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पुलिस लाइन में हुई दंगा नियंत्रण की मॉक ड्रिल
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बागपत। पुलिस लाइन परेड ग्राउंड में मंगलवार को एएसपी मनीष कुमार मिश्र ने बलवा नियंत्रण के लिए मॉक ड्रिल कराई। उन्होंने पुलिस कर्मियों को बलवा नियत्रंण के लिए की जाने वाली कार्रवाई के बारें में जानकारी दी।
एएसपी मनीष कुमार मिश्र व आरआई विजय कुमार पांडेय के निर्देशन में मंगलवार को पुलिस लाइन में बलवा नियंत्रण के लिए मॉक ड्रिल हुई। एएसपी ने बताया कि बलवा नियंत्रण के लिए पुलिस के दस दस्तों का गठन किया गया है। एलआईयू, सिविल पुलिस, टीयर गैस, लाठी दस्ता, वाटर कैनन व फायरिंग दस्ते शामिल हैं। एलआईयू का कार्य पुलिस को स्थिति की जानकारी देना होता है। सिविल पुलिस दंगाइयों को नियंत्रित करने का प्रयास करती है। सिविल पुलिस के दंगा रोकने में विफल होने पर अन्य दस्तों की सहायता ली जाती है। सबसे अहम भूमिका फायर दस्ते की होती है। फायर दस्ते को फायरिंग के दौरान किसी प्रकार की जन हानि न होने का ख्याल रखना होता है। पुलिस को लाठी चलाते समय किसी व्यक्ति को कोई गंभीर चोट न का ध्यान रखना पड़ता है। दंगाइयों को काबू करने के लिए पहले लाठी चार्ज व उसके बाद आंसू गैस का सहारा लिया जाता है। बलवा रोकने के लिए फायरिंग सबसे अंतिम विकल्प है।
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एएसपी मनीष कुमार मिश्र व आरआई विजय कुमार पांडेय के निर्देशन में मंगलवार को पुलिस लाइन में बलवा नियंत्रण के लिए मॉक ड्रिल हुई। एएसपी ने बताया कि बलवा नियंत्रण के लिए पुलिस के दस दस्तों का गठन किया गया है। एलआईयू, सिविल पुलिस, टीयर गैस, लाठी दस्ता, वाटर कैनन व फायरिंग दस्ते शामिल हैं। एलआईयू का कार्य पुलिस को स्थिति की जानकारी देना होता है। सिविल पुलिस दंगाइयों को नियंत्रित करने का प्रयास करती है। सिविल पुलिस के दंगा रोकने में विफल होने पर अन्य दस्तों की सहायता ली जाती है। सबसे अहम भूमिका फायर दस्ते की होती है। फायर दस्ते को फायरिंग के दौरान किसी प्रकार की जन हानि न होने का ख्याल रखना होता है। पुलिस को लाठी चलाते समय किसी व्यक्ति को कोई गंभीर चोट न का ध्यान रखना पड़ता है। दंगाइयों को काबू करने के लिए पहले लाठी चार्ज व उसके बाद आंसू गैस का सहारा लिया जाता है। बलवा रोकने के लिए फायरिंग सबसे अंतिम विकल्प है।
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