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अमन की दुआ की
ब्यूरो/अमर उजाला, बागपत
Updated Sat, 25 Jun 2016 12:25 AM IST
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रमजान के तीसरे जुमे पर जिले की मस्जिदों में नमाज अदा की गई। इस दौरान देश में भाईचारे, अमन, तरक्की के लिए दुआएं की गईं शहर के गांधी बाजार, छत्ते वाली मस्जिद, पुराना कस्बा, तकिए वाली मस्जिद, बस स्टैंड वाली मस्जिद में जुमे की नमाज अदा की गई।
अग्रवाल मंडी टटीरी में मौलवी हाजी जहीर अहमद ने तकरीर में कहा कि जकात भी इस्लाम का एक अहम रुकन है। उधर, टटीरी में तीसरे जुमे पर चेयरपर्सन सीमा देवी ने मस्जिदों के आसपास विशेष सफाई व्यवस्था कराई। मस्जिदों में रोजेदारों की भीड़ रही। बच्चों में भी उत्साह दिखा।
बड़ौत। फूंसवाली मस्जिद के शाही इमाम और जमीयत उलेमा-ए-हिंद के जिला महासचिव मौलाना आरिफ उल हक ने कहा कि अपनी इंद्रियों पर नियंत्रण करना ही सही रोजा है। रोजा मानव जीवन के लिए सामाजिक, आध्यात्मिक और शारीरिक रूप से लाभदायक है।
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शुक्रवार को फूंस वाली मस्जिद में जुमे की नमाज अदा कराने के बाद तकरीर में उन्होंने कहा कि रोजा शरीर के हर अंग का होता है। आंखों का रोजा यानी किसी बहू-बेटी को गंदी नजर से न देखना, जुबान का रोजा अर्थात् झूठ न बोलना, किसी की बुराई न करना, किसी बुरा न कहना है। इस दौरान मौलाना रियाज, अख्तर मुतवल्ली, जमीरुद्दीन अब्बासी, कासिम, अली हसन, यासीन, मोहम्मद आरिफ मलिक आदि मौजूद रहे।
रमजान माह के तीसरे जुमे पर रोजेदारों ने नगर क्षेत्र की मस्जिदों में बड़ी संख्या में पहुंचकर नमाज अदा की। नगर की करीब आधा दर्जन मस्जिदों के अलावा रटौल और अन्य गांवों में स्थित मस्जिदों में नमाज अदा करने के लिये संख्या में रोजेदार और अकीदतमंद पहुंचे।
अमनचैन शांति की दुआ मांगी। जुम्मे की नमाज के कारण मस्जिदों के आसपास व्यवस्थाओं को लेकर पुलिस कर्मी भी मौजूद रहे। जिससे नमाजियों को दिक्कतें न हो।।
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अग्रवाल मंडी टटीरी में मौलवी हाजी जहीर अहमद ने तकरीर में कहा कि जकात भी इस्लाम का एक अहम रुकन है। उधर, टटीरी में तीसरे जुमे पर चेयरपर्सन सीमा देवी ने मस्जिदों के आसपास विशेष सफाई व्यवस्था कराई। मस्जिदों में रोजेदारों की भीड़ रही। बच्चों में भी उत्साह दिखा।
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बड़ौत। फूंसवाली मस्जिद के शाही इमाम और जमीयत उलेमा-ए-हिंद के जिला महासचिव मौलाना आरिफ उल हक ने कहा कि अपनी इंद्रियों पर नियंत्रण करना ही सही रोजा है। रोजा मानव जीवन के लिए सामाजिक, आध्यात्मिक और शारीरिक रूप से लाभदायक है।
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शुक्रवार को फूंस वाली मस्जिद में जुमे की नमाज अदा कराने के बाद तकरीर में उन्होंने कहा कि रोजा शरीर के हर अंग का होता है। आंखों का रोजा यानी किसी बहू-बेटी को गंदी नजर से न देखना, जुबान का रोजा अर्थात् झूठ न बोलना, किसी की बुराई न करना, किसी बुरा न कहना है। इस दौरान मौलाना रियाज, अख्तर मुतवल्ली, जमीरुद्दीन अब्बासी, कासिम, अली हसन, यासीन, मोहम्मद आरिफ मलिक आदि मौजूद रहे।
रमजान माह के तीसरे जुमे पर रोजेदारों ने नगर क्षेत्र की मस्जिदों में बड़ी संख्या में पहुंचकर नमाज अदा की। नगर की करीब आधा दर्जन मस्जिदों के अलावा रटौल और अन्य गांवों में स्थित मस्जिदों में नमाज अदा करने के लिये संख्या में रोजेदार और अकीदतमंद पहुंचे।
अमनचैन शांति की दुआ मांगी। जुम्मे की नमाज के कारण मस्जिदों के आसपास व्यवस्थाओं को लेकर पुलिस कर्मी भी मौजूद रहे। जिससे नमाजियों को दिक्कतें न हो।।