एनजीटी के आदेशों की उड़ रही धज्जियां
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कभी कलकल बहने वाली कृष्णा और हिंडन अब उन गांव के लिए काल बन गई है, जो इनके तटों पर बसे हुए हैं। दोनों नदियों के प्रदूषित जल से सैकड़ों गांव प्रभावित हो रहे थे। इस कारण गांवों मेें विकलांगता, कैंसर, अपंगता आदि मामले सामने आ रहे थे। एनजीटी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रशासनिक अफसरों को फटकार लगाई तो उनमें हड़कंप मच गया। एनजीटी के आदेशों पर डीएम हृदय शंकर तिवारी की देखरेख मेें बड़ौत ब्लाक के अशरफाबाद थल, किशनपुर, बराल, बिजरौल, बिनौली ब्लाक के ईदरीशपुर, आदमपुर, मांगरौली, बेगमाबाद गढ़ी आदि सहित कई गांवों में पेयजल की टंकी भेजी गई। गांव मेें पेयजल ग्रामीणों को बांटा गया, लेकिन मात्र कुछ दिनों के लिए। आलम यह है कि अब पिछले एक सप्ताह से बड़ौत व बिनौली ब्लाक में किशनपुर, बराल, अशरफाबाद थल, ईदरीशपुर,आदमपुर, मांगरौली, बेगमाबाद गढ़ी आदि सहित दर्जनों गांवों में पीने के लिए पेयजल नहीं पहुंच रहा है। मजबूर लोगों को उन हैंडपंपों का ही प्रदूषित पानी पीना पड़ रहा है, जिन्हें उखाड़ने के आदेश एनजीटी ने दे रखे हैं।
अमर उजाला की टीम ने शनिवार को जब किशनपुर गांव का हाल जाना तो वहां पर एक हैंडपंप पर दर्जनों महिलाओं व पुरुषों की पानी लेने के लिए लाइन लगी हुई थी। वहां, पर मौजूद राजू पुत्र श्याम सिंह (61 वर्ष), लोकेंद्र पुत्र शीतल, संतोष पत्नी रोहताश व बिमला पत्नी धर्मवीर का कहना था कि गांव में शुद्ध पेयजल की जानकारी अखबार के माध्यम से पता चली थी। लेकिन आज तक एक बार भी गांव में शुद्ध पेयजल नहीं पहुंचा। बताया कि मोहल्ले में मात्र एक हैंडपंप है, जिस पर 110 परिवार के लोग पानी भरते हैं, लेकिन एनजीटी ने इससे भी उखाड़ने के आदेश दे रखे हैं। मोहल्ले के बालकिशन, राजवीर, रोशन, बिटटू, प्रेम, आनंद, संजीव, शिवकुमार, जयकुमार, फतेह सिंह ने बताया कि शुद्ध पेयजल अभी तक आया नहीं, अब इसी हैंडपंप से निकलने वाले दूषित पानी को ही पीना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि पानी के सेवन से रोजाना कम से कम एक दर्जन से अधिक लोग बीमार पड़ रहे हैं। अभी भी गांव का कल्लू, संजीव, प्रवीण, पूनम, जगवती, राजवीरी, कल्लो, ओमवती बीमार पड़े हुए हैं।
इस संबंध में ग्राम प्रधान ईश्वर सिंह का कहना है कि गांव मेें पानी नहीं पहुंच रहा है। शिकायत भी कर रहे हैं, लेकिन सुनवाई नहीं हो रही। डीपीआरओ उपेंद्र ने आरोपों को निराधार बताते हुए कह कि सभी गांव में पानी पहुंच रहा है। चार-पांच गांवों ही ऐसे है, जहां पर पानी पहुंचाने में दिक्कतें हो रही है। ग्राम सचिव सुनीता ने यह कहते हुए पल्ला झाड़ लिया कि सभी गांवों में पानी पहुंच रहा है।
डीपीआरओ उपेंद्र ने आरोपों को निराधार बताते हुए कह कि सभी गांव में पानी पहुंच रहा है। चार-पांच गांवों ही ऐसे है, जहां पर पानी पहुंचाने में दिक्कतें हो रही है। ग्राम सचिव सुनीता ने यह कहते हुए पल्ला झाड़ लिया कि सभी गांवों में पानी पहुंच रहा है।