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रालोद ने आक्रामक रणनीति से बचाया अपना गढ़

Sat, 03 Jul 2021 11:24 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sat, 03 Jul 2021 11:24 PM IST
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RLD saved its stronghold from aggressive strategy
बागपत। जिला पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव में नामांकन से लेकर नाम वापसी तक भाजपा ने तमाम दांव-पेंच अपनाए, लेकिन रालोद की आक्रामक रणनीति इन सब पर भारी पड़ी। रालोद की यह लगातार छठी जीत है। भाजपा जनप्रतिनिधियों और संगठन के बीच की दूरियां भी इस चुनाव में हार का मुख्य कारण रही। रालोद की जीत भाजपा के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। माना जा रहा है कि जिला पंचायत चुनाव में रालोद की इस जीत का असर आने वाले विधानसभा चुनाव में भी देखने को मिलेगा।
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जिला पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव के लिए भाजपा के पास कोई प्रत्याशी भी नहीं था। सपा को झटका देते हुए उनकी वार्ड-18 की सदस्य बबली देवी को भाजपा ने अपने पाले में कर लिया। इसके बाद चुनाव कई बड़े उलटफेर वाले घटनाक्रम हुए। नामांकन के दिन रालोद प्रत्याशी ममता देवी सांसद डॉ. सत्यपाल सिंह के नेतृत्व में भाजपा में शामिल हो गई। इसका पता चलते ही रालोद नेता पूरी ताकत के साथ डैमेज कंट्रोल में जुट गए। चंद घंटे बाद ही ममता देवी की रालोद में वापसी हो गई और उन्होंने पार्टी की प्रत्याशी के रूप में नामांकन किया। इसके बाद सबसे हाईवोल्टेज ड्रामा नामांकन वापसी वाले दिन हुआ। जब ममता देवी बनकर पहुंची एक अनजान महिला उनका परचा वापसी करा गई। इसकी सूचना मिलने पर रालोद नेताओं ने एक बार फिर कलक्ट्रेट पर जमकर बवाल काटा। आखिरकार प्रशासन को बैकफुट पर आना पड़ा। ममता देवी का नामांकन बहाल करने की घोषणा कर दी। इसके बाद रालोद नेताओं को आशंका थी कि मतदान और मतगणना में धांधली की जा सकती है। इसके चलते उन्होंने कार्यकर्ताओं से तीन जुलाई को कलक्ट्रेट पर हल्ला बोल का आह्वान किया था। बड़ी संख्या में रालोद कार्यकर्ता शनिवार को कलक्ट्रेट पहुंचे। मतगणना शुरू होते ही कार्यकर्ताओं ने एक बार फिर जमकर हंगामा किया। प्रत्याशी की जीत सुनिश्चित होने के बाद ही कार्यकर्ता वापस लौटे।
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जिपं सदस्यों के उत्पीड़न पर भी मुखर रहे रालोद नेता
रालोद और सपा के जिला पंचायत सदस्यों के उत्पीड़न को लेकर रालोद नेता मुखर रहे। वार्ड-17 से सदस्य शाहिदा बेगम के घर पर 96.60 लाख के जुर्माने का नोटिस चस्पा कर दिया गया था। सरकारी भूमि पर मकान बनाने का आरोप लगाते हुए मकान गिराने प्रशासन की टीम पहुंच गई। इसके अलावा उनके पुत्रों पर जानलेवा हमले की रिपोर्ट दर्ज हुई। रिश्तेदारों को पुलिस ने गिरफ्तार किया। वार्ड-3 के सदस्य महबूब अल्वी और उनके भाई व पुत्रों के खिलाफ मुकदमे दर्ज हुए। वार्ड-15 के सदस्य सुभाष गुर्जर के कॉलेज की मान्यता पर कार्रवाई की संस्तुति की गई। बतौर कार्यवाहक प्रधानाचार्य उन पर कई आरोप लगाए गए। मेरठ स्थित आवास के बाहर जेसीबी खड़ी कर दबाव बनाया गया। रालोद नेताओं ने सभी सदस्यों के उत्पीड़न पर आक्रामक रवैया अपनाया। धरना-प्रदर्शन, रोड जाम, एसपी कार्यालय का घेराव कर बार-बार प्रशासन को बैकफुट पर धकेला।
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जिपं अध्यक्ष पर लगातार छठी जीत
बागपत वर्ष 1997 में पृथक जिला बना था। जिला बनने के बाद 1998 में हुए पहले चुनाव में शकुन यादव जिला पंचायत अध्यक्ष बनीं थी। साल 2000 में ओंकार यादव ने इस पद पर जीत हासिल की थी। साल 2005 में विधायक योगेश धामा की पत्नी रेणू धामा अध्यक्ष पद पर निर्वाचित हुई थीं। वर्ष 2010 में योगेश धामा जिला पंचायत अध्यक्ष बने। इसके बाद 2015 में फिर से उनकी पत्नी जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर आसीन हुई थी। ये सभी रालोद के प्रत्याशी थे। शनिवार को रालोद प्रत्याशी ममता देवी ने भी इसी सिलसिले को आगे बढ़ाया।
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