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BAGHPAT: शादी के बाद भूलकर न करें ये गलती, नहीं तो उम्रभर झेलना पड़ेगा दर्द, 550 महिलाएं हुईं बांझपन की शिकार

Fri, 28 Oct 2022 01:22 PM IST
मेरठ ब्यूरो मुकेश पंवार, संवाद न्यूज एजेंसी, बागपत
मुकेश पंवार, संवाद न्यूज एजेंसी, बागपत Published by: मेरठ ब्यूरो Updated Fri, 28 Oct 2022 01:22 PM IST
सार

BAGHPAT: शादी के बाद भूलकर भी ये गलती न करें, नहीं तो आपको उम्रभर दर्द झेलना पड़ेगा। वहीं जनपद में 550 से अधिक महिलाएं बांझपन का शिकार हुईं।

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Pain of infertility giving freedom from unwanted fetus
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : amar ujala

विस्तार

अनचाहा गर्भ न ठहर जाए, इसके लिए सहेली या परिचित महिलाओं की सलाह पर गर्भनिरोधक गोलियां के सेवन की चूक से महिलाओं की कोख सूख रही है। अज्ञानता में की गई चूक से ममता का आंचल सूना हो रहा है और अब वह उपचार कराना पड़ रहा है।

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चिकित्सकों की माने तो अक्सर नवदंपति शादी के बाद शुरुआती दौर में बच्चा पैदा करने से बचता है और वह गर्भ ठहरने से बचने के लिए बिना चिकित्सक की सलाह के मेडिकल स्टोर से दवा मंगा लेती हैं। कुछ महिलाएं तो विज्ञापन देखकर खुद ही दवाएं मंगा लेती हैं। बाद में इसके दुष्प्रभाव नजर आते हैं और महिलाओं को गर्भधारण करने में दिक्कत हो रही है।
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स्वास्थ्य विभाग के अनुसार ऐसी पांच फीसदी महिलाएं बांझपन का दर्द झेल रही हैं। यानी जनपद की लगभग 550 से अधिक महिलाएं इस समय बांझपन का शिकार हैं, जो जिला अस्पताल के अलावा मेरठ, दिल्ली, सोनीपत, नोएडा, हरियाणा, गुड़गांव सहित अन्य जगहों पर अपना उपचार करा रही है।
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केस नंबर - एक
बड़ौत में आजाद नगर कॉलोनी की रहने वाली महिला ने बताया कि शादी को दस साल हो चुके हैं, लेकिन आज तक बच्चा नहीं है। शुरुआती दौर में पति ने जल्दी बच्चा न करने की बात कही। जिसके बाद एक सहेली ने दवाई बताई और दो-तीन बार सेवन करने से बाद में समस्या पैदा हो गई। अब उनका उपचार दिल्ली के एम्स में चल रहा है।

केस नंबर - दो
बड़ौत में सिनौली गांव की महिला ने बताया कि शादी को 12 साल बीत चुके हैं, लेकिन बच्चा नहीं है। शादी के बाद पति-पत्नी के बीच जल्दी बच्चा पैदा न करने पर सहमति बनी। उसके बाद से आज तक पूनम की गोद सुनी है। उन्होंने बिना चिकित्सक की सलाह के दवा खाई थी। कई बार गर्भ भी ठहरा, लेकिन फिर कोई दिक्कतें उत्पन्न हो जाती हैं।

ग्रामीण महिलाओं की संख्या अधिक
जिला महिला रोग विशेषज्ञ डॉ. अंजू बाला ने बताया कि जिला अस्पताल सहित सीएचसी व पीएचसी पर आने वाली 95 फीसदी महिलाएं बिना चिकित्सक के परामर्श के गर्भपात की दवाएं खा लेती हैं और बताती हैं कि अब हमें समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं। गलत ढंग से दवाइयों के सेवन से पांच प्रतिशत में बांझपन तक की समस्या देखने में आ रही है। अत्यधिक रक्तस्राव, एक से डेढ़ महीने तक रक्तस्राव, शत प्रतिशत भ्रूण बाहर न आना, लंबे समय तक रक्तस्राव से संक्रमण की परेशानी भी सामने आ रही है। गर्भाश्य में संक्रमण तो हुआ ही है, खून की कमी भी हो गई। रक्तचाप और हृदयगति भी प्रभावित हुई है। इनमें निम्न यानी ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं की संख्या अधिक है।

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गर्भ गिराने के लिए दो से तीन बार किया दवाओं का सेवन
सीएचसी अधीक्षक डॉ. विजय कुमार ने बताया कि सीएचसी पर आने वाली महिलाएं पूछताछ में बताती हैं कि गर्भ गिराने के लिए दो-तीन बार दवाओं का इस्तेमाल किया। पांच फीसदी महिलाओं की जांच में संक्रमण से ट्यूब्स बंद मिले, जिससे मां बनने का सुख प्राप्त नहीं हुआ।

मामला बिगड़ने पर करना पड़ता है ऑपरेशन
महिला रोग विशेषज्ञ डॉ. सरिता ने बताया कि दवाओं को सही तरीके से न खाने से कई बार बच्चेदानी में कुछ मांस के टुकड़े रह जाते हैं। इससे हालत खराब होने पर अल्ट्रासाउंड कराने के बाद इनका ऑपरेशन कर इसे निकाला जाता है। ऐसे मरीजों में से कई की हालत भी गंभीर मिलती है।

रखें ख्याल
1. अनचाहे गर्भ से बचने के लिए परिवार नियोजन अपनाना बेहतर।
2. गर्भपात की दवा खानी है तो चिकित्सक से परामर्श जरूर कर लें।
3. अनचाहा गर्भ गिराने के लिए बार-बार दवाएं न खाएं।
4. रक्तस्राव बंद न हो तो बिना देर किए चिकित्सक के पास जाएं।

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