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जीवन में गुरु बनाना बहुत जरूरी : महाराज
ब्यूरो/ अमर उजाला, बागपत
Updated Wed, 20 Jul 2016 01:44 AM IST
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बड़ौत। जैन बड़ा मंदिर के त्यागी भवन में विहर्ष सागर महाराज संसघ के सानिध्य में गुरू पूर्णिमा महोत्सव धूमधाम के साथ मनाया गया। इस मौके पर विहर्ष सागर महाराज ने कहा गुरू और शिष्य के बीच भक्त और भगवान का नाता होता है, इसलिए अपने जीवन में गुरू जरूर बनाना चाहिए।
इस महोत्सव में आचार्य विराग सागर महाराज के चित्र पर दीप जलाया। इसके बाद ब्रह्चारिणी प्रियंका, रीना और नीतू ने गुरू वंदना कर धर्मसभा का शुभारंभ किया। इस मौके पर विहर्ष सागर महाराज ने कहा सौभाग्यशाली वे होते हैं, जिनके ऊपर गुरू का हाथ होता है। जिस प्राणी के जीवन में गुरू नहीं होते वह पशु समान होते है। गुरू तो भगवान से भी बड़ा होता है, क्योंकि भगवान तक जाने का मार्ग सिर्फ गुरू ही दिखा सकते हैं।
उन्होंने कहा जब भी आप किसी विपत्ति में होंगे, कोई भी आपके साथ न हो पर गुरू हमेशा आपके साथ रहेगें। जब तक गुरु का आशीर्वाद आपके साथ है हर संकट, हर विपत्ति स्वयं ही दूर होगी। उन्होंने कहा एकलव्य द्रोणाचार्य को गुरू मानकर ही सर्वश्रेष्ठ धर्नुधारी बने, इसलिए हमेशा गुरू का सम्मान करना, उनके बताए रास्ते पर चलना। चाहे जैसे भी समय हो गुरू का हाथ नहीं छोड़ना चाहिए। जो गुरू का अपमान करते हैं, उनका जीवन हमेशा दु:ख से भरा होता है।
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धर्मसभा से पहले मुनि श्री का पाद्प्राक्षालय, शास्त्र भेंट किया और गुरू पूजा की। अंत में आरती उतारी। संचालन डॉ. आर के जैन ने किया। इसमें अजय जैन, पंकज जैन, मनोज जैन, संजय, राकेश, सुनील जैन, टेकचंद आदि रहे।
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इस महोत्सव में आचार्य विराग सागर महाराज के चित्र पर दीप जलाया। इसके बाद ब्रह्चारिणी प्रियंका, रीना और नीतू ने गुरू वंदना कर धर्मसभा का शुभारंभ किया। इस मौके पर विहर्ष सागर महाराज ने कहा सौभाग्यशाली वे होते हैं, जिनके ऊपर गुरू का हाथ होता है। जिस प्राणी के जीवन में गुरू नहीं होते वह पशु समान होते है। गुरू तो भगवान से भी बड़ा होता है, क्योंकि भगवान तक जाने का मार्ग सिर्फ गुरू ही दिखा सकते हैं।
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उन्होंने कहा जब भी आप किसी विपत्ति में होंगे, कोई भी आपके साथ न हो पर गुरू हमेशा आपके साथ रहेगें। जब तक गुरु का आशीर्वाद आपके साथ है हर संकट, हर विपत्ति स्वयं ही दूर होगी। उन्होंने कहा एकलव्य द्रोणाचार्य को गुरू मानकर ही सर्वश्रेष्ठ धर्नुधारी बने, इसलिए हमेशा गुरू का सम्मान करना, उनके बताए रास्ते पर चलना। चाहे जैसे भी समय हो गुरू का हाथ नहीं छोड़ना चाहिए। जो गुरू का अपमान करते हैं, उनका जीवन हमेशा दु:ख से भरा होता है।
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धर्मसभा से पहले मुनि श्री का पाद्प्राक्षालय, शास्त्र भेंट किया और गुरू पूजा की। अंत में आरती उतारी। संचालन डॉ. आर के जैन ने किया। इसमें अजय जैन, पंकज जैन, मनोज जैन, संजय, राकेश, सुनील जैन, टेकचंद आदि रहे।