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380 करोड़ रुपये का गन्ना भुगतान पेंडिंग

Fri, 01 Apr 2016 01:03 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बागपत
ब्यूरो/अमर उजाला, बागपत Updated Fri, 01 Apr 2016 01:03 AM IST
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Pending sugarcane payment of Rs 380 crore
बड़ौत तहसील में भुगतान को लेकर एसडीएम का घेराव करते किसान। - फोटो : amar ujala
बागपत जिले की तीनों शुगर मिलों ने अब तक किसानों का 450 करोड़ रुपये का गन्ना खरीदा है, लेकिन भुगतान लगभग 113 करोड़ रुपये का ही किया।  अब पेराई सत्र समाप्त करने की तैयारी में हैं। जिसको लेकर किसान टेंशन में हैं। गन्ने का भुगतान न होने के चलते कर्ज में डूबते जा रहे हैं किसान।
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गन्ना भुगतान न होने से कर्ज में डूबा किसान अपने बच्चों की फीस जमा न होने, शादी के बगैैर घर में बैठी लड़कियों को देखकर कराह रहा है। गन्ने का भुगतान भी थोड़ा बहुत नहीं जिले की सिर्फ तीन शुगर मिलों का ही 380 करोड़ रुपये का है। इनमें से भी सिर्फ मलकपुर मिल पर ही अब तक लगभग 300 करोड़ रुपये का बकाया हो चुका है।
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इसमें लगभग 250 करोड़ वर्तमान सत्र है और पिछले सत्र का बकाया 50 करोड़ रुपये का भी भुगतान मलकपुर शुगर मिल ने नहीं किया। यह तो सिर्फ तीन मिलों की कहानी है। इनमें बागपत और रमाला शुगर मिलें सहकारी मिलें हैं, दोनों मिलें 15 फरवरी तक का भुगतान कर भी चुकीं हैं। जबकि किनौनी, शामली, मोदीनगर, खतौली, दौराला समेत आसपास के जिलों की आधा दर्जन मिलों को भी बागपत के किसानों का गन्ना जा रहा है और उन पर भी सौ करोड़ रुपये से अधिक का बकाया है।
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लगभग साढ़े पांच सौ करोड़ रुपये की फसल बेचने के बाद पैसा न मिल पाने के चलते यहां का किसान कर्ज में  डूब चुका है। इससे किसानों की हालत खराब हो चुकी है। किसानों में कसक इस बात की है कि पूरा गन्ना दे दिया, एक रुपये का भुगतान इस सत्र का मलकपुर मिल ने नहीं किया। जबकि पेराई सत्र समाप्त होने को आया है। 10 अप्रैल के आसपास मलकपुर मिल, 15 अप्रैल तक बागपत और मई के पहले सप्ताह में रमाला शुगर मिल अपना पेराई सत्र समाप्त कर देंगी। उसके बाद भुगतान तो दूर मिल के अधिकारियों का मिलना भी मुश्किल हो जाएगा।

इस बाबत जिला गन्ना अधिकारी सुशील कुमार कहते हैं कि बागपत और रमाला शुगर मिल तो नियमित भुगतान कर रहे हैं। मलकपुर शुगर मिल पर भी पूरा दबाव है। इस पेराई सत्र के समाप्त होने से पूर्व मलकपुर शुगर मिल से पिछले सत्र का तो पूरा भुगतान करा दिया जाएगा। इस सत्र का भी भुगतान शुरू कराया जाएगा।

किसानों ने एसडीएम को घेरा
बड़ौत। डायरेक्टर नरेश के नेतृत्व में गन्ना भुगतान की मांग को लेकर तहसील पहुंचे और एसडीएम का घेराव किया। उनका कहना था कि मलकपुर चीनी मिल पर किसानों का 2014-15 का 38 करोड़ रुपये और 2015-16 के 253 करोड़ रुपये गन्ना भुगतान के बकाया है। उन्होंने कहा कि 31 मार्च 2015 तक का भुगतान मलकपुर मिल द्वारा दिया गया। जो समिति को भेजा गया है। समिति सचिव द्वारा 10 मार्च 2015 तक का ही भुगतान किया गया है और सचिव 15 करोड़ रुपये का भुगतान नहीं कर रहा है।

सरकार और बिजली विभाग द्वारा चलाई गई योजनाओं का लाभ भी किसानों को नहीं मिल पा रहा है। यदि गन्ना भुगतान मिलता तो किसान बिजली की योजना का फायदा उठा सकते थे। किनौनी मिल का भुगतान भी रुका हुआ है। एसडीएम का घेराव कर सचिव के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन एसडीएम को सौंपा। राजू तोमर सिरसली, अनिल कुमार, सोराज सिंह, कालू राम, सुनील डायरेक्टर, अरविंद, सुभाष चंद आदि शामिल रहे।

वर्तमान स्थिति 
मलकपुर शुगर मिल -  इस वर्ष अब तक 250 करोड़ रुपये के 90 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई की है, एक रुपये का भी भुगतान नहीं किया। 50 करोड़ रुपये पिछले सत्र के बकाया हैं। मिल 10 अप्रैल तक बंद हो जाएगी।  बागपत शुगर मिल - अब तक लगभग 98 करोड़ रुपये का गन्ना खरीद चुकी है, भुगतान सिर्फ 58 करोड़ का किया है। 40 करोड़ रुपये बकाया हैं। 15 अप्रैल तक पेराई सत्र समाप्त कर देगी।

रमाला शुगर मिल - अब तक 98.17 करोड़ रुपये का गन्ना खरीदा जा चुका है। 55.89 रुपये का भुगतान किया है अभी 40.28 करोड़ रुपये का बकाया है। मिल मई के प्रथम सप्ताह में बंद होगी।
 
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