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महंगाई का वार, रसोई का बिगड़ा बजट, कारोबार पर पड़ा असर
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इस साल जनवरी से अक्तूबर के बीच पेट्रोल के दाम 21 फीसदी और डीजल के दाम 25 फीसदी तक बढ़े
रसोई गैस के दाम में भी इस दौरान 27 फीसदी की वृद्धि हुई
संवाद न्यूज एजेंसी
बड़ौत। पेट्रोल-डीजल और गैस के बढ़ते दाम घर से कारोबार तक असर डाल रहे हैं। इस साल जनवरी से अक्तूबर के बीच पेट्रोल के दाम 21 फीसदी और डीजल के दाम 25 फीसदी तक बढ़े हैं। रसोई गैस के दाम में भी इस दौरान 27 फीसदी की वृद्धि हुई। रसोई गैस के बढ़ते दाम से खाने पीने की चीजें महंगी हुईं और रसोई का बजट बिगड़ा तो पेट्रोल-डीजल के कीमतों में उछाल आने से किराये पर असर पड़ा। इन सबका असर प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से आम आदमी की जेब पर पड़ा है।
महंगाई दिखा रही अप्रत्यक्ष असर
ब्रेड-बिस्कुट, नमकीन आदि खाद्य वस्तुओं के दाम फिलहाल प्रत्यक्ष रूप से नहीं बढ़े हैं लेकिन इनकी मात्रा और वजन में दस से बीस फीसदी की कमी की गई है। यानी पैक्ड खाद्य वस्तुएं अप्रत्यक्ष रूप से दस से बीस फीसदी महंगी हुई हैं। बीस रुपये में मिलने वाला ब्रेड पहले 280 ग्राम का आता था अब यह पैकेट 250 ग्राम का हो गया है। दस रुपये वाले ब्रेड का वजन डेढ़ सौ ग्राम होता था अब वह भी सवा सौ ग्राम का कर दिया गया है। दस रुपये में पचास ग्राम नमकीन वाले पैकेट में अब 45 ग्राम ही नमकीन मिल रही है। यही हाल बिस्कुट का है। पांच रुपये वाले बिस्कुट के पैकेट में वजन पांच से आठ ग्राम कम किया गया है।
समोसा-कचौड़ी, मिठाई भी हुईं महंगी
महंगाई का असर नाश्ते की दुकानों पर भी दिखाई दे रहा है। हलवाइयों ने समोसे के दाम सात से दस रुपये तक कर दिए हैं। बेसन से बनी मिठाई के दाम 40 से 80 रुपये प्रति किलोग्राम बढ़े हैं तो दूध से निर्मित मिठाई के दाम भी चालीस से साठ रुपये प्रति किलोग्राम बढ़ाए गए हैं। मेवा आधारित मिठाइयों के दाम में भी सौ से दो सौ रुपये किलोग्राम तक बढ़त हुई है।
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ये बोली गृहणी-
गृहणी शालिनी, बरखा का कहना है कि सीमित बजट में महंगाई का सामना करने के लिए लोग खर्च में कटौती कर रहे हैं। कहा कि घर चलाने के लिए रसोई में जरूरी सामान को छोड़कर कटौती की जा रही है। सरकार को महंगाई पर अंकुश लगाना चाहिए। सरिता का कहना है कि महंगाई से हर वर्ग परेशान है। हर चीजों पर दाम बढ़ने से घर चलाना मुश्किल हो रहा है। सरकार को इस ओर ध्यान देना चाहिए।
आमजन बोले, सोच समझकर कर रहे खर्च
भूतपूर्व सैनिक सत्यवीर सिंह, विनीत मलिक का कहना है कि अब सोच समझकर घरों से बाहर बाइक व कार निकालते है। जरूरी काम आने पर ही वाहनों का इस्तेमाल कर रहे है। बताया कि पहले पेट्रोल व डीजल के दाम कम थे, तो कहीं पर भी वाहन उठाकर चल पड़ते थे, लेकिन अब कई बार सोचना पड़ता है। यहां तक की घर से दूर स्थित सब्जी मंडियों में पैदल ही सब्जियां खरीद रहे है। महीने में इससे दो से तीन हजार की बचत भी हो जाती है।
सत्यपाल सिंह व सोनू का कहना है कि महंगाई के इस दौर में इनकम कम हो गई है और खर्च बढ़ गया है। आए दिन पेट्रोल व डीजल के दाम बढ़ने से पूरे घर का बजट बिगड़ने लगा है। सोच-समझकर एक-एक रुपये खर्च करना पड़ रहा है। सरकार को इस ओर ध्यान देना चाहिए।
लागत बढ़ी लेकिन आमदनी घटी
बिनौली रोड स्थित पेट्रोल पंप संचालक शिवेंद्र कहते हैं कि डीजल-पेट्रोल के दाम सर्वोच्च स्तर पर पहुंच चुके हैं लेकिन पंप संचालकों का कमीशन 2018 से नहीं बढ़ा। इससे पंप संचालकों के सामने पूंजी का संकट खड़ा हो गया है। यदि तेल विपणन कंपनियों ने जल्द ही कमीशन राशि नहीं बढ़ाई तो कई पंप संचालक तेल खरीदने में असमर्थ हो सकते हैं।
इस तरह बढ़े दाम
माह पेट्रोल डीजल रसोई गैस
जनवरी 83.66 74.78 767.50
फरवरी 85.66 76.93 767.50
मार्च 89.37 81.92 817.50
अप्रैल 88.92 81.32 807.50
मई 88.77 82.19 807.50
जून 81.81 85.86 807.50
जुलाई 96.08 89.64 832.50
अगस्त 98.74 90.34 857.00
सितंबर 98.93 90.44 882.50
अक्तूबर 102.10 94.25 897.50
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रसोई गैस के दाम में भी इस दौरान 27 फीसदी की वृद्धि हुई
संवाद न्यूज एजेंसी
बड़ौत। पेट्रोल-डीजल और गैस के बढ़ते दाम घर से कारोबार तक असर डाल रहे हैं। इस साल जनवरी से अक्तूबर के बीच पेट्रोल के दाम 21 फीसदी और डीजल के दाम 25 फीसदी तक बढ़े हैं। रसोई गैस के दाम में भी इस दौरान 27 फीसदी की वृद्धि हुई। रसोई गैस के बढ़ते दाम से खाने पीने की चीजें महंगी हुईं और रसोई का बजट बिगड़ा तो पेट्रोल-डीजल के कीमतों में उछाल आने से किराये पर असर पड़ा। इन सबका असर प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से आम आदमी की जेब पर पड़ा है।
महंगाई दिखा रही अप्रत्यक्ष असर
ब्रेड-बिस्कुट, नमकीन आदि खाद्य वस्तुओं के दाम फिलहाल प्रत्यक्ष रूप से नहीं बढ़े हैं लेकिन इनकी मात्रा और वजन में दस से बीस फीसदी की कमी की गई है। यानी पैक्ड खाद्य वस्तुएं अप्रत्यक्ष रूप से दस से बीस फीसदी महंगी हुई हैं। बीस रुपये में मिलने वाला ब्रेड पहले 280 ग्राम का आता था अब यह पैकेट 250 ग्राम का हो गया है। दस रुपये वाले ब्रेड का वजन डेढ़ सौ ग्राम होता था अब वह भी सवा सौ ग्राम का कर दिया गया है। दस रुपये में पचास ग्राम नमकीन वाले पैकेट में अब 45 ग्राम ही नमकीन मिल रही है। यही हाल बिस्कुट का है। पांच रुपये वाले बिस्कुट के पैकेट में वजन पांच से आठ ग्राम कम किया गया है।
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समोसा-कचौड़ी, मिठाई भी हुईं महंगी
महंगाई का असर नाश्ते की दुकानों पर भी दिखाई दे रहा है। हलवाइयों ने समोसे के दाम सात से दस रुपये तक कर दिए हैं। बेसन से बनी मिठाई के दाम 40 से 80 रुपये प्रति किलोग्राम बढ़े हैं तो दूध से निर्मित मिठाई के दाम भी चालीस से साठ रुपये प्रति किलोग्राम बढ़ाए गए हैं। मेवा आधारित मिठाइयों के दाम में भी सौ से दो सौ रुपये किलोग्राम तक बढ़त हुई है।
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ये बोली गृहणी-
गृहणी शालिनी, बरखा का कहना है कि सीमित बजट में महंगाई का सामना करने के लिए लोग खर्च में कटौती कर रहे हैं। कहा कि घर चलाने के लिए रसोई में जरूरी सामान को छोड़कर कटौती की जा रही है। सरकार को महंगाई पर अंकुश लगाना चाहिए। सरिता का कहना है कि महंगाई से हर वर्ग परेशान है। हर चीजों पर दाम बढ़ने से घर चलाना मुश्किल हो रहा है। सरकार को इस ओर ध्यान देना चाहिए।
आमजन बोले, सोच समझकर कर रहे खर्च
भूतपूर्व सैनिक सत्यवीर सिंह, विनीत मलिक का कहना है कि अब सोच समझकर घरों से बाहर बाइक व कार निकालते है। जरूरी काम आने पर ही वाहनों का इस्तेमाल कर रहे है। बताया कि पहले पेट्रोल व डीजल के दाम कम थे, तो कहीं पर भी वाहन उठाकर चल पड़ते थे, लेकिन अब कई बार सोचना पड़ता है। यहां तक की घर से दूर स्थित सब्जी मंडियों में पैदल ही सब्जियां खरीद रहे है। महीने में इससे दो से तीन हजार की बचत भी हो जाती है।
सत्यपाल सिंह व सोनू का कहना है कि महंगाई के इस दौर में इनकम कम हो गई है और खर्च बढ़ गया है। आए दिन पेट्रोल व डीजल के दाम बढ़ने से पूरे घर का बजट बिगड़ने लगा है। सोच-समझकर एक-एक रुपये खर्च करना पड़ रहा है। सरकार को इस ओर ध्यान देना चाहिए।
लागत बढ़ी लेकिन आमदनी घटी
बिनौली रोड स्थित पेट्रोल पंप संचालक शिवेंद्र कहते हैं कि डीजल-पेट्रोल के दाम सर्वोच्च स्तर पर पहुंच चुके हैं लेकिन पंप संचालकों का कमीशन 2018 से नहीं बढ़ा। इससे पंप संचालकों के सामने पूंजी का संकट खड़ा हो गया है। यदि तेल विपणन कंपनियों ने जल्द ही कमीशन राशि नहीं बढ़ाई तो कई पंप संचालक तेल खरीदने में असमर्थ हो सकते हैं।
इस तरह बढ़े दाम
माह पेट्रोल डीजल रसोई गैस
जनवरी 83.66 74.78 767.50
फरवरी 85.66 76.93 767.50
मार्च 89.37 81.92 817.50
अप्रैल 88.92 81.32 807.50
मई 88.77 82.19 807.50
जून 81.81 85.86 807.50
जुलाई 96.08 89.64 832.50
अगस्त 98.74 90.34 857.00
सितंबर 98.93 90.44 882.50
अक्तूबर 102.10 94.25 897.50