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शिविर में गर्भवती महिलाओं का उपचार किया
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शिविर में गर्भवती महिलाओं का उपचार किया
खेकड़ा। एसीएमओ ने खेकड़ा सीएचसी में पहुंचकर हाई रिस्क प्रेग्नेंसी डे कैंप में गर्भवती महिलाओं के उपचार का निरीक्षण किया। उन्होंने ऐसी गर्भवती महिलाओं को समय पर उपचार देने के निर्देश दिए।
सीएचसी पर रविवार को हाई रिस्क प्रेग्नेंसी कैंप का आयोजन किया गया। इसका निरीक्षण एसीएमओ डॉ. नीरज त्यागी ने किया।
उन्होंने महिला चिकित्सक डॉ. प्रगति अग्रवाल को आवश्यक दिशा निर्देश दिए। कैंप में 26 मरीजों में 11 हाई रिस्क के मिले। डॉ. नीरज त्यागी ने बताया कि तेजी से घटते हीमोग्लोबिन और सेहत की अनदेखी के कारण महिलाएं हाई रिस्क प्रेग्नेंसी की चपेट में आ रही हैं। प्रदेश भर में हर साल एक हजार से ज्यादा गर्भवती महिलाएं काल के गाल में समा जाती हैं। गर्भवती महिलाओं में हीमोग्लोबिन की स्तर बढ़ाने के लिए 90 दिन के लिए 180 आयरन की टेबलेटस दी जाती हैं। दरअसल, हाई रिस्क प्रेग्नेंसी में हीमोग्लोबिन का स्तर पांच से कम रह जाता है, जबकि महिलाओं में 10 से 12 का स्तर होना चाहिए। बताया कि गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को काफी एहतियात बरतने की जरूरत होती है। लापरवाही की वजह से वह हाई रिस्क प्रेग्नेंसी की चपेट में आ जाती हैं। कैंप के दौरान सीएचसी अधीक्षक डा ताहिर, बीपीएम रूपेन्द्र शर्मा समेत सभी स्वास्थ्य कर्मी मौजूद रहे।
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खेकड़ा। एसीएमओ ने खेकड़ा सीएचसी में पहुंचकर हाई रिस्क प्रेग्नेंसी डे कैंप में गर्भवती महिलाओं के उपचार का निरीक्षण किया। उन्होंने ऐसी गर्भवती महिलाओं को समय पर उपचार देने के निर्देश दिए।
सीएचसी पर रविवार को हाई रिस्क प्रेग्नेंसी कैंप का आयोजन किया गया। इसका निरीक्षण एसीएमओ डॉ. नीरज त्यागी ने किया।
उन्होंने महिला चिकित्सक डॉ. प्रगति अग्रवाल को आवश्यक दिशा निर्देश दिए। कैंप में 26 मरीजों में 11 हाई रिस्क के मिले। डॉ. नीरज त्यागी ने बताया कि तेजी से घटते हीमोग्लोबिन और सेहत की अनदेखी के कारण महिलाएं हाई रिस्क प्रेग्नेंसी की चपेट में आ रही हैं। प्रदेश भर में हर साल एक हजार से ज्यादा गर्भवती महिलाएं काल के गाल में समा जाती हैं। गर्भवती महिलाओं में हीमोग्लोबिन की स्तर बढ़ाने के लिए 90 दिन के लिए 180 आयरन की टेबलेटस दी जाती हैं। दरअसल, हाई रिस्क प्रेग्नेंसी में हीमोग्लोबिन का स्तर पांच से कम रह जाता है, जबकि महिलाओं में 10 से 12 का स्तर होना चाहिए। बताया कि गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को काफी एहतियात बरतने की जरूरत होती है। लापरवाही की वजह से वह हाई रिस्क प्रेग्नेंसी की चपेट में आ जाती हैं। कैंप के दौरान सीएचसी अधीक्षक डा ताहिर, बीपीएम रूपेन्द्र शर्मा समेत सभी स्वास्थ्य कर्मी मौजूद रहे।
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