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मवींकला गांव पहुंची किसानों की शांति यात्रा, स्वागत
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सुप्रीम कोर्ट से की कृषि विशेषज्ञों की टीम का गठन कर कृषि कानून बनाने की मांग
बागपत। कृषि कानून के विरोध में बड़ौत तहसील से शुरू हुई किसान शांति यात्रा का शनिवार को मवींकला गांव में स्वागत किया गया। किसान अधिकार आंदोलन के संयोजक नरेंद्र राणा ने शनिवार को सुप्रीम कोर्ट को पत्र भेजकर कृषि विशेषज्ञों की टीम गठित कर कृषि कानून बनाने की मांग की।
गांव में हुई बैठक में नरेंद्र राणा ने कहा कि सरकार ओर कुछ बुद्धिजीवी वर्ग के लोग कृषि कानून को किसान हित में बता रहे है, जबकि कृषि कानून में काफी असमानताएं है। कृषि कानून को लेकर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है। नहीं तो भविष्य में इसके परिणाम गंभीर हो सकते है। उन्होंने कहा कि गोवंश के हित और सुरक्षा के लिए कानून बनाते समय भी सरकार ओर कुछ बुद्धिजीवी वर्ग ने इसी प्रकार प्रचार किया गया था। कानून बनाने के बाद गोवंश आवारा पशु की श्रेणी में आ गया है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट को भेजे पत्र में किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए कृषि विशेषज्ञों की टीम बनाकर कानून बनाने की मांग की। इस मौके पर धर्मपाल, सुरेंद्रपाल, राजकुमार, सचिन कुमार सहित अन्य ग्रामीण मौजूद रहे।
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बागपत। कृषि कानून के विरोध में बड़ौत तहसील से शुरू हुई किसान शांति यात्रा का शनिवार को मवींकला गांव में स्वागत किया गया। किसान अधिकार आंदोलन के संयोजक नरेंद्र राणा ने शनिवार को सुप्रीम कोर्ट को पत्र भेजकर कृषि विशेषज्ञों की टीम गठित कर कृषि कानून बनाने की मांग की।
गांव में हुई बैठक में नरेंद्र राणा ने कहा कि सरकार ओर कुछ बुद्धिजीवी वर्ग के लोग कृषि कानून को किसान हित में बता रहे है, जबकि कृषि कानून में काफी असमानताएं है। कृषि कानून को लेकर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है। नहीं तो भविष्य में इसके परिणाम गंभीर हो सकते है। उन्होंने कहा कि गोवंश के हित और सुरक्षा के लिए कानून बनाते समय भी सरकार ओर कुछ बुद्धिजीवी वर्ग ने इसी प्रकार प्रचार किया गया था। कानून बनाने के बाद गोवंश आवारा पशु की श्रेणी में आ गया है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट को भेजे पत्र में किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए कृषि विशेषज्ञों की टीम बनाकर कानून बनाने की मांग की। इस मौके पर धर्मपाल, सुरेंद्रपाल, राजकुमार, सचिन कुमार सहित अन्य ग्रामीण मौजूद रहे।
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