नोटबंदी ने लील ली एक ओर जिंदगी
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यामीन (45 वर्ष) पुत्र मोहर्ररम अली शेखपुरा गांव का रहने वाला था। वह मजदूरी करता था। गत 21 नवंबर को उसके बड़े बेटे एहसान की बारात खिंदौड़ा गांव जानी थी। नोटबंदी के चलते वह पैसे का इंतजाम नहीं कर पाया तो उसने शादी एक माह बाद करने का निर्णय लिया। अब शादी 21 दिसंबर को थी। शुक्रवार को वह बिनौली डाकघर में पैसे निकलवाने पहुंचा, लेकिन शाम तक पैसे नहीं निकले। डाकघर कर्मचारियों ने कह दिया कि पैसा नहीं आया है। वह चिंता में डूबा अपने घर आ गया। रात में वह अपने कमरे में सोया था। सुबह पत्नी नसीमा ने उसे जगाने का काफी प्रयास किया, लेकिन वह नहीं उठा। उसके बेटे एहसान, गुलजार, शुहान के कोशिश करने पर भी कोई हलचल न हुई तो परिजनों ने गांव के एक चिकित्सक को बुलाया। उसने यामीन को मृत घोषित कर दिया।
यामीन की मौत से पूरे परिवार में कोहराम मच गया। घर में भीड़ जमा हो गई। ग्राम प्रधान जनेश्वर बागड़ी भी पहुंचे और एसडीएम बड़ौत को घटना की सूचना दी। परिजनों ने यामीन के शव का पोस्टमार्टम कराने से इनकार कर दिया। बाद में परिजनों ने शव को दफना दिया।