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अन्य ऐतिहासिक और धर्मस्थलों को मिलेगा फायदा
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बागपत। सिनौली में संग्रहालय बनाए जाने का यहां के अन्य ऐतिहासिक और धर्मस्थलों को फायदा मिलेगा। क्योंकि सिनौली में संग्रहालय बनने पर पर्यटकों का रुझान बढ़ेगा और यहां आकर वह अन्य स्थलों को देखने के लिए भी जाएंगे। इसके साथ ही अन्य ऐतिहासिक स्थलों को संरक्षित किए जाने की उम्मीद भी बढ़ जाएगी।
बागपत में जहां सिनौली का नाम इतिहास से जुड़ा हुआ है और यहां चार हजार साल पुराने पुरावशेष मिल चुके हैं। वहीं यहां अन्य कई ऐसे ऐतिहासिक व धार्मिक स्थल है, जिनसे बागपत की पूरे देश में पहचान बनी हैं। यहां महाभारत कालीन लाक्षाग्रह है, जहां से पांडव अपनी जान बचाने के लिए सुरंग में निकलकर गए थे। यहां पुरा महादेव में भगवान परशुरामेश्वर महादेव मंदिर है, जिसके दूर-दूर तक मान्यता है और यहां कई प्रदेशों के कांवड़िये जलाभिषेक करते हैं।
बाखरपुर बालैनी में वाल्मीकि मंदिर भी मौजूद है, जो भगवान राम के पुत्र लवकुश की जन्मभूमि है। इनके अलावा जैन समाज के बड़े तीर्थ स्थलों में शामिल बड़ागांव भी यहां है, जहां का मंदिर देशभर में अपनी अलग पहचान बनाए हुए है। यहां इतने ऐतिहासिक व धार्मिक स्थल होने के बाद भी पर्यटक नहीं पहुंचते हैं और धर्मस्थलों पर केवल पूजा अर्चना के लिए श्रद्धालु आते हैं।
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बागपत में जहां सिनौली का नाम इतिहास से जुड़ा हुआ है और यहां चार हजार साल पुराने पुरावशेष मिल चुके हैं। वहीं यहां अन्य कई ऐसे ऐतिहासिक व धार्मिक स्थल है, जिनसे बागपत की पूरे देश में पहचान बनी हैं। यहां महाभारत कालीन लाक्षाग्रह है, जहां से पांडव अपनी जान बचाने के लिए सुरंग में निकलकर गए थे। यहां पुरा महादेव में भगवान परशुरामेश्वर महादेव मंदिर है, जिसके दूर-दूर तक मान्यता है और यहां कई प्रदेशों के कांवड़िये जलाभिषेक करते हैं।
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बाखरपुर बालैनी में वाल्मीकि मंदिर भी मौजूद है, जो भगवान राम के पुत्र लवकुश की जन्मभूमि है। इनके अलावा जैन समाज के बड़े तीर्थ स्थलों में शामिल बड़ागांव भी यहां है, जहां का मंदिर देशभर में अपनी अलग पहचान बनाए हुए है। यहां इतने ऐतिहासिक व धार्मिक स्थल होने के बाद भी पर्यटक नहीं पहुंचते हैं और धर्मस्थलों पर केवल पूजा अर्चना के लिए श्रद्धालु आते हैं।
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