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एनजीटी ने कहा कि शपथपत्र दाखिल करें अफसर
ब्यूरो/अमर उजाला, बागपत
Updated Sat, 22 Oct 2016 12:13 AM IST
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प्रतीकात्मक
- फोटो : amarujala
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बागपत। वेस्ट यूपी के छह जिलों में हिंडन और कृष्णा नदी के प्रदूषित जल से फैल रही बीमारियों पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने जनहित के लिए कार्यों का अधिकारियों से शपथपत्र मांगा है। दोआबा पर्यावरण समिति की याचिका पर सुनवाई करते हुए 28 अक्तूबर को शपथपत्र देने के लिए कहा। बागपत के डीएम और सीएमओ हाजिर हुए। प्रदेश सरकार की तरफ से कोई हलफनामा दाखिल नहीं किया गया है।
दोआबा पर्यावरण समिति के अध्यक्ष डॉ चंद्रवीर सिंह की याचिका पर एनजीटी के जस्टिस स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने शुक्रवार को मामले की सुनवाई की। बागपत के डीएम, सीएमओ, जल निगम के मुख्य अभियंता एनजीटी के सामने पहुंचे। जस्टिस स्वतंत्र कुमार के सामने सभी छह जिले के अधिकारियों ने कुछ और वक्त दिए जाने की बात कही। उधर, एनजीटी ने प्रशासन के द्वारा लोगों के हित में किए गए कार्यों का शपथ पत्र देने की बात कही है।
इसके लिए 28 अक्तूबर की तिथि तय की गई। डॉ चंद्रवीर सिंह ने बताया कि एनजीटी ने बागपत, शामली, मुजफ्फरनगर, गाजियाबाद, सहारनपुर और मेरठ की रिपोर्ट वैज्ञानिक तरीके से तैयार कर प्रस्तुत करने के निर्देश पहले ही दिए थे, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। खंडपीठ ने यह भी कहा कि अगर लापरवाही बरती गई तो एनजीटी इसके लिए कमीशन का गठन कर खुद मामले की जांच कराएगा।
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उखाड़े जा चुके हैं हैंडपंप
जल निगम ने जिले के आधा दर्जन से अधिक गांवों में 106 हैंडपंपों को सील करते हुए उनकी हत्थियां उतरवा दी थी। इसके बाद एनजीटी का आदेश मिलते ही कई गांवों में हैंडपंप उखड़वा दिए। एनजीटी ने पूछा है कि क्या इन गांवों में स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति के लिए कोई इंतजाम किए गए हैं।
29 गांव की समस्या
जल निगम के अधिशासी अभियंता संजय गौतम का कहना है कि एनजीटी ने जिन गांवों को सूची में रखा है, उनकी संख्या 55 है। इसमें दो नगर पंचायत हैं और दो गैरआबाद गांव। 22 गांवों में निगम से पेयजल योजना संचालित है, इस तरह केवल 29 गांव ऐसे बचते हैं, जिनमें समस्या सामने आ रही है।
हिंडन नदी से प्रभावित गांवों में लगेंगे सबमर्सिबल
दोघट। हिंडन नदी से प्रभावित गांवों में ग्राम पंचायत के माध्यम से एक-एक सबमर्सिबल पंप सेट लगाए जाएंगे। ये पंप सेट ऐसी जगह लगेंगे, जहां पर गरीब तबके के लोग रहते हैं। इसके माध्यम से ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जाएगा। क्षेत्र के सरोरा, तवेलागढ़ी, धनौरा, पट्टी बंजारन, झूंडपुर, मिलाना, फौलादनगर, बोपुरा, खपराना, रहतना, शाहपुर बाणगंगा, बरनावा, गल्हैता, चिरचिटा आदि गांव को हिंडन नदी के दूषित पानी ने अपनी चपेट में ले रखा है। जिसके कारण भूजल दूषित हो गया है। हैंडपंप दूषित पानी दे रहे हैं।
इस पानी को पीकर लोग गंभीर बीमारियों का शिकार हो रहे है। इसको लेकर एनजीटी ने सख्त रुख अपनाया हुआ है और शासन को निर्देश दिए हुए है कि नदी से प्रभावित गांवों में शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जाए। इसी को मद्देनजर रखते हुए ग्राम पंचायत के माध्यम से हर गांव में एक-एक सबमर्सिबल पंप सेट लगाए जाएंगे। जिला पंचायत राज अधिकारी उपेंद्र राज सिंह ने बताया कि सबमर्सिबल पंप सेट गांव में ऐसे स्थान पर लगाए जाएंगे, जहां पर गरीब तबके के लोग रहते हैं। जिससे ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जा सके। उन्होंने यह भी बताया कि गांवों में एक-एक किलो वाट के पंप सेट लगाए जाएंगे। ये बिजली से चलेंगे। सभी ग्राम प्रधान को निर्देश दिए गए है। इन पंप सेट का बोर 300 फीट गहरा कराया जाएगा।
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दोआबा पर्यावरण समिति के अध्यक्ष डॉ चंद्रवीर सिंह की याचिका पर एनजीटी के जस्टिस स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने शुक्रवार को मामले की सुनवाई की। बागपत के डीएम, सीएमओ, जल निगम के मुख्य अभियंता एनजीटी के सामने पहुंचे। जस्टिस स्वतंत्र कुमार के सामने सभी छह जिले के अधिकारियों ने कुछ और वक्त दिए जाने की बात कही। उधर, एनजीटी ने प्रशासन के द्वारा लोगों के हित में किए गए कार्यों का शपथ पत्र देने की बात कही है।
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इसके लिए 28 अक्तूबर की तिथि तय की गई। डॉ चंद्रवीर सिंह ने बताया कि एनजीटी ने बागपत, शामली, मुजफ्फरनगर, गाजियाबाद, सहारनपुर और मेरठ की रिपोर्ट वैज्ञानिक तरीके से तैयार कर प्रस्तुत करने के निर्देश पहले ही दिए थे, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। खंडपीठ ने यह भी कहा कि अगर लापरवाही बरती गई तो एनजीटी इसके लिए कमीशन का गठन कर खुद मामले की जांच कराएगा।
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उखाड़े जा चुके हैं हैंडपंप
जल निगम ने जिले के आधा दर्जन से अधिक गांवों में 106 हैंडपंपों को सील करते हुए उनकी हत्थियां उतरवा दी थी। इसके बाद एनजीटी का आदेश मिलते ही कई गांवों में हैंडपंप उखड़वा दिए। एनजीटी ने पूछा है कि क्या इन गांवों में स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति के लिए कोई इंतजाम किए गए हैं।
29 गांव की समस्या
जल निगम के अधिशासी अभियंता संजय गौतम का कहना है कि एनजीटी ने जिन गांवों को सूची में रखा है, उनकी संख्या 55 है। इसमें दो नगर पंचायत हैं और दो गैरआबाद गांव। 22 गांवों में निगम से पेयजल योजना संचालित है, इस तरह केवल 29 गांव ऐसे बचते हैं, जिनमें समस्या सामने आ रही है।
हिंडन नदी से प्रभावित गांवों में लगेंगे सबमर्सिबल
दोघट। हिंडन नदी से प्रभावित गांवों में ग्राम पंचायत के माध्यम से एक-एक सबमर्सिबल पंप सेट लगाए जाएंगे। ये पंप सेट ऐसी जगह लगेंगे, जहां पर गरीब तबके के लोग रहते हैं। इसके माध्यम से ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जाएगा। क्षेत्र के सरोरा, तवेलागढ़ी, धनौरा, पट्टी बंजारन, झूंडपुर, मिलाना, फौलादनगर, बोपुरा, खपराना, रहतना, शाहपुर बाणगंगा, बरनावा, गल्हैता, चिरचिटा आदि गांव को हिंडन नदी के दूषित पानी ने अपनी चपेट में ले रखा है। जिसके कारण भूजल दूषित हो गया है। हैंडपंप दूषित पानी दे रहे हैं।
इस पानी को पीकर लोग गंभीर बीमारियों का शिकार हो रहे है। इसको लेकर एनजीटी ने सख्त रुख अपनाया हुआ है और शासन को निर्देश दिए हुए है कि नदी से प्रभावित गांवों में शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जाए। इसी को मद्देनजर रखते हुए ग्राम पंचायत के माध्यम से हर गांव में एक-एक सबमर्सिबल पंप सेट लगाए जाएंगे। जिला पंचायत राज अधिकारी उपेंद्र राज सिंह ने बताया कि सबमर्सिबल पंप सेट गांव में ऐसे स्थान पर लगाए जाएंगे, जहां पर गरीब तबके के लोग रहते हैं। जिससे ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जा सके। उन्होंने यह भी बताया कि गांवों में एक-एक किलो वाट के पंप सेट लगाए जाएंगे। ये बिजली से चलेंगे। सभी ग्राम प्रधान को निर्देश दिए गए है। इन पंप सेट का बोर 300 फीट गहरा कराया जाएगा।