Exclusive: अफसरों की लापरवाही या कोई साजिश? 14 साल दबाए रखा हाईकोर्ट का आदेश, पाकिस्तान से जुड़ा है मामला
वर्ष 1970 में अब्दुल रहमान पाकिस्तान चला गया था। उसकी 90 बीघा जमीन भारत में ही रह गई। हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद अफसरों ने इस भूमि को शत्रु संपत्ति में दर्ज नहीं किया।
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इसे अफसरों की लापरवाही कहा जाए या कोई साजिश। कोताना में जिस करोड़ों रुपये की जमीन को शत्रु संपत्ति में दर्ज करने के हाईकोर्ट ने 14 साल पहले आदेश दिए, उस आदेश को अफसर दबाए बैठे रहे। पाक के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ के परिवार की जमीन नीलामी से शत्रु संपत्तियों की जांच हुई तो इसका खुलासा हुआ। अब इस जमीन को शत्रु संपत्ति में दर्ज किया गया है।
कोताना गांव से वर्ष 1970 में अब्दुल रहमान पाकिस्तान चला गया था। जिसकी गांव में करीब 90 बीघा जमीन थी। उस जमीन को गांव के एक व्यक्ति ने अपने नाम करा लिया और उसके निधन के बाद वह जमीन उसके चार बेटों ने विरासत के तहत अपने नाम दर्ज करा ली।
जब पाकिस्तान जाने वालों की जमीनों को शत्रु संपत्ति में दर्ज करने की कार्रवाई शुरू हुई तो इस जमीन पर खतौनी में अन्य के नाम होने के कारण हाईकोर्ट में चला गया। जहां सभी कागज पेश करने के बाद वर्ष 2010 में जमीन को शत्रु संपत्ति में दर्ज करने के आदेश दिए गए।
इसके बाद भी जमीन को शत्रु संपत्ति में दर्ज नहीं किया गया और 14 साल तक यह सब कुछ फाइलों में दबा पड़ा रहा। जबकि इस बीच जमीन पर कई बार लाखों रुपये का लोन भी लिया गया तो इसमें से करीब 22 बीघा जमीन पांच महीने पहले बेची भी गई।
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मुशर्रफ के परिवार की जमीन की नीलामी से खुलासा हुआ
कोताना में पाक के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ के परिवार की शत्रु संपत्ति में दर्ज हो चुकी जमीन की पिछले दिनों नीलामी हुई। इससे वहां की शत्रु संपत्तियां ज्यादा चर्चाओं में रही और वहां की सभी शत्रु संपत्तियों की फाइलों को खंगाला गया।
तब इसका खुलासा हुआ कि 14 साल पहले 90 बीघा जमीन शत्रु संपत्ति में दर्ज करने के आदेश हुए थे जो अभी तक दर्ज नहीं की गई। जिससे प्रशासन ने 21 सितंबर 2024 को यह जमीन शत्रु संपत्ति घोषित कर खतौनी में दर्ज कराई। इसके साथ ही शत्रु संपत्ति अभिरक्षा विभाग को पूरी रिपोर्ट भेजी गई।
कोताना में करीब 90 बीघा जमीन को शत्रु संपत्ति में दर्ज किया गया है। इसका आदेश करीब वर्ष 2010 में हुआ था। उस समय यह शत्रु संपत्ति क्यों दर्ज नहीं हो सकी, इस बारे में कुछ नहीं बताया जा सकता है। - अमर चंद, एसडीएम बड़ौत