निजी प्रकाशकों की किताबें, उनकी भी करानी पड़ रही पहले बुकिंग
अमर उजाला एक्सक्लूसिव
65 हजार छात्र हैं यूपी बोर्ड से संबद्ध स्कूलों में नौ वीं कक्षा से लेकर 12 वीं तक
3200 विज्ञान वर्ग के छात्रों के सामने खड़ी हुई किताबों के नहीं मिलने से समस्या
मुकेश पंवार
फोटो संख्या 8........
बड़ौत। यूपी बोर्ड के विज्ञान वर्ग विषयों के पाठ्यक्रमों की एनसीईआरटी की पुस्तकें बाजार में उपलब्ध नहीं हैं और निजी प्रकाशकों की पुस्तकें स्कूलों में लगाने पर रोक है। अब छात्रों के सामने बड़ी समस्या है कि वह पढ़ाई कैसे करें। कक्षा नौ से 12 वीं तक के करीब 3200 छात्र-छात्राएं इस समस्या से जूझ रहे हैं। मजबूरी में छात्रों को निजी प्रकाशकों की चार से पांच गुना महंगी किताबें खरीदनी पड़ रही है, इसके लिए भी दुकानों पर पहले से बुकिंग करानी पड़ रही है।
जिले में 71 कॉलेज सहायता प्राप्त, 52 वित्तविहीन मान्यता, 13 राजकीय हाईस्कूल व छह राजकीय इंटर कॉलेज है। जिनमें लगभग 65 हजार विद्यार्थी हैं। इनमें 3200 से अधिक छात्र-छात्राएं विज्ञान विषय के हैं। कक्षा 12 में पढ़ रहे गांव सिनौली निवासी आशीष ने बताया कि दुकानदार को किताब के लिए पहले से बोलना पड़ रहा है, तब जाकर मुश्किल से किताब मिल पाती है। कई बार तो वापस ही लौटना पड़ता है। बड़ौत निवासी 11वीं के छात्र आकाश ने बताया कि एनसीईआरटी की किताबें जरूरी हैं। इनसे आगे की प्रतियोगी परीक्षाओं में भी मदद मिलती है।
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शिक्षक बोले, सीबीएसई बोर्ड की तुलना में मामूली है अंतर
दिगंबर जैन इंटर कॉलेज के शिक्षक अजयराज शर्मा ने बताया कि यूपी बोर्ड के स्कूलों में यूपी एनसीईआरटी की किताबें लगी हैं। इनमें सीबीएसई बोर्ड की एनसीईआरटी की तुलना में पाठ्यक्रम में मामूली अंतर है।
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बोले पुस्तक विक्रेता
बड़ौत। वीके प्रकाशन से राजेश जैन भारती ने बताया कि साइंस की किताबों को छोड़कर अन्य किताबें तो मिल रही हैं, लेकिन विज्ञान की किताबें नहीं आने से दिक्कत हो रही हैं। अभी किताबों के लिए टेंडर जारी नहीं हुआ। है। इस वजह से किताबें नहीं आ रही है। अन्य ऐसे में छात्र मजबूरन निजी प्रकाशकों की किताबें खरीद रहे हैं।
बड़ौत। पिंटी किताब के संचालक वीरेंद्र कुमार जैन ने बताया कि रोजाना छात्र और अभिभावक विज्ञान की किताबें लेने आते हैं, लेकिन किताबों के न आने पर दिक्कतें हो रही है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों को इस ओर ध्यान देना चाहिए। संवाद
स्कूल लगवा रहे निजी प्रकाशकों की पुस्तकें
बड़ौत। बोर्ड ने स्कूलों को एनसीईआरटी की किताबें लगाने के निर्देश दिए थे। लेकिन यह किताबें अब मार्केट में उपलब्ध नहीं हैं, ऐसे में निजी प्रकाशकों की किताबें स्कूल लगवा रहे हैं। एनसीईआरटी की किताब 50 से 60 रुपये में आ जाती है। निजी प्रकाशक की किताब पांच से दस गुना महंगी आती हैं। इससे छात्रों के अभिभावकों की जेब पर भार बढ़ रहा है।
ये बोले प्रधानाचार्य-----
बड़ौत। श्री राम शिक्षा मंदिर इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य राजीव तोमर ने बताया कि सरकार ने इस बार यूपी बोर्ड के स्कूलों में एनसीईआरटी के किताबें अनिवार्य कर दी है, लेकिन जिन फर्मों को टेंडर दिया, वे पर्याप्त संख्या में किताबें नहीं छापा पा रहे हैं, इस वजह से किताबों की कमी बनी हुई है। शिक्षा विभाग को भी चिंता है, वे लगातार इस संबंध में उच्चाधिकारियों से बातचीत कर रहे हैं।