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मां शारदे, इतना कर दे, सिर्फ कोरोना ओमिक्रॉन को हरदे
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काव्य संगोष्ठी में कविताएं सुनाकर किया नए वर्ष का स्वागत
संवाद न्यूज एजेंसी
खेकड़ा। नगर में नववर्ष की पूर्व संध्या पर लोक साहित्य संस्कृति समिति के तत्वावधान में आयोजित काव्य संगोष्ठी में कवियों ने कविताएं सुनाकर नए साल का स्वागत किया।
मोहल्ला रामपुर में शुक्रवार शाम आयोजित काव्य संगोष्ठी का शुभारंभ मां सरस्वती की वंदना से हुआ। युवा कवयित्री अंजलि ने सुनाया, मां शारदे, इतना कर दे, सिर्फ कोरोना ओमिक्रॉन को हरदे। कवि शौकत अली ने सुनाया, चलो आज मिलकर हम कसम यह खाएं। भारत को हम मिलकर खुशहाल बनाएं। कवि गजेंद्र गजानन ने सुनाया, नववर्ष की बेला पर सुख शांति का पाठ करूंगा। शहीद हुए किसान और जवानों को नमन, दरिंदों का दमन करूंगा।
कवयित्री वैशाली कौशिक ने सुनाया, लो बीत चला ये भी साल, फिर से नया आया एक। इस नए साल में होगी नई बात अनेक। कवि अजयवीर यादव ने सुनाया, जब भी घर से निकलो ओमिक्रॉन देखकर निकलो। कहीं कोहराम न छा जाए कोरोना देखकर निकलो। कवि प्रेमशंकर ने सुनाया, खुशियां हर एक पल की छाए बहार बनके, हर पल खुशी के साए दामन पर छाए भर के। कवि सुमित कुमार ने सुनाया, हे नववर्ष तुम्हारा स्वागत है, सत्कार है। यह मातृभूमि नववर्ष में तुम्हें नमस्कार है। कवि एके सिंह ने सुनाया, नववर्ष 2022 अब ऐसा कर दे। शिक्षा में संस्कार सबको भावमयी करदे। काव्य संगोष्ठी की अध्यक्षता पूर्व प्रधानाचार्य दयानंद शर्मा ने की तथा संचालन गजेंद्र कौशिक गजानन ने किया। इस मौके पर संदीप कुमार, अशोक धामा, सुरेंद्र वर्मा, राहुल, देवेंद्र, महेश कुमार आदि श्रोता शामिल रहे। संवाद
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संवाद न्यूज एजेंसी
खेकड़ा। नगर में नववर्ष की पूर्व संध्या पर लोक साहित्य संस्कृति समिति के तत्वावधान में आयोजित काव्य संगोष्ठी में कवियों ने कविताएं सुनाकर नए साल का स्वागत किया।
मोहल्ला रामपुर में शुक्रवार शाम आयोजित काव्य संगोष्ठी का शुभारंभ मां सरस्वती की वंदना से हुआ। युवा कवयित्री अंजलि ने सुनाया, मां शारदे, इतना कर दे, सिर्फ कोरोना ओमिक्रॉन को हरदे। कवि शौकत अली ने सुनाया, चलो आज मिलकर हम कसम यह खाएं। भारत को हम मिलकर खुशहाल बनाएं। कवि गजेंद्र गजानन ने सुनाया, नववर्ष की बेला पर सुख शांति का पाठ करूंगा। शहीद हुए किसान और जवानों को नमन, दरिंदों का दमन करूंगा।
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कवयित्री वैशाली कौशिक ने सुनाया, लो बीत चला ये भी साल, फिर से नया आया एक। इस नए साल में होगी नई बात अनेक। कवि अजयवीर यादव ने सुनाया, जब भी घर से निकलो ओमिक्रॉन देखकर निकलो। कहीं कोहराम न छा जाए कोरोना देखकर निकलो। कवि प्रेमशंकर ने सुनाया, खुशियां हर एक पल की छाए बहार बनके, हर पल खुशी के साए दामन पर छाए भर के। कवि सुमित कुमार ने सुनाया, हे नववर्ष तुम्हारा स्वागत है, सत्कार है। यह मातृभूमि नववर्ष में तुम्हें नमस्कार है। कवि एके सिंह ने सुनाया, नववर्ष 2022 अब ऐसा कर दे। शिक्षा में संस्कार सबको भावमयी करदे। काव्य संगोष्ठी की अध्यक्षता पूर्व प्रधानाचार्य दयानंद शर्मा ने की तथा संचालन गजेंद्र कौशिक गजानन ने किया। इस मौके पर संदीप कुमार, अशोक धामा, सुरेंद्र वर्मा, राहुल, देवेंद्र, महेश कुमार आदि श्रोता शामिल रहे। संवाद
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