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जल संरक्षण की नहीं किसी को फिक्र
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विश्व भूगर्भ जल दिवस
लगातार गिर रहा भूजल स्तर भावी पीढ़ी के लिए खड़ा करेगा संकट
संवाद न्यूज एजेंसी
बड़ौत। ’जल है तो जीवन है’.. ये बात सभी जानते है। मगर, जल संरक्षण को लेकर न तो किसी को फिक्र है और न ही कोई सरकारी इंतजाम। ये बात अलग है कि बीते कुछ वर्षों में पौधरोपण और तालाब सुंदरीकरण को लेकर थोड़ा प्रयास जरूर किया गया है। लेकिन प्रशासनिक लापरवाही के कारण ये नाकाफी सिद्ध हो रहा है।
सबमर्सिबल पंपों पर लगाई जाये रोक
रूबी राठी का कहना है कि जल के अंधाधुंध दोहन ने सबमर्सिबल पंप का भी अहम हिस्सा है। ग्रामीण क्षेत्र के लोग जानवरों को नहलाने और जमीन की तरावट करने में प्रमुख रूप से करते है। इससे पानी की बर्बादी होती है। एक आंकड़े के मुताबिक ग्रामीण क्षेत्र में पहले 40 फीट की बोरिंग में पानी आसानी से आ जाता था। लोग हैंडपंप लगा लेते थे लेकिन अब बोरिंग 250-300 फीट नीचे तक कराई जाती है। तब कही पानी मिल पाता है ।
जल संरक्षण के लिए आगे आना जरूरी
जितेंद्र पंवार कहते है कि पहले तालाब बरसात में ही भरे जाते थे। पूरे वर्ष भर भरे रहते है। अब हर साल तालाबों की सफाई होती है, फिर भी पानी नहीं रुकता। हमें जल संरक्षण को लेकर आगे आना चाहिए और जल बर्बादी पर रोक लगाना चाहिए।
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भावी पीढ़ियों का भविष्य अच्छा करना है तो पानी बचाना ही होगा
एडवोकेट अनिल कुमार का कहना है कि गांवों में तो जल की समस्या कम है। बड़े शहरों में दिन प्रति दिन इसकी किल्लत बढ़ती जा रही है। कहा कि भावी पीढ़ियों का भविष्य अच्छा करना है तो पानी बचाना ही होगा। लोगों को खुद यह बात समझनी होग्री ।
लोगों को समझनी होगी अपनी जिम्मेदारी
सुमित तोमर का कहना है कि शासन जल संरक्षण के लिए तमाम योजनाएं तो लागू करता है लेकिन इन्हें अमलीजामा पहनना भूल जाता है। लोगों को खुद अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी सिर्फ सरकार के भरोसे बैठने से कुछ हासिल नहीं होगा।
जलस्तर के नीचे जाने के प्रमुख कारण ....
1- नालों और रजवाहों का पक्का होना
2- तालाबों और नदियां का उथला होना
3- कुओं का अस्तित्व खत्म होना
4- सबमर्सिबल पंपों की बढ़ोतरी
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लगातार गिर रहा भूजल स्तर भावी पीढ़ी के लिए खड़ा करेगा संकट
संवाद न्यूज एजेंसी
बड़ौत। ’जल है तो जीवन है’.. ये बात सभी जानते है। मगर, जल संरक्षण को लेकर न तो किसी को फिक्र है और न ही कोई सरकारी इंतजाम। ये बात अलग है कि बीते कुछ वर्षों में पौधरोपण और तालाब सुंदरीकरण को लेकर थोड़ा प्रयास जरूर किया गया है। लेकिन प्रशासनिक लापरवाही के कारण ये नाकाफी सिद्ध हो रहा है।
सबमर्सिबल पंपों पर लगाई जाये रोक
रूबी राठी का कहना है कि जल के अंधाधुंध दोहन ने सबमर्सिबल पंप का भी अहम हिस्सा है। ग्रामीण क्षेत्र के लोग जानवरों को नहलाने और जमीन की तरावट करने में प्रमुख रूप से करते है। इससे पानी की बर्बादी होती है। एक आंकड़े के मुताबिक ग्रामीण क्षेत्र में पहले 40 फीट की बोरिंग में पानी आसानी से आ जाता था। लोग हैंडपंप लगा लेते थे लेकिन अब बोरिंग 250-300 फीट नीचे तक कराई जाती है। तब कही पानी मिल पाता है ।
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जल संरक्षण के लिए आगे आना जरूरी
जितेंद्र पंवार कहते है कि पहले तालाब बरसात में ही भरे जाते थे। पूरे वर्ष भर भरे रहते है। अब हर साल तालाबों की सफाई होती है, फिर भी पानी नहीं रुकता। हमें जल संरक्षण को लेकर आगे आना चाहिए और जल बर्बादी पर रोक लगाना चाहिए।
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भावी पीढ़ियों का भविष्य अच्छा करना है तो पानी बचाना ही होगा
एडवोकेट अनिल कुमार का कहना है कि गांवों में तो जल की समस्या कम है। बड़े शहरों में दिन प्रति दिन इसकी किल्लत बढ़ती जा रही है। कहा कि भावी पीढ़ियों का भविष्य अच्छा करना है तो पानी बचाना ही होगा। लोगों को खुद यह बात समझनी होग्री ।
लोगों को समझनी होगी अपनी जिम्मेदारी
सुमित तोमर का कहना है कि शासन जल संरक्षण के लिए तमाम योजनाएं तो लागू करता है लेकिन इन्हें अमलीजामा पहनना भूल जाता है। लोगों को खुद अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी सिर्फ सरकार के भरोसे बैठने से कुछ हासिल नहीं होगा।
जलस्तर के नीचे जाने के प्रमुख कारण ....
1- नालों और रजवाहों का पक्का होना
2- तालाबों और नदियां का उथला होना
3- कुओं का अस्तित्व खत्म होना
4- सबमर्सिबल पंपों की बढ़ोतरी