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Baghpat News: दो किमी सड़क के मुआवजे में लगे 41 साल... बिना दिए वापस
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अंकित चौहान
बागपत। यूपी व हरियाणा को जोड़ने के लिए दो किमी सड़क बनने के 41 साल बाद जमीन का 1.97 करोड़ रुपये मुआवजा आया, मगर वह भी अब लौटा दिया। गौरीपुर मोड़ से यमुना पुल तक निवाड़ा व गौरीपुर के 32 किसानों की जमीन पर यह सड़क बनाई गई थी।
हरियाणा से यूपी को जोड़ने के लिए वर्ष 1984 में सड़क का निर्माण किया गया। निवाड़ा के 12 और गौरीपुर के 20 किसानों की जमीन पर इसका निर्माण हुआ था। सड़क निर्माण के समय बागपत जिला नहीं था और यह मेरठ जिले में आता था। इसलिए किसानों ने मुआवजे को लेकर ज्यादा ध्यान नहीं दिया। इस मामले में 17 साल पहले निवाड़ा के किसानों चौधरी हसरत, हाजी गुल हसन, गौरीपुर के सुरेंद्र, संदीप आदि ने हाईकोर्ट में जमीन के मुआवजे के लिए केस डाला।
हाईकोर्ट ने वर्ष 2011 में 850 रुपये वर्ग मीटर के हिसाब से मुआवजा देने के आदेश दिए। तब शासन से मुआवजा देने के लिए बजट नहीं मिला तो मामला लंबा खिंचता चला गया। किसान लगातार अधिकारियों के पास मुआवजे की मांग को लेकर चक्कर काटते रहे। इसके बावजूद मुआवजा नहीं मिला।
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- नेशनल हाईवे घोषित होने पर नहीं मिली जमीन अधिग्रहण की फाइल
वर्ष 2020 में मेरठ से सोनीपत तक के मार्ग को नेशनल हाईवे 334बी घोषित कर दिया गया और यह सड़क एनएचएआई के अधीन हो गई। जब एनएचएआई के अधिकारियों ने कागजों में देखा तो उस जमीन के अधिग्रहण से संबंधित कोई फाइल नहीं मिली। क्योंकि इस जमीन का अधिग्रहण नहीं किया गया था, बल्कि बिना कागजी कार्रवाई के सड़क बना दी गई थी। इसलिए किसानों से संपर्क किया गया तो उन्होंने वर्तमान सर्किल रेट के आधार पर मुआवजे की मांग शुरू कर दी। शासन ने 5.20 करोड़ रुपये मुआवजा मंजूर किया और दो महीने पहले 1.97 करोड़ रुपये जारी कर दिए गए।
- किसानों को मिलने की जगह वापस गए 1.97 करोड़ रुपये
किसानों को मुआवजा देने के लिए रुपये जरूर मिले, मगर किसानों ने कहा कि वह वर्तमान सर्किल रेट के आधार पर मुआवजा लेंगे। जबकि शासन उनको वर्ष 2011 में हुए हाईकोर्ट के आदेश के समय के सर्किल रेट के आधार पर मुआवजा देना चाहता है। इसलिए किसानों को मिलने की जगह 1.97 करोड़ रुपये वापस चले गए।
- हमारी जमीन पर वर्ष 1984 में सड़क बनाई गई थी और उसका कोई मुआवजा नहीं दिया गया। अब हम वर्तमान सर्किल रेट के आधार पर मुआवजा लेंगे। उससे कम मुआवजा मंजूर नहीं है। - हसरत अली
हम जमीन के मुआवजे की मांग काफी समय से कर रहे हैं। अधिकारी मुआवजा देने की बात करते हैं, मगर वह पंद्रह साल पुराने सर्किल रेट से मुआवजा देते हैं। हम जमीन के कागजों पर तभी हस्ताक्षर करेंगे, जब वर्तमान सर्किल रेट के हिसाब से पूरा मुआवजा मिलेगा। - हाजी गुल हसन
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वर्जन
गौरीपुर मोड़ से यमुना पुल तक जिस जमीन पर सडक़ निर्माण हुआ है। उस जमीन के लिए शासन से मुआवजा देने के लिए रुपये आए थे। किसानों ने जिस तरह की अपनी आपत्ति दर्ज कराई है, उसकी रिपोर्ट भेजकर शासन को अवगत करा दिया गया है। किसानों के मुआवजा नहीं लेने के कारण ही 1.97 करोड़ रुपये वापस गए हैं। - अतुल कुमार, अधिशासी अभियंता लोक निर्माण विभाग
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बागपत। यूपी व हरियाणा को जोड़ने के लिए दो किमी सड़क बनने के 41 साल बाद जमीन का 1.97 करोड़ रुपये मुआवजा आया, मगर वह भी अब लौटा दिया। गौरीपुर मोड़ से यमुना पुल तक निवाड़ा व गौरीपुर के 32 किसानों की जमीन पर यह सड़क बनाई गई थी।
हरियाणा से यूपी को जोड़ने के लिए वर्ष 1984 में सड़क का निर्माण किया गया। निवाड़ा के 12 और गौरीपुर के 20 किसानों की जमीन पर इसका निर्माण हुआ था। सड़क निर्माण के समय बागपत जिला नहीं था और यह मेरठ जिले में आता था। इसलिए किसानों ने मुआवजे को लेकर ज्यादा ध्यान नहीं दिया। इस मामले में 17 साल पहले निवाड़ा के किसानों चौधरी हसरत, हाजी गुल हसन, गौरीपुर के सुरेंद्र, संदीप आदि ने हाईकोर्ट में जमीन के मुआवजे के लिए केस डाला।
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हाईकोर्ट ने वर्ष 2011 में 850 रुपये वर्ग मीटर के हिसाब से मुआवजा देने के आदेश दिए। तब शासन से मुआवजा देने के लिए बजट नहीं मिला तो मामला लंबा खिंचता चला गया। किसान लगातार अधिकारियों के पास मुआवजे की मांग को लेकर चक्कर काटते रहे। इसके बावजूद मुआवजा नहीं मिला।
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- नेशनल हाईवे घोषित होने पर नहीं मिली जमीन अधिग्रहण की फाइल
वर्ष 2020 में मेरठ से सोनीपत तक के मार्ग को नेशनल हाईवे 334बी घोषित कर दिया गया और यह सड़क एनएचएआई के अधीन हो गई। जब एनएचएआई के अधिकारियों ने कागजों में देखा तो उस जमीन के अधिग्रहण से संबंधित कोई फाइल नहीं मिली। क्योंकि इस जमीन का अधिग्रहण नहीं किया गया था, बल्कि बिना कागजी कार्रवाई के सड़क बना दी गई थी। इसलिए किसानों से संपर्क किया गया तो उन्होंने वर्तमान सर्किल रेट के आधार पर मुआवजे की मांग शुरू कर दी। शासन ने 5.20 करोड़ रुपये मुआवजा मंजूर किया और दो महीने पहले 1.97 करोड़ रुपये जारी कर दिए गए।
- किसानों को मिलने की जगह वापस गए 1.97 करोड़ रुपये
किसानों को मुआवजा देने के लिए रुपये जरूर मिले, मगर किसानों ने कहा कि वह वर्तमान सर्किल रेट के आधार पर मुआवजा लेंगे। जबकि शासन उनको वर्ष 2011 में हुए हाईकोर्ट के आदेश के समय के सर्किल रेट के आधार पर मुआवजा देना चाहता है। इसलिए किसानों को मिलने की जगह 1.97 करोड़ रुपये वापस चले गए।
- हमारी जमीन पर वर्ष 1984 में सड़क बनाई गई थी और उसका कोई मुआवजा नहीं दिया गया। अब हम वर्तमान सर्किल रेट के आधार पर मुआवजा लेंगे। उससे कम मुआवजा मंजूर नहीं है। - हसरत अली
हम जमीन के मुआवजे की मांग काफी समय से कर रहे हैं। अधिकारी मुआवजा देने की बात करते हैं, मगर वह पंद्रह साल पुराने सर्किल रेट से मुआवजा देते हैं। हम जमीन के कागजों पर तभी हस्ताक्षर करेंगे, जब वर्तमान सर्किल रेट के हिसाब से पूरा मुआवजा मिलेगा। - हाजी गुल हसन
वर्जन
गौरीपुर मोड़ से यमुना पुल तक जिस जमीन पर सडक़ निर्माण हुआ है। उस जमीन के लिए शासन से मुआवजा देने के लिए रुपये आए थे। किसानों ने जिस तरह की अपनी आपत्ति दर्ज कराई है, उसकी रिपोर्ट भेजकर शासन को अवगत करा दिया गया है। किसानों के मुआवजा नहीं लेने के कारण ही 1.97 करोड़ रुपये वापस गए हैं। - अतुल कुमार, अधिशासी अभियंता लोक निर्माण विभाग