{"_id":"60b919938ebc3e59603fd107","slug":"rim-axle-industry-facing-crisis-baghpat-news-mrt541150970","type":"story","status":"publish","title_hn":"संकट से जूझ रहा रिम-धुरा उद्योग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
संकट से जूझ रहा रिम-धुरा उद्योग
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बड़ौत (बागपत)। नगर का रिम-धुरा उद्योग इस समय लोहे के बढ़े दामों के कारण संकट से जूझ रहा है। पिछले साल 35 रुपये लोहे के दाम थे, जो अब बढ़कर 70 रुपये प्रति किलोग्राम पहुंच गए है। दाम बढ़ने से लागत ज्यादा बढ़ गई है। यही कारण है कि कच्चा माल खरीदने मेें भी उद्यमियों के पसीने छूट रहे है। वहीं डिमांड मात्र 15 से 20 प्रतिशत होने के कारण गोदामों में करोड़ाें का माल जंग खा रहा है, मार्केट में भी उद्यमियों के करोड़ाें रुपये फंसा हुआ है। अब उद्यमी सरकार से राहत मिलने का इंतजार कर रहे है।
गोदामों में जंग खा रहा 50 करोड़ का माल
नगर में 110 के करीब रिम-धुरे की फैक्ट्रियां है। उद्यमियों के अनुसार डिमांड न के बराबर होने पर रिम-धुरा उद्योगपतियों के गोदामों में तकरीबन 50 करोड़ का माल जंग लगकर खराब होने की कगार पर है। वहीं मार्केट में भी उद्यमियों का तकरीबन 20 करोड़ उधार पड़े हुए है। यदि औसत नुकसान की बात करें तो अब तक जनपद के उद्यमियों को तकरीबन 210 करोड़ का नुकसान हो चुका है और अभी भी हालात सामान्य होने की उम्मीद नहीं है।
25 से 40 प्रतिशत बढ़ी उत्पादों की कीमतें
बड़ौत। रिम-धुुरा उत्पादों की कीमतें 25 से 40 प्रतिशत तक बढ़ गई है। रिम-धुुरा से जुडे़ उद्यमी कपिल पंवार ने बताया कि 12 किलोग्राम का रिम जो पहले नौ सौ रुपये का पड़ता था, अब उसकी कीमत लगभग 1100 रुपये हो गई है। सामान्य तौर पर प्रयोग होने वाले धुरे की कीमत भी 2100 से बढ़कर 2600 रुपये हो गई है।
विज्ञापन
किसानों पर भी पड़ रही मार
जिले का रिम-धुुरा उत्पादन कृषि संबंधी वाहनों के लिए भी होता है। इसमें बुग्गियों, ट्रालियों आदि में प्रयोग होने वाले व्हील एवं धुरे शामिल होते हैं। इनके महंगा हो जाने से इसका असर किसानों तक भी पहुंच रहा है। हाल ही में गन्ने की ढुलाई का सीजन खत्म हुआ है, अब ज्वार सहित अन्य फसलों की ढुलाई का सीजन है। इसलिए किसानों को रिम-एक्सल की काफी जरूरत होती है।
विदेश को निर्यात हो रहा लोहा
हीरो इंडस्ट्रीज से अमरचंद जैन बताते हैं कि कोरोना काल के बाद विदेशों में लोहे की मांग बढ़ी है। क्योंकि कई देशों से यूरोपियों देशों में लोहे की सप्लाई बंद है। इसलिए भारत से ही लोहा आयात किया जा रहा है। इसके चलते कंपनियों ने लोहा निर्यात करना शुरू कर दिया है, जिससे भारत में लोहे की कीमतों में उछाल आ गया है।
यहां होता है माल सप्लाई
यहां से नेपाल, बंगलादेश, श्रीलंका के अलावा अन्य देशों के अलावा देश में गुजरात, महाराष्ट्र, उड़ीसा, यूपी, छत्तीसगढ़, बिहार व अन्य स्थानों पर रिम-धुरे की सप्लाई होती है।
ये बोले उद्यमी
इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के डिविजन सचिव डॉ. योगेश जिंदल व आदर्श जैन का कहना है कि लोहे की बढ़ी कीमतों की मार से रिम धुरा उद्योग की कमर टूट गई है। पहले ही जीएसटी और लॉकडाउन के कारण मंदी के दौर चल रहा है। सरकार को इस ओर ध्यान देना चाहिए।
कपिल एग्रो इंडस्ट्रीज के मालिक कपिल पंवार व अनिल इंडस्ट्रीज से अर्पित जैन उर्फ टीनू ने कहा कि लोहे के दाम बढ़ने से कारोबार पर प्रभाव पड़ा है। बताया कि कोरोना कर्फ्यू के धीरे-धीरे खत्म होने पर अब अधिकतर फैक्टरियों को ऑर्डर मिले हुए थे, लेकिन अब अचानक लोहे पर रेट बढ़ जाने के कारण लागत बहुत ज्यादा बढ़ गई। ऐसे में सप्लाई न के बराबर है। सप्लाई न होने के कारण पिछले एक सप्ताह के अंदर उद्योग को लाखों का नुकसान हो चुका है।
विज्ञापन
गोदामों में जंग खा रहा 50 करोड़ का माल
नगर में 110 के करीब रिम-धुरे की फैक्ट्रियां है। उद्यमियों के अनुसार डिमांड न के बराबर होने पर रिम-धुरा उद्योगपतियों के गोदामों में तकरीबन 50 करोड़ का माल जंग लगकर खराब होने की कगार पर है। वहीं मार्केट में भी उद्यमियों का तकरीबन 20 करोड़ उधार पड़े हुए है। यदि औसत नुकसान की बात करें तो अब तक जनपद के उद्यमियों को तकरीबन 210 करोड़ का नुकसान हो चुका है और अभी भी हालात सामान्य होने की उम्मीद नहीं है।
विज्ञापन
25 से 40 प्रतिशत बढ़ी उत्पादों की कीमतें
बड़ौत। रिम-धुुरा उत्पादों की कीमतें 25 से 40 प्रतिशत तक बढ़ गई है। रिम-धुुरा से जुडे़ उद्यमी कपिल पंवार ने बताया कि 12 किलोग्राम का रिम जो पहले नौ सौ रुपये का पड़ता था, अब उसकी कीमत लगभग 1100 रुपये हो गई है। सामान्य तौर पर प्रयोग होने वाले धुरे की कीमत भी 2100 से बढ़कर 2600 रुपये हो गई है।
विज्ञापन
किसानों पर भी पड़ रही मार
जिले का रिम-धुुरा उत्पादन कृषि संबंधी वाहनों के लिए भी होता है। इसमें बुग्गियों, ट्रालियों आदि में प्रयोग होने वाले व्हील एवं धुरे शामिल होते हैं। इनके महंगा हो जाने से इसका असर किसानों तक भी पहुंच रहा है। हाल ही में गन्ने की ढुलाई का सीजन खत्म हुआ है, अब ज्वार सहित अन्य फसलों की ढुलाई का सीजन है। इसलिए किसानों को रिम-एक्सल की काफी जरूरत होती है।
विदेश को निर्यात हो रहा लोहा
हीरो इंडस्ट्रीज से अमरचंद जैन बताते हैं कि कोरोना काल के बाद विदेशों में लोहे की मांग बढ़ी है। क्योंकि कई देशों से यूरोपियों देशों में लोहे की सप्लाई बंद है। इसलिए भारत से ही लोहा आयात किया जा रहा है। इसके चलते कंपनियों ने लोहा निर्यात करना शुरू कर दिया है, जिससे भारत में लोहे की कीमतों में उछाल आ गया है।
यहां होता है माल सप्लाई
यहां से नेपाल, बंगलादेश, श्रीलंका के अलावा अन्य देशों के अलावा देश में गुजरात, महाराष्ट्र, उड़ीसा, यूपी, छत्तीसगढ़, बिहार व अन्य स्थानों पर रिम-धुरे की सप्लाई होती है।
ये बोले उद्यमी
इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के डिविजन सचिव डॉ. योगेश जिंदल व आदर्श जैन का कहना है कि लोहे की बढ़ी कीमतों की मार से रिम धुरा उद्योग की कमर टूट गई है। पहले ही जीएसटी और लॉकडाउन के कारण मंदी के दौर चल रहा है। सरकार को इस ओर ध्यान देना चाहिए।
कपिल एग्रो इंडस्ट्रीज के मालिक कपिल पंवार व अनिल इंडस्ट्रीज से अर्पित जैन उर्फ टीनू ने कहा कि लोहे के दाम बढ़ने से कारोबार पर प्रभाव पड़ा है। बताया कि कोरोना कर्फ्यू के धीरे-धीरे खत्म होने पर अब अधिकतर फैक्टरियों को ऑर्डर मिले हुए थे, लेकिन अब अचानक लोहे पर रेट बढ़ जाने के कारण लागत बहुत ज्यादा बढ़ गई। ऐसे में सप्लाई न के बराबर है। सप्लाई न होने के कारण पिछले एक सप्ताह के अंदर उद्योग को लाखों का नुकसान हो चुका है।