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रोपे गए पौधों की होगी ऑनलाइन जियो टैगिंग
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बड़ौत। जिले में वन महोत्सव के तहत पौधे रोपने के बाद विभागों की जिम्मेदारी खत्म नहीं हुई है। अब उन्हें एप के माध्यम से किए गए पौधरोपण की जियो टैगिंग भी करनी होगी, ताकि समय पर समय पर रोपे गए पौधों की स्थिति का आंकलन किया जा सके। सोमवार को सभी विभाग पौधों की जियो टैगिंग कराने में जुटे रहे।
वन महोत्सव के तहत जिले में दस लाख पौधे एक ही दिन यानि रविवार को रोपे गए है। इसमें वन विभाग के अलावा एक दर्ज से ज्यादा सरकारी विभागों ने भागीदारी की। पौधे कहां रोपे गए हैं, इसका डाटा ऑनलाइन करने की जिम्मेदारी भी विभागों को ही दी गई है। इसके तहत सभी विभागों को रोपे गए पौधों की जियो टैगिंग करनी होगी। इसमें पीएमएस (प्लांटेशन मॉनिटरिंग सिस्टम) यूपीएफडी एप के माध्यम से पौधे के फोटो के साथ अक्षांश और देशांतर अपलोड करने होंगे। इससे पता रहेगा कि कहां और कितने पौधे रोपे गए हैं। इसका फायदा यह होगा कि भविष्य में कभी भी निरीक्षण कर इन पौधों की स्थिति को देखा जा सकेगा। रविवार को पौधरोपण के बाद सोमवार को भी विभागीय कर्मचारी पौधों की ऑनलाइन जियो टैंगिंग में लगे रहे।
ये होगा फायदा
बड़ौत। जियो टैगिंग के पीछे एक ओर जहां पौधरोपण की स्थिति जानना बड़ा कारण है तो वहीं इससे फर्जीवाड़ा भी रुकेगा। अगले वर्ष पौधरोपण में कोई भी विभाग इन पौधों को शामिल नहीं कर सकेगा। क्योंकि जियो टैगिंग करते ही ये पता चल जाएगा कि यहां तो बीते वर्ष पौधे रोपित किए जा चुके हैं। ऐसे में ये मामला पकड़ में आ जाएगा।
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शासन के निर्देशों पर शुरू की जा रही जियो टैंगिग की प्रक्रिया
बड़ौत। वन क्षेत्राधिकारी राजपाल का कहना है कि सभी विभाग अपने-अपने द्वारा रोपे गए पौधों की जियो टैगिंग कर रहे हैं। शासनादेश के अनुपालन में कार्य किया जा रहा है।
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वन महोत्सव के तहत जिले में दस लाख पौधे एक ही दिन यानि रविवार को रोपे गए है। इसमें वन विभाग के अलावा एक दर्ज से ज्यादा सरकारी विभागों ने भागीदारी की। पौधे कहां रोपे गए हैं, इसका डाटा ऑनलाइन करने की जिम्मेदारी भी विभागों को ही दी गई है। इसके तहत सभी विभागों को रोपे गए पौधों की जियो टैगिंग करनी होगी। इसमें पीएमएस (प्लांटेशन मॉनिटरिंग सिस्टम) यूपीएफडी एप के माध्यम से पौधे के फोटो के साथ अक्षांश और देशांतर अपलोड करने होंगे। इससे पता रहेगा कि कहां और कितने पौधे रोपे गए हैं। इसका फायदा यह होगा कि भविष्य में कभी भी निरीक्षण कर इन पौधों की स्थिति को देखा जा सकेगा। रविवार को पौधरोपण के बाद सोमवार को भी विभागीय कर्मचारी पौधों की ऑनलाइन जियो टैंगिंग में लगे रहे।
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ये होगा फायदा
बड़ौत। जियो टैगिंग के पीछे एक ओर जहां पौधरोपण की स्थिति जानना बड़ा कारण है तो वहीं इससे फर्जीवाड़ा भी रुकेगा। अगले वर्ष पौधरोपण में कोई भी विभाग इन पौधों को शामिल नहीं कर सकेगा। क्योंकि जियो टैगिंग करते ही ये पता चल जाएगा कि यहां तो बीते वर्ष पौधे रोपित किए जा चुके हैं। ऐसे में ये मामला पकड़ में आ जाएगा।
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शासन के निर्देशों पर शुरू की जा रही जियो टैंगिग की प्रक्रिया
बड़ौत। वन क्षेत्राधिकारी राजपाल का कहना है कि सभी विभाग अपने-अपने द्वारा रोपे गए पौधों की जियो टैगिंग कर रहे हैं। शासनादेश के अनुपालन में कार्य किया जा रहा है।