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नवरात्र सम्पन्न, सांझी का यमुना में विसर्जन
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बागपत यमुना में मूर्ति विर्सजन करने जाते हुए
- फोटो : BAGHPAT
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यमुना में मूर्ति विसर्जित करने के लिए उमड़ी श्रद्धालुओं की भारी भीड़
संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत। नगर में शुक्रवार को दशहरे का पर्व धूमधाम से मनाया गया। घरों में विशेष पूजा-अर्चना के बाद श्रद्धालुओं ने सांझी मां की प्रतिमा को यमुना में विसर्जित किया। दशहरा पर्व पर पूजन विधि विधान से किया गया और बहनों ने भाईयों को तिलक कर लंबी आयु की प्रार्थना की। यमुना में मूर्ति विसर्जित करने के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ लग रही।
श्रद्धालु शोभायात्रा निकालकर नृत्य करते हुए घाट पर पहुंचे और मां दुर्गा की प्रतिमा को विसर्जित कर सुख शांति की कामना की। पंडित राजकुमार शास्त्री ने बताया कि सनातन धर्म में जल को ब्रह्मा माना जाता है। जब मूर्तियों को जल में विसर्जित किया जाता है तो वह ब्रह्मतत्व में विलीन हो जाती हैं।
सूखी नहरों में ही विसर्जित की सांझी
खेकड़ा। श्रद्धालुओं को सूखी पड़ी नहरों में ही सांझी मां का विसर्जन करना पड़ा। अखिल भारतीय धर्म संघ के डा. सुरेश चंद कौशिक और उमेश शर्मा का कहना है कि नहरों में पानी न छोडे़ जाना प्रशासन की लापरवाही है। कई वर्षों से रजबहे की सफाई भी नही कराई गई है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत। नगर में शुक्रवार को दशहरे का पर्व धूमधाम से मनाया गया। घरों में विशेष पूजा-अर्चना के बाद श्रद्धालुओं ने सांझी मां की प्रतिमा को यमुना में विसर्जित किया। दशहरा पर्व पर पूजन विधि विधान से किया गया और बहनों ने भाईयों को तिलक कर लंबी आयु की प्रार्थना की। यमुना में मूर्ति विसर्जित करने के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ लग रही।
श्रद्धालु शोभायात्रा निकालकर नृत्य करते हुए घाट पर पहुंचे और मां दुर्गा की प्रतिमा को विसर्जित कर सुख शांति की कामना की। पंडित राजकुमार शास्त्री ने बताया कि सनातन धर्म में जल को ब्रह्मा माना जाता है। जब मूर्तियों को जल में विसर्जित किया जाता है तो वह ब्रह्मतत्व में विलीन हो जाती हैं।
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सूखी नहरों में ही विसर्जित की सांझी
खेकड़ा। श्रद्धालुओं को सूखी पड़ी नहरों में ही सांझी मां का विसर्जन करना पड़ा। अखिल भारतीय धर्म संघ के डा. सुरेश चंद कौशिक और उमेश शर्मा का कहना है कि नहरों में पानी न छोडे़ जाना प्रशासन की लापरवाही है। कई वर्षों से रजबहे की सफाई भी नही कराई गई है।
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