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तीसरी लहर से कैसे होगा मुकाबला: पीकू वार्ड बनाया गया, 31 वेंटीलेटर भी लगे, चलाने वाले सिर्फ छह
Tue, 28 Dec 2021 12:18 AM IST
मेरठ ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ
Published by: मेरठ ब्यूरो
Updated Tue, 28 Dec 2021 12:18 AM IST
सार
कोरोना नया वेरियंट आने पर स्वास्थ्य विभाग को फिर से परेशानियों से जूझना पड़ सकता है। कोरोना की तीसरी लहर से निपटने के लिए बागपत के जिला अस्पताल में पीकू सेंटर बनाया गया है तो वेंटिलेटर भी बढ़ाए गए हैं।
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विस्तार
कोरोना की तीसरी लहर से निपटने के लिए बागपत के जिला अस्पताल में पीकू सेंटर बनाया गया है तो वेंटिलेटर भी बढ़ाए गए हैं। जिलेभर में 31 वेंटिलेटरों को चलाने वाले केवल छह चिकित्सक है। वहीं, जिले में स्वास्थ्य विभाग की 35 में से तीन एंबुलेंस में ही वेंटिलेटर की व्यवस्था है। इस तरह आधी अधूरी सुविधाओं के साथ कोरोना से जंग लड़ने की तैयारी हो रही है।
जिला अस्पताल में दस, खेकड़ा सीएचसी में चार, सरूरपुर कलां सीएचसी में दो और पीकू सेंटर में 15 वेंटिलेटर है। अधिकांश चिकित्सकों पर वेंटिलेटर चलाने नहीं आते है। कोरोना की दूसरी लहर में वेंटिलेटर की कमी के कारण मरीजों को दूसरे अस्पतालों में रेफर करना पड़ा था।
नया वेरियंट आने पर स्वास्थ्य विभाग को फिर से परेशानियों से जूझना पड़ सकता है। दूसरी लहर के बाद जिला अस्पताल में 40 बेड का पीकू सेंटर तैयार कराया गया, इसमें 15 वेंटिलेटर है। जिले में वेंटिलेटर चलाने वाले मात्र छह चिकित्सक है।
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संक्रमण से निपटने के लिए बाल रोग विशेषज्ञ राजसिंह के निर्देशन में 25 चिकित्सकों, स्टाफ नर्स को वेंटिलेटर चलाने का प्रशिक्षण दिया गया था। जिले में 102 व 108 की कुल 35 एंबुलेंस है। इनमें से केवल तीन एंबुलेंस में ही वेंटिलेटर की व्यवस्था है। संसाधनों के अभाव में दूसरी लहर में गंभीर मरीजों को दूसरे अस्पतालों में रेफर करना पड़ा था। अब आधी अधूरी सुविधाओं के साथ स्वास्थ्य विभाग की तैयारी चल रही है।
जिले में वेंटिलेटर चलाने वाले छह चिकित्सक है। इनमें से तीन जिला अस्पताल और तीन पीकू सेंटर में है। जिले के 25 चिकित्सक व स्टॉफ नर्स को वेंटिलेटर चलाने का प्रशिक्षण दिया जा चुका है। - डॉ दिनेश कुमार, सीएमओ
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जिला अस्पताल में दस, खेकड़ा सीएचसी में चार, सरूरपुर कलां सीएचसी में दो और पीकू सेंटर में 15 वेंटिलेटर है। अधिकांश चिकित्सकों पर वेंटिलेटर चलाने नहीं आते है। कोरोना की दूसरी लहर में वेंटिलेटर की कमी के कारण मरीजों को दूसरे अस्पतालों में रेफर करना पड़ा था।
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नया वेरियंट आने पर स्वास्थ्य विभाग को फिर से परेशानियों से जूझना पड़ सकता है। दूसरी लहर के बाद जिला अस्पताल में 40 बेड का पीकू सेंटर तैयार कराया गया, इसमें 15 वेंटिलेटर है। जिले में वेंटिलेटर चलाने वाले मात्र छह चिकित्सक है।
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संक्रमण से निपटने के लिए बाल रोग विशेषज्ञ राजसिंह के निर्देशन में 25 चिकित्सकों, स्टाफ नर्स को वेंटिलेटर चलाने का प्रशिक्षण दिया गया था। जिले में 102 व 108 की कुल 35 एंबुलेंस है। इनमें से केवल तीन एंबुलेंस में ही वेंटिलेटर की व्यवस्था है। संसाधनों के अभाव में दूसरी लहर में गंभीर मरीजों को दूसरे अस्पतालों में रेफर करना पड़ा था। अब आधी अधूरी सुविधाओं के साथ स्वास्थ्य विभाग की तैयारी चल रही है।
जिले में वेंटिलेटर चलाने वाले छह चिकित्सक है। इनमें से तीन जिला अस्पताल और तीन पीकू सेंटर में है। जिले के 25 चिकित्सक व स्टॉफ नर्स को वेंटिलेटर चलाने का प्रशिक्षण दिया जा चुका है। - डॉ दिनेश कुमार, सीएमओ