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श्री भक्ताम्बर महामंड़ल विधान मे 56 अर्ध्य चढा श्रदालुओ ने पूजा अर्चना कर धर्म लाभ उठाया।
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संवाद न्यूज एजेंसी
खेकड़ा। नगर में निर्भय एन्कलेव स्थित श्री पार्श्वनाथ धरणेंद्र पदमावती धाम जैन मंदिर में आयोजित भक्तामर महामंडल विधान में महिला व पुरुष श्रद्धालुओं ने 56 अर्घ्य चढ़ाकर भगवान पार्श्वनाथ की पूजा-अर्चना कर धर्म लाभ उठाया।
रविवार को आयोजित श्री भक्तामर महामंडल विधान के शुभारंभ पर सुबह सात बजे सर्वप्रथम नित्य नियम पूजा की। श्रद्धालुओं ने भगवान पार्श्वनाथ का अभिषेक किया। इसके बाद महिला, पुरुष श्रद्धालुओं ने विधिविधान के साथ भगवान पार्श्वनाथ की विशेष पूजा अर्चना की। आचार्य निमंत्रण की क्रियाओं से मंडप की शुद्धि कर 56 अर्घ्य चढ़ाकर भगवान पार्श्वनाथ का विधि-विधान के साथ पूजन किया। विधान की सभी क्रियाएं आर्यिका 105 सरस्वती माता जी ने मंत्रोच्चार के साथ पूर्ण कराई।
धर्म सभा में सरस्वती माताजी ने कहा कि धर्म के बिना सृष्टि पर मनुष्य का जीवन व्यर्थ है। भगवान पार्श्वनाथ की पूजा करने से मनुष्य का कल्याण होता है। मनुष्य को धर्म मार्ग को अपनाकर चलना चाहिए। साधु संतों की संगति के साथ धर्म मार्ग पर चलकर ही मानव कल्याण संभव है। मंदिर परिसर भगवान पार्श्वनाथ के जयकारों से गूंज उठा। श्रद्धालुुु ने भगवान पार्श्वनाथ की पूजा अर्चना कर धर्म लाभ उठाया। इस दौरान मुकेश जैन, आशीष जैन, रीता जैन, शुभि जैन, नरेश जैन, अंकुश जैन, जनेश्वरदयाल जैन, अरुण जैन आदि श्रद्धालु शामिल रहे।
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खेकड़ा। नगर में निर्भय एन्कलेव स्थित श्री पार्श्वनाथ धरणेंद्र पदमावती धाम जैन मंदिर में आयोजित भक्तामर महामंडल विधान में महिला व पुरुष श्रद्धालुओं ने 56 अर्घ्य चढ़ाकर भगवान पार्श्वनाथ की पूजा-अर्चना कर धर्म लाभ उठाया।
रविवार को आयोजित श्री भक्तामर महामंडल विधान के शुभारंभ पर सुबह सात बजे सर्वप्रथम नित्य नियम पूजा की। श्रद्धालुओं ने भगवान पार्श्वनाथ का अभिषेक किया। इसके बाद महिला, पुरुष श्रद्धालुओं ने विधिविधान के साथ भगवान पार्श्वनाथ की विशेष पूजा अर्चना की। आचार्य निमंत्रण की क्रियाओं से मंडप की शुद्धि कर 56 अर्घ्य चढ़ाकर भगवान पार्श्वनाथ का विधि-विधान के साथ पूजन किया। विधान की सभी क्रियाएं आर्यिका 105 सरस्वती माता जी ने मंत्रोच्चार के साथ पूर्ण कराई।
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धर्म सभा में सरस्वती माताजी ने कहा कि धर्म के बिना सृष्टि पर मनुष्य का जीवन व्यर्थ है। भगवान पार्श्वनाथ की पूजा करने से मनुष्य का कल्याण होता है। मनुष्य को धर्म मार्ग को अपनाकर चलना चाहिए। साधु संतों की संगति के साथ धर्म मार्ग पर चलकर ही मानव कल्याण संभव है। मंदिर परिसर भगवान पार्श्वनाथ के जयकारों से गूंज उठा। श्रद्धालुुु ने भगवान पार्श्वनाथ की पूजा अर्चना कर धर्म लाभ उठाया। इस दौरान मुकेश जैन, आशीष जैन, रीता जैन, शुभि जैन, नरेश जैन, अंकुश जैन, जनेश्वरदयाल जैन, अरुण जैन आदि श्रद्धालु शामिल रहे।
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