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मकान की चाहत में चार साल से छप्पर के नीचे बीत रही जिंदगी

Sat, 13 Nov 2021 11:30 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sat, 13 Nov 2021 11:30 PM IST
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Life is passing under the thatch for four years in the hope of a house
बागपत के सिसाना गांव में छप्पर दिखाता धर्मसिंह - फोटो : BAGHPAT
- प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण का बुरा हाल, चार साल पहले आवेदन करने के बावजूद एक भी किस्त नहीं मिली
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- किसी को जर्जर मकान में जिंदगी जोखिम में डालकर रहना पड़ रहा तो किसी को भाई का सहारा लेना पड़ रहा
- लोगों की वक्त के साथ खत्म हो रही उम्मीद, अधिकारी अपनी तरफ से किस्त दिलाने का नहीं करते प्रयास
संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत। गरीब परिवारों ने अपने मकान की चाहत में प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के तहत आवेदन जरूर कर दिया। लेकिन उम्मीद के साथ चार साल से छप्पर के नीचे जिंदगी बीत रही है। इस तरह का कोई एक मामला नहीं है, बल्कि प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण में आवेदन करने वाले सैकड़ों गरीब परिवार कई साल से पहली ही किस्त का इंतजार कर रहे है। क्योंकि किसी को जर्जर मकान में जिंदगी जोखिम में डालकर रहना पड़ रहा है तो कोई भाई के सहारे सिर छुपाए हुए है। हालात यह है कि अधिकारियों के चक्कर काट-काट कर लोग थक चुके है, लेकिन कोई पीड़ा सुनने वाला नहीं है।
छप्पर में परिवार, अब उम्मीद टूटने लगी
केस एक: सिसाना गांव के रहने वाले धर्म सिंह ने चार साल पहले प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के तहत मकान बनवाने के लिए आवेदन किया था। उसकी जांच के बाद सूची में नाम भी आया, लेकिन चार साल बाद भी मकान बनाने के लिए पहली किस्त तक नहीं मिली है। पिछले चार साल से विकास भवन के चक्कर काट रहा है और उसके बाद भी कुछ नहीं हो रहा है। हालात यह है कि पिछले चार साल से ईंट लगाकर छप्पर डाला हुआ है और उसमें ही पूरे परिवार की जिंदगी बीत रही है। बारिश व ठंड में परिवार की बुरी हालत रहती है। जिस तरह से वक्त बीत रहा है, उसी तरह अपने मकान की उम्मीद भी टूट रही है।
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आवेदन करके छप्पर में रहने लगे, अब वह भी नहीं बचा
केस दो: गौरीपुर जवाहरनगर के कंवरपाल ने चार साल पहले प्रधानमंत्री आवास योजना से मकान बनवाने के लिए आवेदन किया था। इसके बाद आज तक यह भी पता नहीं चला कि लाभार्थियों की सूची में नाम आया है या नहीं। अधिकारियों के पास कई बार चक्कर काट चुके है, लेकिन कोई इस बारे में जानकारी नहीं देता है। ग्राम सचिव व प्रधान तक को समस्या बताई, तब भी कुछ नहीं हुआ। परिवार को छप्पर में रहना पड़ रहा था, लेकिन दिवाली पर पटाखे की चिंगारी गिरने से वह भी जल गया। अब सिर छुपाने तक के लिए जगह नहीं है और परिवार के सभी छह सदस्य भाई के यहां एक कमरे में रहते है।
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जर्जर मकान में जान जोखिम में डालकर रहता है परिवार
केस तीन: गौरीपुर जवाहरनगर की धर्मवीरी के बेटे शिवकुमार ने करीब तीन साल पहले आवेदन किया था। मकान पूरी तरह से जर्जर हो चुका है और छत कभी भी गिरने का डर रहता है। उसके बाद भी जान दांव पर लगाकर उसमें रहना पड़ रहा है। क्योंकि आवेदन के बाद परिवार को यह भी नहीं पता चल रहा है कि उनका नाम सूची में आया है या नहीं। बुजुर्ग धर्मवीरी कई बार बेटे के साथ अधिकारियों व प्रधान के पास भी गई, लेकिन कार्रवाई उम्मीद से आगे नहीं बढ़ सकी।

जिनके नाम आखिरी सूची में आए है और उनको अभी तक किस्त नहीं मिली है तो यह गंभीर बात है। अगर किसी की ऐसी समस्या है तो वह मुझसे मिल सकते है। परियोजना निदेशक से उनकी समस्या का समाधान कराया जाएगा और इसको प्राथमिकता पर लिया जाएगा। - रंजीत सिंह, सीडीओ
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