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मेरठ और बड़ौत की टीमों ने की भूमि की पैमाइश
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बिनौली (बागपत)। हिंडन नदी के किनारे गल्हैता के जंगल के पास स्थित कलीना गांव स्थित भूमि के विवाद के निपटारे के लिए शनिवार को मेरठ और बागपत जनपदों के राजस्व अधिकारियों की टीम ने पैमाइश की। दोनों जनपदों के राजस्व रिकार्ड का मिलान किया गया। कलीना के रकबे की पहचान की गई, लेकिन बड़ौत तहसील के राजस्व कर्मियों पर मूल सिजरा नहीं होने के चलते पैमाइश का कार्य नहीं हो सका।
हिंडन नदी के किनारे गल्हैता के जंगल से सटी मेरठ के कलीना गांव में सैकड़ों बीघा जमीन है। इस पर कई वर्षों से कुछ लोगों ने कब्जा कर रखा है। कई माह से कलीना के किसान इस जमीन पर काबिज होने के लिए अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं। मई में जमीन पर खड़ी फसल को लेकर कलीना और गल्हैता के लोगों में विवाद खड़ा हो गया था। मामला दोनों जनपदों के अधिकारियों के संज्ञान में पहुंचा। इसके बाद जमीन को कब्जामुक्त कर किसानों को काबिज कराने की कवायद शुरू हुई। पूर्व में बड़ौत तहसीलदार के नेतृत्व में राजस्व कर्मियों की टीम ने अपना रकबा नापतौल कर कलीना गांव के किसानों का रकबा छोड़ दिया था।
शनिवार को एसडीएम मेरठ सदर संदीप भागिया, तहसीलदार मनोज कुमार, राजस्व निरीक्षक रोहटा नरेश चौधरी, लेखपाल सीताराम, हरकेश, समर सिंह, पवन भारती, परमिंदर सिंह, मनोज जानी, बड़ौत तहसील के कानूनगो लोकेश कुमार, लेखपाल, रामपाल यादव, सुरेश शर्मा, वीरेंद्र कुमार आदि गल्हैता के जंगल में पहुंचे। दोनों जनपदों के राजस्व रिकार्ड का मिलान किया गया। कलीना के रकबे की पहचान की गई। मगर, बड़ौत तहसील के राजस्व कर्मियों पर मूल सिजरा नहीं होने के चलते पैमाइश का कार्य नहीं हो सका। अब दूसरी तिथि निर्धारित कर दोनों जनपदों के अधिकारी पैमाइश कर किसानों को कब्जा दिलाएंगे।
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हिंडन नदी के किनारे गल्हैता के जंगल से सटी मेरठ के कलीना गांव में सैकड़ों बीघा जमीन है। इस पर कई वर्षों से कुछ लोगों ने कब्जा कर रखा है। कई माह से कलीना के किसान इस जमीन पर काबिज होने के लिए अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं। मई में जमीन पर खड़ी फसल को लेकर कलीना और गल्हैता के लोगों में विवाद खड़ा हो गया था। मामला दोनों जनपदों के अधिकारियों के संज्ञान में पहुंचा। इसके बाद जमीन को कब्जामुक्त कर किसानों को काबिज कराने की कवायद शुरू हुई। पूर्व में बड़ौत तहसीलदार के नेतृत्व में राजस्व कर्मियों की टीम ने अपना रकबा नापतौल कर कलीना गांव के किसानों का रकबा छोड़ दिया था।
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शनिवार को एसडीएम मेरठ सदर संदीप भागिया, तहसीलदार मनोज कुमार, राजस्व निरीक्षक रोहटा नरेश चौधरी, लेखपाल सीताराम, हरकेश, समर सिंह, पवन भारती, परमिंदर सिंह, मनोज जानी, बड़ौत तहसील के कानूनगो लोकेश कुमार, लेखपाल, रामपाल यादव, सुरेश शर्मा, वीरेंद्र कुमार आदि गल्हैता के जंगल में पहुंचे। दोनों जनपदों के राजस्व रिकार्ड का मिलान किया गया। कलीना के रकबे की पहचान की गई। मगर, बड़ौत तहसील के राजस्व कर्मियों पर मूल सिजरा नहीं होने के चलते पैमाइश का कार्य नहीं हो सका। अब दूसरी तिथि निर्धारित कर दोनों जनपदों के अधिकारी पैमाइश कर किसानों को कब्जा दिलाएंगे।
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