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जनपद में नहीं कोई भी न्यूरोलॉजिस्ट

Thu, 28 Oct 2021 11:33 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 28 Oct 2021 11:33 PM IST
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No neurologist in the district
विश्व स्ट्रोक दिवस
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न्यूरोलॉजिस्ट न होने पर स्ट्रोक के शिकार लोगों को दिल्ली और हरियाणा तक लगानी पड़ती है दौड़
संवाद न्यूज एजेंसी
बड़ौत। स्ट्रोक यानि लकवा, दिमाग से जुड़ी एक ऐसी गंभीर बीमारी है, जिसका कोई भी और कही भी शिकार हो सकता है। समय पर इलाज न मिल पाए तो जीवन भी विकलांगता का दंश झेलना पड़ता है। बागपत जनपद की बात करें तो यहां इस बीमारी के इलाज के लिए विशेषज्ञ चिकित्सक ही नहीं है। सरकारी से लेकर बडे़-बड़े निजी अस्पतालों में न्यूरोलॉजिस्ट जैसे महत्वपूर्ण चिकित्सकों के न होने से मरीजों की जान जाने का खतरा बना रहता है। यह हालात तब है जब जनपद के सरकारी व निजी अस्पतालों में हर रोज 2500 की संख्या में मरीज अपना उपचार करवाने के लिए आते है। इसमें से 150 से 160 मरीजों को न्यूरोलॉजिस्ट नहीं होने की वजह से दिल्ली, हरियाणा, मेरठ, गाजियाबाद जैसे बड़े शहरों के लिए रेफर कर दिया जाता है।
दो प्रकार के होते है स्ट्रोक
कोरोना महामारी के दौरान ब्रेन स्ट्रोक के मरीजों में तेजी आई है। स्ट्रोक दो प्रकार के होते हैं। पहला सिस्मिक स्ट्रोक होता है, इसमें दिमाग की नसों में रक्त प्रवाह किसी अवरोध के कारण रुक जाता है। दिमाग की नली में खून का थक्का जम जाने से भी ब्रेन हेमरेज हो जाता है। जबकि दूसरा प्रकार हेमरेजिक स्ट्रोक होता है। इसमें दिमाग की नस से रक्तस्राव होने लगता है। इसमें मरीज को लकवा मार जाता है। कई मामले में मरीज की जान जाने का खतरा भी रहता है।
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बुजुर्गों के साथ-साथ युवाओं को भी तेजी से अपनी चपेट मेें ले रही यह बीमारी
बड़ौत सीएचसी अधीक्षक डा विजय कुमार के अनुसार बीमारी अब बुजुर्गों के साथ युवाओं को भी तेजी से अपनी चपेट में ले रही है। इसलिए लोगों को सावधानी बरतने की जरूरत है। ब्रेन स्ट्रोक के मरीजों के लिए थ्रोम्बोलिसिस थेरपी बेहद कारगर है। यदि चार घंटे के अंदर स्ट्रोक के मरीज का इस तकनीक से इलाज किया जाए तो मरीज बिल्कुल ठीक हो सकता है।
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कोविड के कारण भी बढ़े स्ट्रोक व हार्टअटैक के मामले
दिल्ली-सहारनपुर हाईवे स्थित आस्था नर्सिंग होम के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. अनिल जैन ने बताया कि कोरोना काल में अस्पताल को कोविड सेंटर बनाया गया। उन्होंने बताया कि कोविड एक थ्रोम्बोजेनिक बीमारी है। इसमें खूनगाढ़ा हो जाता है । इसलिए कोविड के इलाज के लिए भी खून पतला करने की दवाइयां दी जाती हैं। खून गाढ़ा होने पर खून के चलने की गति धीमी हो जाती है और खून की नाड़ियों में खून के जमने या क्लॉट बनने की संभावना अधिक बढ़ जाती है। इसलिए कोविड के कारण हार्टअटैक और स्ट्रोक के मामले ज्यादा बढे़ हैं।

इसे लेकर कई बार उच्च अधिकारियों को अवगत करवाया गया है। मगर, उनकी ओर से कोई भी स्पेशलिस्ट डॉक्टर को नियुक्त नहीं किया गया है। इसकी वजह से मरीज को दिल्ली के लिए रेफर करना पड़ता है। - डॉ. दिनेश कुमार, मुख्य चिकित्सा अधिकारी।
यह हैं लक्षण
- मरीज को अचानक उल्टी आती हैं।
- दौरे पड़ते हैं और कई बार बेहोशी आ जाती है।
- शरीर के कुछ अंग काम करना बंद कर देते हैं।
- आवाज साफ नहीं रहती है और खाना नहीं खाया जाता है।
स्ट्रोक से बचने के उपाय
- शुगर की नियमित जांच कराना
- ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखना
- सामान्य मात्रा में मीठे का सेवन करना
- घी, बटर सहित तैलीय चीजों का सेवन कम करना
- भोजन में फल ओर सब्जियों का सेवन ज्यादा करना
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