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Baghpat News: श्री सिद्ध चक्र महामंडल विधान में 512 अर्घ्य चढ़ाए
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फोटो संख्या 5
बड़ौत। श्री 1008 पारसनाथ दिगम्बर जैन मंदिर में चल रहे श्री सिद्ध चक्र महामंडल विधान के सातवें दिन रविवार को जैन श्रद्धालुओं ने 512 अर्घ्य चढ़ाए।
सबसे पहले सौधर्म इंद्र संजय जैन ने श्री 1008 शांतिनाथ भगवान को पांडुकशीला पर विराजमान किया। इसके बाद पंडित सुनील शास्त्री टीकमगढ़ वालों ने पहले मंगलाष्टक का पाठ किया। इसके बाद जल की शुद्धि कराई और चारों कोनो पर चार कलश की स्थापना कराई। सभी इंद्र-इंद्राणियों की प्राशुक जल से शुद्धि कराई और इन्द्रों ने माथे पे तिलक लगाया। फिर प्राशुक जल से सौधर्म इंद्र ने श्रीजी का अभिषेक किया। इसके बाद कुबेर इंद्र अतुल जैन, सनत इंद्र विनय जैन, ईशान इंद्र सविन जैन, यज्ञ नायक जयपाल जैन, एसके जैन और अन्य सभी इन्द्रों ने भगवान का अभिषेक किया। इसके बाद शांतिनाथ भगवान की शांति धारा की गई। बाद में दैनिक पूजा शरू की गई, जिसके अंतर्गत शांतिनाथ, नंदीश्वर दीप, पंचमेरु, देवशास्त्र गुरु पारसनाथ भगवान और अन्य पूजा की गई। इस अवसर पर पंडित सुनील शास्त्री टीकम गढ़ ने कहा कि हम सबको जिनेन्द्र भगवान की प्रतिमा के दर्शन रोज करने चाहिएं। श्रीजी के दर्शन मात्र से ही हमारे सारे संकट दूर हो जाते हैं। इसके बाद सिद्धचक्र महामंडल विधान शुरू हुआ, जिसमें 512 अर्घ मांडले पर मंत्रोच्चारण के साथ समर्पित किये गए। संध्या के समय श्रीजी की संगीतमयी आरती हुई। सतेंद्र जैन, नरेश चंद जैन, अनिल जैन, राजीव जैन, अदिश जैन का सहयोग रहा।
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बड़ौत। श्री 1008 पारसनाथ दिगम्बर जैन मंदिर में चल रहे श्री सिद्ध चक्र महामंडल विधान के सातवें दिन रविवार को जैन श्रद्धालुओं ने 512 अर्घ्य चढ़ाए।
सबसे पहले सौधर्म इंद्र संजय जैन ने श्री 1008 शांतिनाथ भगवान को पांडुकशीला पर विराजमान किया। इसके बाद पंडित सुनील शास्त्री टीकमगढ़ वालों ने पहले मंगलाष्टक का पाठ किया। इसके बाद जल की शुद्धि कराई और चारों कोनो पर चार कलश की स्थापना कराई। सभी इंद्र-इंद्राणियों की प्राशुक जल से शुद्धि कराई और इन्द्रों ने माथे पे तिलक लगाया। फिर प्राशुक जल से सौधर्म इंद्र ने श्रीजी का अभिषेक किया। इसके बाद कुबेर इंद्र अतुल जैन, सनत इंद्र विनय जैन, ईशान इंद्र सविन जैन, यज्ञ नायक जयपाल जैन, एसके जैन और अन्य सभी इन्द्रों ने भगवान का अभिषेक किया। इसके बाद शांतिनाथ भगवान की शांति धारा की गई। बाद में दैनिक पूजा शरू की गई, जिसके अंतर्गत शांतिनाथ, नंदीश्वर दीप, पंचमेरु, देवशास्त्र गुरु पारसनाथ भगवान और अन्य पूजा की गई। इस अवसर पर पंडित सुनील शास्त्री टीकम गढ़ ने कहा कि हम सबको जिनेन्द्र भगवान की प्रतिमा के दर्शन रोज करने चाहिएं। श्रीजी के दर्शन मात्र से ही हमारे सारे संकट दूर हो जाते हैं। इसके बाद सिद्धचक्र महामंडल विधान शुरू हुआ, जिसमें 512 अर्घ मांडले पर मंत्रोच्चारण के साथ समर्पित किये गए। संध्या के समय श्रीजी की संगीतमयी आरती हुई। सतेंद्र जैन, नरेश चंद जैन, अनिल जैन, राजीव जैन, अदिश जैन का सहयोग रहा।