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ब्लड सेपरेशन यूनिट शुरू नहीं होने से जिले में नही प्लेटलेट्स की व्यवस्था
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संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत। मशीन के अभाव में जिला अस्पताल में ब्लड सेपरेशन यूनिट शुरू नही हुई है। डेंगू के मरीजों को प्लेटलेट्स के लिए सोनीपत, मेरठ और दिल्ली की दौड़ लगानी पड़ रही है। जिले में अब तक 22 मरीजों में डेंगू की पुष्टि हो चुकी है।
जिला अस्पताल में एक यूनिट से चार यूनिट ब्लड तैयार कराने के लिए ब्लड सेपरेशन यूनिट का निर्माण कराया गया था। शासन स्तर से एक मशीन उपलब्ध करा दी है, जबकि अभी दो अन्य मशीनें और आनी हैं। मशीन न आने के कारण यूनिट शुरू नहीं हो पाई है। ब्लड सेपरेशन यूनिट शुरू होने पर एक यूनिट खून से लाल रक्त कणिकाएं (आरबीसी), श्वेत रक्त कणिकाएं (डब्ल्यूबीसी), प्लेटलेट्स, प्लाज्मा, फ्रेश फ्रोजन प्लाज्मा (एफएफपी) को अलग किया जाता है। इसमें थैलीसिया के मरीजों को आरबीसी, डेंगू के मरीजों को प्लेटलेट्स, जले हुए मरीजों को प्लाज्मा और एड्स के मरीजों को डब्ल्यूबीसी की जरूरत पड़ती है। यूनिट शुरू होने पर मरीजों को उनकी जरूरत के हिसाब से रक्त चढ़ाया जाता है। एक यूनिट खून से प्लाज्मा, रेड सेल और प्लेटलेट्स अलग कर तीन लोगों को चढ़ाया जा सकता है।
अधिकांश मरीज मेरठ और दिल्ली में कराते है इलाज
जिले में स्वास्थ्य व्यवस्थाएं सही न होने के कारण अधिकांश लोग मेरठ, दिल्ली और सोनीपत में अपना इलाज कराते है। जिले में अब तक 21 डेंगू के मरीज मिल चुके है। सबसे अधिक मरीज बिनौली ब्लॉक में मिले है।
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वर्जन-
डेंगू के मरीजों की जांच के लिए जिला अस्पताल में वार्ड आरक्षित किया गया है। अस्पताल में आने वाले मरीजों की जांच कराई जा रही है। मशीन आने पर यूनिट शुरू कराई जाएगी। -डॉ दिनेश कुमार, सीएमओ
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बागपत। मशीन के अभाव में जिला अस्पताल में ब्लड सेपरेशन यूनिट शुरू नही हुई है। डेंगू के मरीजों को प्लेटलेट्स के लिए सोनीपत, मेरठ और दिल्ली की दौड़ लगानी पड़ रही है। जिले में अब तक 22 मरीजों में डेंगू की पुष्टि हो चुकी है।
जिला अस्पताल में एक यूनिट से चार यूनिट ब्लड तैयार कराने के लिए ब्लड सेपरेशन यूनिट का निर्माण कराया गया था। शासन स्तर से एक मशीन उपलब्ध करा दी है, जबकि अभी दो अन्य मशीनें और आनी हैं। मशीन न आने के कारण यूनिट शुरू नहीं हो पाई है। ब्लड सेपरेशन यूनिट शुरू होने पर एक यूनिट खून से लाल रक्त कणिकाएं (आरबीसी), श्वेत रक्त कणिकाएं (डब्ल्यूबीसी), प्लेटलेट्स, प्लाज्मा, फ्रेश फ्रोजन प्लाज्मा (एफएफपी) को अलग किया जाता है। इसमें थैलीसिया के मरीजों को आरबीसी, डेंगू के मरीजों को प्लेटलेट्स, जले हुए मरीजों को प्लाज्मा और एड्स के मरीजों को डब्ल्यूबीसी की जरूरत पड़ती है। यूनिट शुरू होने पर मरीजों को उनकी जरूरत के हिसाब से रक्त चढ़ाया जाता है। एक यूनिट खून से प्लाज्मा, रेड सेल और प्लेटलेट्स अलग कर तीन लोगों को चढ़ाया जा सकता है।
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अधिकांश मरीज मेरठ और दिल्ली में कराते है इलाज
जिले में स्वास्थ्य व्यवस्थाएं सही न होने के कारण अधिकांश लोग मेरठ, दिल्ली और सोनीपत में अपना इलाज कराते है। जिले में अब तक 21 डेंगू के मरीज मिल चुके है। सबसे अधिक मरीज बिनौली ब्लॉक में मिले है।
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डेंगू के मरीजों की जांच के लिए जिला अस्पताल में वार्ड आरक्षित किया गया है। अस्पताल में आने वाले मरीजों की जांच कराई जा रही है। मशीन आने पर यूनिट शुरू कराई जाएगी। -डॉ दिनेश कुमार, सीएमओ