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कारपोरेट कंपनियों की तरह उद्योगों को भी मिले छूट
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बड़ौत (बागपत)। आम बजट से जिले के उद्यमियों को काफी उम्मीदें है। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण से उद्यमी आस लगाये बैठे है कि इस बार इनकम टैक्स से छूट बढ़ेगी। जिस तरह कारपोरेट कंपनियों को लाभ दिया गया, उसी तरह उद्योगों को भी लाभ दिया जाएगा। रोजगार देने वाले उद्योगों पर सरकार फोकस करेगी।
उद्योगों पर इनकम टैक्स का जो स्लैब है, वह काफी पुराना है। इसमें इनकम पर उद्यमियों को 33 प्रतिशत टैक्स सरकार को देना पड़ता है। यहीं नहीं लाभांश पर अलग से टैक्स होता है। जिले के उद्यमियों को उम्मीद है कि जिस तरह कुछ दिन पहले सरकार ने कारपोरेट कंपनियों को छूट दी थी, उसी प्रकार की छूट उद्योगों को भी दे दी जाए। ऐसे उद्योगों को सरकार बढ़ावा दें, जो अधिक रोजगार उपलब्ध कराएं। ऋण को लेकर जो नियम है, उनमें परिवर्तन किया जाएं। ताकि बैंक से ऋण नहीं मिलने की स्थिति में उद्यमी अन्य किसी भी व्यक्ति से ऋण ले सके। टैक्स में छूट का जो मॉडल झारखंड के एक क्षेत्र में अपनाया गया, उसी को आगे बढ़ाया जाए।
कंपनी लॉ में बदलाव होना चाहिए
उद्यमी अमरचंद जैन का कहना है कि नए उद्योगों को सरकार बढ़ावा देना चाहती है तो कंपनी लॉ में चेंज करना होगा। इस समय बैंक पैसे दे नहीं रहे है। ऐसी हालत में नए उद्योग कैसे लगेंगे। कंपनी लॉ में चेंज कर कहीं से भी पैसा लेने की छूट होनी चाहिए।
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जीएसटी कम की जाए
सुरेंद्र जैन का कहना था कि रिम धूरा उद्योग पर 18 प्रतिशत जीएसटी है। पांच प्रतिशत होनी चाहिए। तेल के दामों में बढ़ोत्तरी होने के कारण भाड़े में भी वृद्धि हुई है। इससे उद्यमियों को लाभ नहीं हो रहा है। इसके लिए तेल के मूल्यों में कमी होनी चाहिए।
इनकम टैक्स का सरलीकरण हो
उद्यमी प्रमोद जैन का कहना था कि भारत सरकार ने इनकम टैक्स का जो निर्धारण किया है, वह काफी पुराना है। इनकम टैक्स का सरलीकरण होगा तो कर जमा करने वालों की संख्या बढ़ेगी। इसी के साथ लाभांश टैक्स फ्री होना चाहिए। उद्यमियों को उम्मीद है कि इस बजट से सरकार इन बातों का ध्यान रखेगी।
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उद्योगों पर इनकम टैक्स का जो स्लैब है, वह काफी पुराना है। इसमें इनकम पर उद्यमियों को 33 प्रतिशत टैक्स सरकार को देना पड़ता है। यहीं नहीं लाभांश पर अलग से टैक्स होता है। जिले के उद्यमियों को उम्मीद है कि जिस तरह कुछ दिन पहले सरकार ने कारपोरेट कंपनियों को छूट दी थी, उसी प्रकार की छूट उद्योगों को भी दे दी जाए। ऐसे उद्योगों को सरकार बढ़ावा दें, जो अधिक रोजगार उपलब्ध कराएं। ऋण को लेकर जो नियम है, उनमें परिवर्तन किया जाएं। ताकि बैंक से ऋण नहीं मिलने की स्थिति में उद्यमी अन्य किसी भी व्यक्ति से ऋण ले सके। टैक्स में छूट का जो मॉडल झारखंड के एक क्षेत्र में अपनाया गया, उसी को आगे बढ़ाया जाए।
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कंपनी लॉ में बदलाव होना चाहिए
उद्यमी अमरचंद जैन का कहना है कि नए उद्योगों को सरकार बढ़ावा देना चाहती है तो कंपनी लॉ में चेंज करना होगा। इस समय बैंक पैसे दे नहीं रहे है। ऐसी हालत में नए उद्योग कैसे लगेंगे। कंपनी लॉ में चेंज कर कहीं से भी पैसा लेने की छूट होनी चाहिए।
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जीएसटी कम की जाए
सुरेंद्र जैन का कहना था कि रिम धूरा उद्योग पर 18 प्रतिशत जीएसटी है। पांच प्रतिशत होनी चाहिए। तेल के दामों में बढ़ोत्तरी होने के कारण भाड़े में भी वृद्धि हुई है। इससे उद्यमियों को लाभ नहीं हो रहा है। इसके लिए तेल के मूल्यों में कमी होनी चाहिए।
इनकम टैक्स का सरलीकरण हो
उद्यमी प्रमोद जैन का कहना था कि भारत सरकार ने इनकम टैक्स का जो निर्धारण किया है, वह काफी पुराना है। इनकम टैक्स का सरलीकरण होगा तो कर जमा करने वालों की संख्या बढ़ेगी। इसी के साथ लाभांश टैक्स फ्री होना चाहिए। उद्यमियों को उम्मीद है कि इस बजट से सरकार इन बातों का ध्यान रखेगी।