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घास के मैदान पर करा दी कबड्डी प्रतियोगिता
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ब्बड्डी मैच में रेडर को पकड़ने का प्रयास करते खिलाड़ी
- फोटो : BARAUT
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बड़ौत। भले ही सरकार परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों की शिक्षा और खेलकूद पर हर साल करोड़ों रुपये खर्च कर रही हो, लेकिन शिक्षा विभाग के अधिकारी बिल्कुल भी बच्चों के प्रति सजग नहीं है। इसका एक उदाहरण शिक्षा विभाग द्वारा संपन्न कराई गई ब्लाक स्तरीय खेलकूद प्रतियोगिता है। शिक्षा विभाग ने ब्लाक स्तरीय खेलकूद प्रतियोगिता में मात्र खानापूर्ति ही बरती। आलम यह रहा कि कबड्डी प्रतियोगिता भी मैदान पर कराने की बजाए घास के मैदान पर करा दी गई।
गायत्री देवी कॉलेज ऑफ एजुकेशन में शुक्रवार को ब्लाक स्तरीय खेलकूद प्रतियोगिता कराई गई। जिसमें क्षेत्र के कई सरकारी विद्यालयों के बच्चों ने कबड्डी सहित दौड़ और अन्य प्रतियोगिता में भाग लिया। वहीं दूसरी ओर शिक्षक प्रतियोगिता करने में बिल्कुल लापरवाह दिखे।
शिक्षकों ने बिना सोच-समझे कबड्डी प्रतियोगिता घास के मैदान में ही संपन्न करा दी। बच्चों ने मजबूरी में कबड्डी प्रतियोगिता में प्रतिभाग तो कर लिया, लेकिन कई बार घास में पैर फिसलने से घायल भी हो गए। छात्र अंकुर ने बताया कि शिक्षकों ने इस ओर बिल्कुल भी ध्यान नहीं दिया। छात्र नितिन ने बताया कि शिक्षकों से मैदान में कबड्डी प्रतियोगिता कराने के लिए कहीं थी, लेकिन शिक्षकों ने एक ना सुनी।
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कोट...
केवल बच्चों के मनोरंजन के लिए घास के मैदान में प्रतियोगिता कराई गई थी। कोई लापरवाही और कोई खानापूर्ति नहीं बरती गई। - प्रकाशचंद, एबीएसए
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गायत्री देवी कॉलेज ऑफ एजुकेशन में शुक्रवार को ब्लाक स्तरीय खेलकूद प्रतियोगिता कराई गई। जिसमें क्षेत्र के कई सरकारी विद्यालयों के बच्चों ने कबड्डी सहित दौड़ और अन्य प्रतियोगिता में भाग लिया। वहीं दूसरी ओर शिक्षक प्रतियोगिता करने में बिल्कुल लापरवाह दिखे।
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शिक्षकों ने बिना सोच-समझे कबड्डी प्रतियोगिता घास के मैदान में ही संपन्न करा दी। बच्चों ने मजबूरी में कबड्डी प्रतियोगिता में प्रतिभाग तो कर लिया, लेकिन कई बार घास में पैर फिसलने से घायल भी हो गए। छात्र अंकुर ने बताया कि शिक्षकों ने इस ओर बिल्कुल भी ध्यान नहीं दिया। छात्र नितिन ने बताया कि शिक्षकों से मैदान में कबड्डी प्रतियोगिता कराने के लिए कहीं थी, लेकिन शिक्षकों ने एक ना सुनी।
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केवल बच्चों के मनोरंजन के लिए घास के मैदान में प्रतियोगिता कराई गई थी। कोई लापरवाही और कोई खानापूर्ति नहीं बरती गई। - प्रकाशचंद, एबीएसए