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प्रमोद गांगनौली गैंग का गुर्गा धनपत गिरफ्तार
ब्यूरो/अमर उजाला, बागपत
Updated Sat, 24 Dec 2016 12:09 AM IST
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धनपत
- फोटो : amar ujala
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बागपत/बड़ौत। प्रमोद गांगनौली गैंग के सदस्य पांच हजार रुपये के इनामी अनिल उर्फ धनपत को पुलिस ने मुठभेड़ के दौरान गिरफ्तार कर लिया। उसके पीछे बागपत, शामली के अलावा उत्तराखंड की पुलिस लगी हुई थी। वह फायरमैन भूपेंद्र की हत्या समेत कई केसों में फरार चल रहा था।
पुलिस लाइन में शुक्रवार को एसपी अजय शंकर राय ने बताया कि बड़ौत में छपरौली नहर पुल के पास वाहन चेकिंग के दौरान पुलिस ने बाइक सवार युवक को रोकने का प्रयास किया तो उसने फायरिंग की। मुठभेड़ में उसे पकड़ लिया गया। हपकड़ा गया युवक अनिल उर्फ धनपत पुत्र नरेंद्र निवासी ककड़ीपुर बताया गया। उसके पास से एक तमंचा, कारतूस, मोबाइल, चोरी की बाइक मिली है। अनिल पर पांच हजार रुपये का इनाम था।एसपी के मुताबिक, वह बिनौली क्षेत्र के गांव सिरसली निवासी फायरमैन भूपेंद्र की हत्या में शामिल था। शामली के कांधला क्षेत्र में उसने अपने साथी सोनू निवासी गूंगाखेड़ी की हत्या की थी। इनके अलावा हरिद्वार के गंगानगर थाना क्षेत्र में चोरी का भी उस पर आरोप है।
कस्टडी से दो बार भाग चुका है अनिल
फायरमैन भूपेंद्र की हत्या के मामले में बिनौली पुलिस अनिल को पकड़कर थाने ले आई थी। दो अक्तूबर की रात वह पुलिसकर्मियों को चकमा देकर फरार हो गया था। इसके पहले वह अपने साथी के साथ मिनी बस में हथकड़ी काटकर कलक्ट्रेट के पास फरार हो चुका है। वर्ष 2011 में बड़ौत थाने में उसके खिलाफ चोरी समेत 14 मुकदमे दर्ज हैं। अनिल के मुताबिक, मेरठ जेल में फायरमैन की हत्या की साजिश रची गई। भूपेंद्र की हत्या के लिए उसे जेल में बंद आयुष ने तैयार किया था। भूपेंद्र आयुष की विरोधी पार्टी का पक्ष ले रहा था। प्रमोद की हत्या का बदला लेने की बात उसने दोहराई। धनपत ने पुलिस को अपने साथियों के नाम विकास, नरेंद्र, ककड़ीपुर, नितिन बावली के अलावा सतेंद्र, इरफान, मोंटी बताए हैं।
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सेना में सिपाही चयनित हुआ था
अनिल ने बताया कि दो साल पूर्व सेना में उसका सलेक्शन सिपाही पद पर हो गया था। बाद में उसका नाम आपराधिक घटना में आ गया था। इसलिए वह ट्रेनिंग में नहीं जा पाया। बिनौली थाने से भागने के बाद वह सीधे शाहदरा गोल चक्कर पर गया। वहां एक छात्र के पास पांच-छह दिन रहा।
बड़ौत में पुलिस के सामने घूमता रहा
अनिल उर्फ धनपत ने बताया कि उसने अधिकांश फरारी बड़ौत में काटी है। पुलिस से बचने के लिए उसने सिर के बाल और दाढ़ी बढ़ा ली थी। इस दौरान वह कई बार पुलिस के सामने से गुजरा, लेकिन पुलिस उसे पहचान नहीं पाई। उसका कहना है कि वह मुखबिर की सूचना पर पकड़ा गया। मुखबिर का उसे पता भी चल गया है।
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पुलिस लाइन में शुक्रवार को एसपी अजय शंकर राय ने बताया कि बड़ौत में छपरौली नहर पुल के पास वाहन चेकिंग के दौरान पुलिस ने बाइक सवार युवक को रोकने का प्रयास किया तो उसने फायरिंग की। मुठभेड़ में उसे पकड़ लिया गया। हपकड़ा गया युवक अनिल उर्फ धनपत पुत्र नरेंद्र निवासी ककड़ीपुर बताया गया। उसके पास से एक तमंचा, कारतूस, मोबाइल, चोरी की बाइक मिली है। अनिल पर पांच हजार रुपये का इनाम था।एसपी के मुताबिक, वह बिनौली क्षेत्र के गांव सिरसली निवासी फायरमैन भूपेंद्र की हत्या में शामिल था। शामली के कांधला क्षेत्र में उसने अपने साथी सोनू निवासी गूंगाखेड़ी की हत्या की थी। इनके अलावा हरिद्वार के गंगानगर थाना क्षेत्र में चोरी का भी उस पर आरोप है।
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कस्टडी से दो बार भाग चुका है अनिल
फायरमैन भूपेंद्र की हत्या के मामले में बिनौली पुलिस अनिल को पकड़कर थाने ले आई थी। दो अक्तूबर की रात वह पुलिसकर्मियों को चकमा देकर फरार हो गया था। इसके पहले वह अपने साथी के साथ मिनी बस में हथकड़ी काटकर कलक्ट्रेट के पास फरार हो चुका है। वर्ष 2011 में बड़ौत थाने में उसके खिलाफ चोरी समेत 14 मुकदमे दर्ज हैं। अनिल के मुताबिक, मेरठ जेल में फायरमैन की हत्या की साजिश रची गई। भूपेंद्र की हत्या के लिए उसे जेल में बंद आयुष ने तैयार किया था। भूपेंद्र आयुष की विरोधी पार्टी का पक्ष ले रहा था। प्रमोद की हत्या का बदला लेने की बात उसने दोहराई। धनपत ने पुलिस को अपने साथियों के नाम विकास, नरेंद्र, ककड़ीपुर, नितिन बावली के अलावा सतेंद्र, इरफान, मोंटी बताए हैं।
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सेना में सिपाही चयनित हुआ था
अनिल ने बताया कि दो साल पूर्व सेना में उसका सलेक्शन सिपाही पद पर हो गया था। बाद में उसका नाम आपराधिक घटना में आ गया था। इसलिए वह ट्रेनिंग में नहीं जा पाया। बिनौली थाने से भागने के बाद वह सीधे शाहदरा गोल चक्कर पर गया। वहां एक छात्र के पास पांच-छह दिन रहा।
बड़ौत में पुलिस के सामने घूमता रहा
अनिल उर्फ धनपत ने बताया कि उसने अधिकांश फरारी बड़ौत में काटी है। पुलिस से बचने के लिए उसने सिर के बाल और दाढ़ी बढ़ा ली थी। इस दौरान वह कई बार पुलिस के सामने से गुजरा, लेकिन पुलिस उसे पहचान नहीं पाई। उसका कहना है कि वह मुखबिर की सूचना पर पकड़ा गया। मुखबिर का उसे पता भी चल गया है।