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पुण्य कर्म से मनुष्य को मिलता है उत्तम जीवन : गुप्ति सागर महाराज
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बड़ौत के अतिथि भवन में धर्मसभा में बोलते गुप्ति सागर महाराज।
- फोटो : BARAUT
पुण्य कर्म से मनुष्य को मिलता है उत्तम जीवन : गुप्ति सागर महाराज
बड़ौत। गुप्तिसागर महामुनिराज ने कहा कि इंसान का जीवन उसके कर्मों के अनुसार पाप और पुण्य के बीच चलता है। जब तक पुण्य कर्म शेष रहता है मनुष्य उत्तम जीवन बिताता है, पर जब पाप कर्म आता है तो अकस्मात विपत्ति आ जाती है। वह मंगलवार को दिगंबर जैन अतिथि भवन में आयोजित धर्मसभा में बोल रहे थे।
उन्होंने कहा कि मानो ईश्वर किसी घोर दुष्कर्म का दंड दे रहा है। कुछ मनुष्य बुरे से बुरे कर्म करता है पर वह चैन से रहता है। सब प्रकार के सुख-सौभाग्य उसे प्राप्त होते हैं क्योंकि यह उसके पूर्व जन्मों का फल है। एक निठल्ले को लॉटरी में, जुआ में या कहीं धन मिल जाता है किंतु दूसरा परिश्रमी और बुद्धिमान मनुष्य अभाव में ग्रसित रहता है। एक व्यक्ति स्वल्प परिश्रम में ही बड़ी सफलता प्राप्त कर लेता है जबकि दूसरा घोर प्रयत्न करने और सही तरीका पकड़ने पर भी असफल रहता है। यह सब अपने-अपने कर्मों का फल है। यह पाप-पुण्य कभी भी किसी भी जन्म में मनुष्य का पीछा नही छोड़ते। इसीलिए हमेशा अच्छे कर्म करो। धर्म सभा का संचालन अमित जैन ने किया। मंगलवार को मंगलाचार के तहत श्री सौरभ जैन आजर्व जैन द्वारा भगवान की भक्ति आराधना की गई। कार्यक्रम में पंकज, अजय, अनिल, गौरव, सिद्धार्थ, अमित, सुखमाल, कुसुम आदि शामिल रहे।
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बड़ौत। गुप्तिसागर महामुनिराज ने कहा कि इंसान का जीवन उसके कर्मों के अनुसार पाप और पुण्य के बीच चलता है। जब तक पुण्य कर्म शेष रहता है मनुष्य उत्तम जीवन बिताता है, पर जब पाप कर्म आता है तो अकस्मात विपत्ति आ जाती है। वह मंगलवार को दिगंबर जैन अतिथि भवन में आयोजित धर्मसभा में बोल रहे थे।
उन्होंने कहा कि मानो ईश्वर किसी घोर दुष्कर्म का दंड दे रहा है। कुछ मनुष्य बुरे से बुरे कर्म करता है पर वह चैन से रहता है। सब प्रकार के सुख-सौभाग्य उसे प्राप्त होते हैं क्योंकि यह उसके पूर्व जन्मों का फल है। एक निठल्ले को लॉटरी में, जुआ में या कहीं धन मिल जाता है किंतु दूसरा परिश्रमी और बुद्धिमान मनुष्य अभाव में ग्रसित रहता है। एक व्यक्ति स्वल्प परिश्रम में ही बड़ी सफलता प्राप्त कर लेता है जबकि दूसरा घोर प्रयत्न करने और सही तरीका पकड़ने पर भी असफल रहता है। यह सब अपने-अपने कर्मों का फल है। यह पाप-पुण्य कभी भी किसी भी जन्म में मनुष्य का पीछा नही छोड़ते। इसीलिए हमेशा अच्छे कर्म करो। धर्म सभा का संचालन अमित जैन ने किया। मंगलवार को मंगलाचार के तहत श्री सौरभ जैन आजर्व जैन द्वारा भगवान की भक्ति आराधना की गई। कार्यक्रम में पंकज, अजय, अनिल, गौरव, सिद्धार्थ, अमित, सुखमाल, कुसुम आदि शामिल रहे।
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