आचार संहिता लगी तो होर्डिंग लेने नहीं आए नेताजी
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आचार संहिता लागू होने से पहले नगर और ग्रामीण क्षेत्र में शायद ही कोई ऐसी सड़क या गली रही होगी, जहां राजनीतिक दलों और नेेताओं की होर्डिंग, पोस्टर और पोल बोर्ड दिखाई न पड़ रहा हो। नगर मेें प्रतिदिन औसतन एक हजार पोल बोर्ड और तीस होर्डिंग बनते है, लेकिन आचार संहिता लागू होते ही जहां फ्रेमिंग का काम होता है, वहां पर सन्नाटा छाया रहा। जो थोड़ा बहुत काम मिल रहा है वह भी स्कूल एवं कोचिंग सेंटर का है। काम न होने के कारण कई फर्मों ने छपाई का काम बंद कर दिया है।
पूरे बागपत जनपद मेें करीबन पांच फ्लैक्स मशीनें हैं, इनमें अधिकतर राजनीतिक दलों और नेताओं का काम होता है। इस काम से जुड़े राशिद के मुताबिक अस्सी फीसदी काम बंद हो गया है। अगर कोचिंग और स्कूल से काम न मिले तो फ्लैक्स मशीनों का वजूद खत्म हो जाएगा। उनके अनुसार पहले नोटबंदी के कारण कारोबार प्रभावित हुआ और अब चुनाव आचार संहिता लगने के कारण काम पूरी तरह से ठप हो या है। कई आर्डर निरस्त हो गए हैं। जो माल तैयार है उसे भी कोई लेने नहीं आ रहा है। हालात इतने खराब हो चुके है कि कई बड़े नेताओं पर लाखों रुपये फंसे हैं, जिस कारण काम मेें लगाएं मजदूरों को भी पैसा नहीं दिया जा रहा है।
फारूख ने बताया नौ नवंबर से पहले बहुत काम था, लेकिन नोटबंदी के बाद काम मिलना कम हो गया था। इधर कुछ दिनों से थोड़ा बहुत नेताओं का काम मिल रहा था। अब वह भी बंद हो गया है। इस कारण आर्थिक तंगी से जूझना पड़ रहा है। इस दौरान परिवार का भी खर्च चला पाना मुश्किल हो रहा है। यदि ऐसा ही रहा तो कुछ ही दिनों मेें दूसरा काम तलाश करना पड़ेगा। फ्लैक्स मशीन में काम करने वाले मजदूर इकराम ने कहा मशीन के संचालक मेें पिछले कई दिन से यह कहकर छुट्टी दे रखी है कि जैसे ही काम आएगा, दोबारा बुला लिया जाएगा, लेकिन अभी तक किसी ने नहीं बुलाया। काम नहीं होने के कारण परेशानी झेलनी पड़ रही है।