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बारिश नहीं होती तो आना मुश्किल था
ब्यूरो/अमर उजाला, खेकड़ा
Updated Mon, 18 Jul 2016 01:34 AM IST
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अमरनाथ यात्रा से वापस लौटने पर कश्मीर के हालात के बारे में परिजनों एवं दोस्तो को वहां के हालात की जानकारी देते जयदीप धामा
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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सेना द्वारा कश्मीर में आतंकी को मार गिराने के बाद आतंकवादियों द्वारा किए गए उपद्रव और हिंसा का खौफ अमरनाथ यात्रा से भोले बाबा के दर्शन कर वापस लौटे नगर निवासी लोगों के चेहरों साफ दिखाई दे रहा हैं। आतंकवादियों द्वारा किए हमले के दौरान अगर बारिश नहीं होती तो श्रद्धालुओं को भारी मुश्किल का सामना करना पड़ सकता था।
नगर से पांच जुलाई को करीब छह परिवारों के सदस्य सभासद जयदीप धामा, कुक्की शर्मा, अमरपाल शर्मा, बन्टी आदि गाड़ियों में सवार होकर बाबा अमरनाथ यात्रा के लिए रवाना हुए थे। इसी दौरान कश्मीर में सेना द्वारा आतंकी को मार गिराने के चलते आतंकवादियों ने अमरनाथ यात्रा के लिए गए श्रद्धालुओं को भी अपना निशाना बना लिया था। आतंकी श्रद्धालुओं पर पत्थर और गोलियां बरसाने लगे थे।
सभी दहशत जदा श्रद्धालु यही सोच रहे थे कि इतनी भयानक जगह से घर वापस परिजनों के बीच जिंदा पहुंचेंगे या नहीं, लेकिन यह कहावत सही साबित हुई कि जिसको राखे साईया मार सके ना कोई, बाल ना बांका कर सके जो जग बैरी होए। तभी भोले बाबा की कृपा से बारिश शुरू हुई और भक्तों की सुरक्षा के लिएं वहा मौजूद सैनिकों ने मौका पाकर उनको सुरक्षा के बीच वहां से निकाला।
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अमरनाथ यात्रा से सकुशल वापस लौटे नगर निवासी छह लोगों ने वह मौत का मंजर खेकड़ा अपने परिजनों के बीच वापस पहुंचकर बयां किया। नगर पालिका सभासद जयदीप धामा ने खौफनाक मंजर के बारे में बताया जैसे ही उनकी गाड़ियां श्रीनगर पहुंची, वहां पेट्रोल पंप पर गाड़ी में तेल भरवाया।
इसके बाद वे आगे बढ़े सड़कों पर हाथों में डंडे और पत्थर लिए गए खड़े 100-200 लोगों के जत्थों ने उनके वाहन को रोक लिया। अंधेरा हो चुका था। वाहनों में महिलाएं और बच्चे थे। सामने मंजर को देखकर सभी भयभीत हो गए। भीड़ से कुछ लोगों को गाड़ियों में चलने के लिए कहा तो कुछ ने रुकने के लिया। इसी दौरान डंडे और पत्थर चलाकर शीशे तोड़ दिए। वाहनों में स्क्रैच और गड्ढे बना दिए। कई अन्य वाहनों को भी नुकसान पहुंचा।
चालक वाहनों को धीमी गति के साथ चला रहे थे। दहशत के मारे सभी लोगों की जान अटकी थी। सभी हनुमान चालीसा का पाठ कर रहे थे, लेकिन भगवान की भक्ति करते करते वह अनंतनाग तक पहुंच गए और तभी बारिश होते ही सैनिकों उन्हें वहा से अंधेरे के बीच मौका पाकर निकाल दिया। सभी दहशत जदा लोगों ने सुबह होने की इंतजार तक नहीं की और वहां से अंधेरे के बीच रात्रि में ही पचास साठ गाड़ियों का काफिला निकल पड़ा। इस तरह से श्रद्धालु जान बचाकर अपने परिजनों के बीच सकुशल लौटे।
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नगर से पांच जुलाई को करीब छह परिवारों के सदस्य सभासद जयदीप धामा, कुक्की शर्मा, अमरपाल शर्मा, बन्टी आदि गाड़ियों में सवार होकर बाबा अमरनाथ यात्रा के लिए रवाना हुए थे। इसी दौरान कश्मीर में सेना द्वारा आतंकी को मार गिराने के चलते आतंकवादियों ने अमरनाथ यात्रा के लिए गए श्रद्धालुओं को भी अपना निशाना बना लिया था। आतंकी श्रद्धालुओं पर पत्थर और गोलियां बरसाने लगे थे।
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सभी दहशत जदा श्रद्धालु यही सोच रहे थे कि इतनी भयानक जगह से घर वापस परिजनों के बीच जिंदा पहुंचेंगे या नहीं, लेकिन यह कहावत सही साबित हुई कि जिसको राखे साईया मार सके ना कोई, बाल ना बांका कर सके जो जग बैरी होए। तभी भोले बाबा की कृपा से बारिश शुरू हुई और भक्तों की सुरक्षा के लिएं वहा मौजूद सैनिकों ने मौका पाकर उनको सुरक्षा के बीच वहां से निकाला।
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अमरनाथ यात्रा से सकुशल वापस लौटे नगर निवासी छह लोगों ने वह मौत का मंजर खेकड़ा अपने परिजनों के बीच वापस पहुंचकर बयां किया। नगर पालिका सभासद जयदीप धामा ने खौफनाक मंजर के बारे में बताया जैसे ही उनकी गाड़ियां श्रीनगर पहुंची, वहां पेट्रोल पंप पर गाड़ी में तेल भरवाया।
इसके बाद वे आगे बढ़े सड़कों पर हाथों में डंडे और पत्थर लिए गए खड़े 100-200 लोगों के जत्थों ने उनके वाहन को रोक लिया। अंधेरा हो चुका था। वाहनों में महिलाएं और बच्चे थे। सामने मंजर को देखकर सभी भयभीत हो गए। भीड़ से कुछ लोगों को गाड़ियों में चलने के लिए कहा तो कुछ ने रुकने के लिया। इसी दौरान डंडे और पत्थर चलाकर शीशे तोड़ दिए। वाहनों में स्क्रैच और गड्ढे बना दिए। कई अन्य वाहनों को भी नुकसान पहुंचा।
चालक वाहनों को धीमी गति के साथ चला रहे थे। दहशत के मारे सभी लोगों की जान अटकी थी। सभी हनुमान चालीसा का पाठ कर रहे थे, लेकिन भगवान की भक्ति करते करते वह अनंतनाग तक पहुंच गए और तभी बारिश होते ही सैनिकों उन्हें वहा से अंधेरे के बीच मौका पाकर निकाल दिया। सभी दहशत जदा लोगों ने सुबह होने की इंतजार तक नहीं की और वहां से अंधेरे के बीच रात्रि में ही पचास साठ गाड़ियों का काफिला निकल पड़ा। इस तरह से श्रद्धालु जान बचाकर अपने परिजनों के बीच सकुशल लौटे।