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Baghpat News: सत्य-मार्ग पर चलकर ही आसानी से मिलती है मुक्ति
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-ऋषभदेव सभागार में आयोजित धर्मसभा में बोले जैनमुनि विशुद्धसागर महाराज
फोटो संख्या 6
बड़ौत। दिगम्बर जैनाचार्य विशुद्धसागर ने कहा कि सत्य जानो, सत्य मानो, सत्य सुनो, सत्य बोलो सत्य का आचरण करो। सत्य ही सुन्दर है, सत्य ही श्रेष्ठ है, सत्य ही मंगल है, सत्य ही उत्तम है। सत्य ही धर्म है और सत्य ही सुख-शांति का मार्ग है।
जैनमुनि सोमवार को ऋषभदेव सभागार में आयोजित धर्मसभा में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि व्यक्ति धन के लिए तन की शक्ति नष्ट कर देता है। धन कमाने में स्वास्थ खराब करता है फिर तन पर धन व्यय करता है। पूरा जीवन धन और तन पर न्योछावर कर देता है। अनमोल नर तन, धर्म के बिना व्यर्थ खो देता है। धन महत्वपूर्ण नहीं, धर्म महत्वपूर्ण है। धर्म के प्रभाव से ही संसार के सर्व-सुख प्राप्त होते हैं। चंचल मन एकाग्र होता है। शास्त्र स्वाध्याय से हेय- उपादेय का ज्ञान होता है। जीवन का विकास होता है। पाप का क्षय होता है, पुण्य की प्राप्ति होती है। शास्त्र ज्ञान से आत्मानुभव कला प्राप्त होती है। वैराग्य जागृति होती है। परिणाम विशुद्ध होते हैं। आत्मानन्द की उपलब्धि होती है। जब तक अच्छे बुरे का बोध नहीं होगा, तब तक उन्नति सम्भव नहीं है। दोषों को जाने बिना छोड़ोगे कैसे? दोष छोड़ो, गुणों को धारण करो। जानोगे नहीं तो मानोगे कैसे? सत्य का पक्ष मत छोड़ो। सभा में प्रवीण जैन, सुनील जैन, अतुल जैन, विनोद जैन, सुभाष जैन, सतीश जैन आदि शामिल रहे।
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फोटो संख्या 6
बड़ौत। दिगम्बर जैनाचार्य विशुद्धसागर ने कहा कि सत्य जानो, सत्य मानो, सत्य सुनो, सत्य बोलो सत्य का आचरण करो। सत्य ही सुन्दर है, सत्य ही श्रेष्ठ है, सत्य ही मंगल है, सत्य ही उत्तम है। सत्य ही धर्म है और सत्य ही सुख-शांति का मार्ग है।
जैनमुनि सोमवार को ऋषभदेव सभागार में आयोजित धर्मसभा में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि व्यक्ति धन के लिए तन की शक्ति नष्ट कर देता है। धन कमाने में स्वास्थ खराब करता है फिर तन पर धन व्यय करता है। पूरा जीवन धन और तन पर न्योछावर कर देता है। अनमोल नर तन, धर्म के बिना व्यर्थ खो देता है। धन महत्वपूर्ण नहीं, धर्म महत्वपूर्ण है। धर्म के प्रभाव से ही संसार के सर्व-सुख प्राप्त होते हैं। चंचल मन एकाग्र होता है। शास्त्र स्वाध्याय से हेय- उपादेय का ज्ञान होता है। जीवन का विकास होता है। पाप का क्षय होता है, पुण्य की प्राप्ति होती है। शास्त्र ज्ञान से आत्मानुभव कला प्राप्त होती है। वैराग्य जागृति होती है। परिणाम विशुद्ध होते हैं। आत्मानन्द की उपलब्धि होती है। जब तक अच्छे बुरे का बोध नहीं होगा, तब तक उन्नति सम्भव नहीं है। दोषों को जाने बिना छोड़ोगे कैसे? दोष छोड़ो, गुणों को धारण करो। जानोगे नहीं तो मानोगे कैसे? सत्य का पक्ष मत छोड़ो। सभा में प्रवीण जैन, सुनील जैन, अतुल जैन, विनोद जैन, सुभाष जैन, सतीश जैन आदि शामिल रहे।
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