{"_id":"58276b604f1c1ba16fb3b34f","slug":"ongoing-fights-what-public-poor","type":"story","status":"publish","title_hn":"जारी है मारामारी, क्या करें पब्लिक बेचारी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जारी है मारामारी, क्या करें पब्लिक बेचारी
ब्यूरो/अमर उजाला, बागपत
Updated Sun, 13 Nov 2016 12:58 AM IST
विज्ञापन
अग्रवाल मंडी टटीरी स्थित सिंडिकेट बैंक बंद होने पर हंगामा करते लोग ।
- फोटो : amar ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बागपत। रुपये बदलने, कैश जमा करने और एटीएम से नगदी निकालने को लेकर मारामारी का दौर जारी है। तीसरे दिन भी बैंकों और एटीएम के बाहर भीड़ कम होने के बजाए बढ़ती दिखी। अधिकतर बैंकों ने नो केश का बोर्ड लगा दिया। एटीएम भी खाली हो गए। अग्रवाल मंडी टटीरी, बड़ौत और खेकड़ा में कई बैंक शाखाओं में हंगामा हुआ। देहात की बैंक शाखाओं में शाम तक लोगों की कतार लगी रही।
शनिवार को भी बैंकों के बाहर भीड़ कम होती दिखाई नहीं दी। सुबह आठ बजे से लोग बैंक और डाकघर के बाहर खड़े हो गए। अग्रवाल मंडी टटीरी की मेरठ रोड स्थित सिंडीकेट बैंक की ब्रांच पर सुबह 10 बजे ही इतनी भीड़ हो गई कि व्यवस्था बनाने के लिए मुख्य गेट बंद करना पड़ा। यहां बैंक के बाहर खूब हंगामा हुआ। इस दौरान महिलाओं को खासी परेशानी का सामना करना पड़ा।
असलियत में अमीनगर सराय, बालैनी, पिलाना, चांदीनगर के देहात क्षेत्र की ब्रांचों में नोट बदलने, कैश जमा करने और एटीएम से रुपये निकालने के लिए सुबह आठ बजे से ही लोगों के पहुुंचने का सिलसिला जारी हो गया था। शनिवार को बैंकों से लोगों को राहत नहीं मिली। दोपहर होते-होते कई जगह कैश खत्म होने की बात कही गई। एटीएम में रुपये नहीं निकले तो लोग निराश ही लौटे। क्षेत्र के अधिकांश लोगों के सामने आर्थिक संकट खड़ा होने लगा है।
विज्ञापन
एसबीआई के रीजनल मैनेजर पहुंचे : बागपत में स्टेट बैंक की शाखाओं में व्यवस्था परखने के लिए बैंक के क्षेत्रीय मैनेजर राजेश कुमार और शौकत मार्केट की मुख्य शाखा के प्रबंधक एमके खुराना ने जिलेभर की शाखाओं में दौरा किया। अमीनगर सराय में भी व्यवस्था देखी। राजेश कुमार ने कहा एसबीआई में लोगों को दिक्कत नहीं होने दी जाएगी। यह परेशानी जल्दी खत्म होने वाली है।
आखिर क्या करें महिलाएं
बैंकों के बाहर लगने वाली कतारों में सबसे अधिक मुश्किलें महिलाओं को झेलनी पड़ रही है। कई कई घंटे कतार में खड़ा होना पड़ रहा है। यही नहीं कई जगह तो सिर्फ एक ही लाइन है, जिसमें महिला और पुरुष दोनों है।
बुजुर्ग और बीमार भी पहुंचे
बैंक में रुपये जमा करने और बदलने के लिए बुजुर्ग और बीमार भी पहुंच रहे हैं। डोला के सहदेव सिंह बीमार हैं, इलाज के लिए रुपये चाहिए लेकिन बैंक में रुपये हैं। एटीएम उसके पास नहीं है। दो दिन से वह परेशान हैं, लेकिन अभी तक सिर्फ आठ हजार रुपये ही हासिल कर सके हैं। जबकि उन्हेें इलाज के लिए 50 हजार रुपये की जरूरत है। ऐसे एक नहीं, सैकड़ों मामले हैं, जहां लोगों के सामने मुश्किलें खड़ी हो गई है। दोघट। चौगामा क्षेत्र में बैंक का पट खुलने के साथ ही बड़े नोटों को बदलने के लिए लोगों की भीड़ शनिवार को भी बैंकों में उमड़ पड़ी। इस कारण बैंकों में दिन भर भीड़ लगी रही। शनिवार को सुबह से ही दोघट, टीकरी, पुसार, दाहा, निरपुड़ा, पलड़ी, बामनौली, सूजती, गांगनौली, मुलसम आदि गांवों के बैंकों में लोगों की लंबी कतार नजर आने लगी।
बैंक खुलने के साथ ही कुछ प्रतिशत लोगों को ही चार हजार रुपये के 500 और 1000 रुपये के नोट एक्सचेंज करके बैंक ने चार हजार रुपये के 100 के नोट मिल पाए। सि कारण कुछ ही लोगों की कुछ दिन के लिए दिक्कतें कम हुई है एवं बाजार में लेनदेन करने के लिए छोटे नोटों की व्यवस्था हो पाई है। बड़े नोटों के बंद हो जाने से क्षेत्र के बाजारों में इसका खासा असर दिखाई पड़ रहा है। क्षेत्र के पेट्रोल पंपों में भी 500 एवं 1000 रुपये के नोटों में पूरा 500 और 1000 रुपये का ही पेट्रोल या डीजल दिया जा रहा है। इसके अलावा सब्जी की दुकानों में लोगों के पास 100 या 50 के नोट नहीं होने पर लोगों की सब्जियां भी नहीं मिल पा रही है। खेकड़ा में तीसरे दिन शुक्रवार को भी सभी बैंक शाखाओं में धनराशि जमा करने और नोट बदलवाने के लिए लोगों की भारी भीड़ सुबह आठ बजे से ही लगनी शुरू हो गई।
बैंक शाखाओं में देर शाम तक भीड़ लगी रही। सबसे अधिक परेशानी आम जनता को बैंक शाखाओं में हो रही है। जो नोट बदलवाने के लिए जा रहे है। उन्हें धनराशि न होने की बात कह वापस भेज दिया जाता है। लोगों ने कहा प्रभावशाली लोगों के अधिकांशतया नोट बदलकर दिए जा रहे हैं। बैंक के बाहर लाइन में खड़े रवि खोखर, जसवीर सिंह, सोनू, दिनेश आदि ने कहा पुराने खाता धारकों की कई बैंक शाखाओं में आईडी की फोटो स्टेट गोपनीय ढंग से कराकर उनके माध्यम से प्रभावशाली लोगों को नई कैरेंसी के साथ ही दस पचास एवं सौ के नोट बदल रहे हैं। उन्होंने बैंक अधिकारियों से इस मामले की जांच कराने की मांग की।
विज्ञापन
शनिवार को भी बैंकों के बाहर भीड़ कम होती दिखाई नहीं दी। सुबह आठ बजे से लोग बैंक और डाकघर के बाहर खड़े हो गए। अग्रवाल मंडी टटीरी की मेरठ रोड स्थित सिंडीकेट बैंक की ब्रांच पर सुबह 10 बजे ही इतनी भीड़ हो गई कि व्यवस्था बनाने के लिए मुख्य गेट बंद करना पड़ा। यहां बैंक के बाहर खूब हंगामा हुआ। इस दौरान महिलाओं को खासी परेशानी का सामना करना पड़ा।
विज्ञापन
असलियत में अमीनगर सराय, बालैनी, पिलाना, चांदीनगर के देहात क्षेत्र की ब्रांचों में नोट बदलने, कैश जमा करने और एटीएम से रुपये निकालने के लिए सुबह आठ बजे से ही लोगों के पहुुंचने का सिलसिला जारी हो गया था। शनिवार को बैंकों से लोगों को राहत नहीं मिली। दोपहर होते-होते कई जगह कैश खत्म होने की बात कही गई। एटीएम में रुपये नहीं निकले तो लोग निराश ही लौटे। क्षेत्र के अधिकांश लोगों के सामने आर्थिक संकट खड़ा होने लगा है।
विज्ञापन
एसबीआई के रीजनल मैनेजर पहुंचे : बागपत में स्टेट बैंक की शाखाओं में व्यवस्था परखने के लिए बैंक के क्षेत्रीय मैनेजर राजेश कुमार और शौकत मार्केट की मुख्य शाखा के प्रबंधक एमके खुराना ने जिलेभर की शाखाओं में दौरा किया। अमीनगर सराय में भी व्यवस्था देखी। राजेश कुमार ने कहा एसबीआई में लोगों को दिक्कत नहीं होने दी जाएगी। यह परेशानी जल्दी खत्म होने वाली है।
आखिर क्या करें महिलाएं
बैंकों के बाहर लगने वाली कतारों में सबसे अधिक मुश्किलें महिलाओं को झेलनी पड़ रही है। कई कई घंटे कतार में खड़ा होना पड़ रहा है। यही नहीं कई जगह तो सिर्फ एक ही लाइन है, जिसमें महिला और पुरुष दोनों है।
बुजुर्ग और बीमार भी पहुंचे
बैंक में रुपये जमा करने और बदलने के लिए बुजुर्ग और बीमार भी पहुंच रहे हैं। डोला के सहदेव सिंह बीमार हैं, इलाज के लिए रुपये चाहिए लेकिन बैंक में रुपये हैं। एटीएम उसके पास नहीं है। दो दिन से वह परेशान हैं, लेकिन अभी तक सिर्फ आठ हजार रुपये ही हासिल कर सके हैं। जबकि उन्हेें इलाज के लिए 50 हजार रुपये की जरूरत है। ऐसे एक नहीं, सैकड़ों मामले हैं, जहां लोगों के सामने मुश्किलें खड़ी हो गई है। दोघट। चौगामा क्षेत्र में बैंक का पट खुलने के साथ ही बड़े नोटों को बदलने के लिए लोगों की भीड़ शनिवार को भी बैंकों में उमड़ पड़ी। इस कारण बैंकों में दिन भर भीड़ लगी रही। शनिवार को सुबह से ही दोघट, टीकरी, पुसार, दाहा, निरपुड़ा, पलड़ी, बामनौली, सूजती, गांगनौली, मुलसम आदि गांवों के बैंकों में लोगों की लंबी कतार नजर आने लगी।
बैंक खुलने के साथ ही कुछ प्रतिशत लोगों को ही चार हजार रुपये के 500 और 1000 रुपये के नोट एक्सचेंज करके बैंक ने चार हजार रुपये के 100 के नोट मिल पाए। सि कारण कुछ ही लोगों की कुछ दिन के लिए दिक्कतें कम हुई है एवं बाजार में लेनदेन करने के लिए छोटे नोटों की व्यवस्था हो पाई है। बड़े नोटों के बंद हो जाने से क्षेत्र के बाजारों में इसका खासा असर दिखाई पड़ रहा है। क्षेत्र के पेट्रोल पंपों में भी 500 एवं 1000 रुपये के नोटों में पूरा 500 और 1000 रुपये का ही पेट्रोल या डीजल दिया जा रहा है। इसके अलावा सब्जी की दुकानों में लोगों के पास 100 या 50 के नोट नहीं होने पर लोगों की सब्जियां भी नहीं मिल पा रही है। खेकड़ा में तीसरे दिन शुक्रवार को भी सभी बैंक शाखाओं में धनराशि जमा करने और नोट बदलवाने के लिए लोगों की भारी भीड़ सुबह आठ बजे से ही लगनी शुरू हो गई।
बैंक शाखाओं में देर शाम तक भीड़ लगी रही। सबसे अधिक परेशानी आम जनता को बैंक शाखाओं में हो रही है। जो नोट बदलवाने के लिए जा रहे है। उन्हें धनराशि न होने की बात कह वापस भेज दिया जाता है। लोगों ने कहा प्रभावशाली लोगों के अधिकांशतया नोट बदलकर दिए जा रहे हैं। बैंक के बाहर लाइन में खड़े रवि खोखर, जसवीर सिंह, सोनू, दिनेश आदि ने कहा पुराने खाता धारकों की कई बैंक शाखाओं में आईडी की फोटो स्टेट गोपनीय ढंग से कराकर उनके माध्यम से प्रभावशाली लोगों को नई कैरेंसी के साथ ही दस पचास एवं सौ के नोट बदल रहे हैं। उन्होंने बैंक अधिकारियों से इस मामले की जांच कराने की मांग की।