आंखों देखा मंजर: अस्पताल में आग देख थम गई थी सांसें, नवजात सुरक्षित शिफ्ट होने पर परिजनों को मिली राहत
उत्तर प्रदेश के बड़ौत में आस्था अस्पताल में आग लगने से उन दंपती की सांस थम गई थी, जिनके बच्चे वहां नर्सरी में भर्ती थे। वहां चार से छह पहले जन्म लेने वाले बच्चे थे। नवजात जब मौत के साए से बाहर निकले और दूसरे अस्पताल में शिफ्ट कर दिए गए। तब जाकर परिजनों ने राहत की सांस ली, क्योंकि उनमें से कुछ का पहला बच्चा था।
लगातार बढ़ती आग देखकर वहां नर्सरी में भर्ती बच्चों के परिवार वालों की सांस थम गई। अशरफाबाद थल निवासी सलीम ने बताया कि उसकी पत्नी इशरा ने चार दिन पहले बच्चे को जन्म दिया था, जिसको नर्सरी में रखा गया था।
जब अस्पताल में आग लगी तो समझ नहीं आया कि क्या किया जाए। ऐसा लग रहा था कि जैसे उनकी जिंदगी छिन जाएगी और उनकी हिम्मत जवाब देने लगी। मगर बाल रोग विशेषज्ञ डाॅ. अभिनव तोमर वहां तुरंत ही पहुंच गए और बच्चों को शिफ्ट कराना शुरू किया।
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बच्चे शिफ्ट होने पर दोबारा हिम्मत मिली। गोपालपुर खड़ाना गांव निवासी प्रमोद की पत्नी अनिता ने पहले बच्चे को जन्म दिया। वह बताते हैं कि आग लगने पर धुआं नीचे बढ़ता जा रहा था और उसे देखकर वह इधर-उधर दौड़ते रहे। वहां एंबुलेंस आई और उसमें बच्चों को दूसरे अस्पताल में भेजा गया।
पिछौकरा निवासी सलमा ने भी चार दिन पहले बच्चे को जन्म दिया। वहीं बड़ौत निवासी शुभम की पत्नी ने चार दिन पहले बच्चे को जन्म दिया था। इसके अलावा नर्सरी में तितरौदा निवासी नरेन्द्र, भगवानपुर निवासी सुरेशपाल, सरूरपुर निवासी अनुज, गांगनौली निवासी वसीम खान, बिहारीपुर निवासी अमित, बागपत निवासी वसीम, असारा निवासी अंजुम समेत 16 लोगों के बच्चे भर्ती थे।
जब तक यह सभी बच्चे दूसरे अस्पताल में शिफ्ट नहीं हुए, तब तक उनके परिवार वालों की हालत खराब रही। क्योंकि इनमें से कई दंपती को काफी मन्नतों के बाद कई साल बाद बच्चे का सुख मिला था।
बाल रोग विशेषज्ञ के साथ पहुंचे स्टाफ ने दिखाया हौंसला
आस्था अस्पताल में आग लगने से भगदड़ मच गई। इस दौरान सूचना पर पहुंचे बाल रोग विशेषज्ञ डाॅ. अभिनव तोमर व उनकी टीम में शामिल डाॅ. अमन नागर, डाॅ. रिजवान, नर्सिंग इंचार्ज साक्षी, सिस्टर शिवानी, गुलशना, प्रियांशी व रिजवाना ने वार्ड में भर्ती नवजात बच्चों को ऑक्सीजन व अन्य उपकरण लगाकर दूसरी जगह सुरक्षित भर्ती कराया।