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जर्जर हो गई बिजली घर की बिल्डिंग, हो सकता है बड़ा हादसा
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रटौल में जर्जर हालत में बिजली घर
- फोटो : BAGHPAT
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गिर रहा लिंटर का प्लास्टर, बरसात में तिरपाल के सहारे करते हैं मशीनों का बचाव
चहारदीवारी न होने से लगा रहता था अवारा पशुओं का जमावड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी
चांदीनगर। रटौल बिजलीघर की इमारत की हालत जर्जर हो चुकी है। छत के लिंटर का प्लास्टर टूटकर गिरने लगा है। बारिश होने पर मशीनों पर पानी टपकता है, जिससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। बिजलीघर में चहारदीवारी न होने से बिजलीघर में आवारा पशुओं का जमावड़ा रहता है। ऐसा नहीं है कि निगम के अधिकारी इससे अनजान हैं, मगर जानकारी होने पर भी कोई सुनवाई नहीं की जा रही है।
रटौल बिजलीघर में चार एसएसओ, दस लाइन मैन व एक टीजीटू समेत 15 कर्मचारी तैनात हैं। भवन जर्जर हो चुका है, बरसात में कर्मचारी मशीनों पर तिरपाल रखकर काम चलाते हैं। जिससे बिजलीघर में फाल्ट व बड़ा हादसा होने की आशंका बनी रहती है। चहारदीवारी न होने के कारण बिजलीघर के अंदर आवारा पशुओं का जमावड़ा लगा रहता है। जानकारी के बाद भी ऊर्जा निगम के अधिकारी समस्या को नजर अंदाज कर रहे हैं।
45 वर्ष पुरानी है इमारत, नहीं हुई मरम्मत
रटौल बिजलीघर की इमारत 45 वर्ष पुरानी है। मरम्मत न होने के कारण भवन जर्जर हो गया है। इसका उद्घाटन देश के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के बेटे पूर्व ऊर्जा मंत्री सुनील शास्त्री ने 14 अप्रैल 1986 में किया था।
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नहीं हो रही सुनवाई, हादसे का डर
निगम के कर्मचारियों के बार-बार शिकायत करने के बावजूद सुनवाई नहीं हो रही है। कर्मचारियों को हादसे का डर लगा रहता है। निगम के बागपत द्वितीय खंड अधिशासी अभियंता ऋषिपाल सिंह ने बताया कि कई बार निगम के अधिकारियों को पत्र भेजकर स्थिति से अवगत कराया जा चुका है, मगर कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
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चहारदीवारी न होने से लगा रहता था अवारा पशुओं का जमावड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी
चांदीनगर। रटौल बिजलीघर की इमारत की हालत जर्जर हो चुकी है। छत के लिंटर का प्लास्टर टूटकर गिरने लगा है। बारिश होने पर मशीनों पर पानी टपकता है, जिससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। बिजलीघर में चहारदीवारी न होने से बिजलीघर में आवारा पशुओं का जमावड़ा रहता है। ऐसा नहीं है कि निगम के अधिकारी इससे अनजान हैं, मगर जानकारी होने पर भी कोई सुनवाई नहीं की जा रही है।
रटौल बिजलीघर में चार एसएसओ, दस लाइन मैन व एक टीजीटू समेत 15 कर्मचारी तैनात हैं। भवन जर्जर हो चुका है, बरसात में कर्मचारी मशीनों पर तिरपाल रखकर काम चलाते हैं। जिससे बिजलीघर में फाल्ट व बड़ा हादसा होने की आशंका बनी रहती है। चहारदीवारी न होने के कारण बिजलीघर के अंदर आवारा पशुओं का जमावड़ा लगा रहता है। जानकारी के बाद भी ऊर्जा निगम के अधिकारी समस्या को नजर अंदाज कर रहे हैं।
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45 वर्ष पुरानी है इमारत, नहीं हुई मरम्मत
रटौल बिजलीघर की इमारत 45 वर्ष पुरानी है। मरम्मत न होने के कारण भवन जर्जर हो गया है। इसका उद्घाटन देश के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के बेटे पूर्व ऊर्जा मंत्री सुनील शास्त्री ने 14 अप्रैल 1986 में किया था।
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नहीं हो रही सुनवाई, हादसे का डर
निगम के कर्मचारियों के बार-बार शिकायत करने के बावजूद सुनवाई नहीं हो रही है। कर्मचारियों को हादसे का डर लगा रहता है। निगम के बागपत द्वितीय खंड अधिशासी अभियंता ऋषिपाल सिंह ने बताया कि कई बार निगम के अधिकारियों को पत्र भेजकर स्थिति से अवगत कराया जा चुका है, मगर कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
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