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Baghpat News: संशोधित... कैंसर के कहर से कराह रहे बागपत के कई गांव
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बागपत। जिस धरती पर कभी हरियाली लहलहाया करती थी, वहां अब मनुष्य अपना अस्तित्व बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। हरियाली गायब हो चुकी है और गंभीर बीमारियों ने पैर पसार लिए हैं। कैंसर के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। 24 अगस्त को गांगनौली गांव के सुनमेक सिंह की कैंसर से मौत हो गई,वहीं अभी कई अस्पतालों में जीवन और मृत्यु के बीच जूझ रहे हैं।
प्रभावित गांवों में बीमारी के कारणों में प्रदूषित नदियों की भयावह तस्वीर सामने आई है। सवाल ये नहीं है कि कैंसर के मरीज कितने हैं, बल्कि सवाल यह है कि आखिर गांवों में यह संकट लगातार जारी है और इसकी असली वजह तक पहुंचने के लिए कोई ठोस कदम क्यों नहीं उठाए जा रहे हैं।
फरवरी 2025 तक बागपत जिले में कैंसर के मरीजों की संख्या 400 के पार हो गई है। इसमें चौगामा क्षेत्र के दर्जनों गांव इससे प्रभावित बताए गए हैं। हिंडन और कृष्णी नदी के किनारे बसे गांवों में कैंसर के मरीजों की संख्या अधिक है। इस क्षेत्र में यह बीमारी कोई नई नहीं है।
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फरवरी 2020 में 55 गांवों में स्वास्थ्य शिविर लगाए गए थे। तब यहां करीब 60 कैंसर मरीज चिह्नित किए गए थे। उस समय मरीजों की संख्या 250 से अधिक थी। इसमें चौगामा क्षेत्र के गांव भी शामिल हैं। इसके बाद से यह आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है।
गांगनौली गांव में मई 2024 तक सक्रिय कैंसर मरीजों की संख्या काफी कम थी,लेकिन ग्रामीणों का दावा है कि यदि गंभीरता से इसकी जांच करा ली जाए तो आज यह आंकड़ा कहीं अधिक हो गया है। गांव के ही संजीव राठी ने बताया कि सेवानिवृत दरोगा सुनमेक सिंह काफी दिनों से इस बीमारी से जूझ रहे थे, काफी इलाज के बाद भी उन्हें बचाया नहीं जा सका और 24 अगस्त को उनकी मौत हो गई।
इसी गांव के दिलशाद की बेटी सहित कई अन्य अभी इस बीमारी से जूझ रहे हैं। जिनका दूसरे शहरों में इलाज चल रहा है। संजीव राठी कहते हैं कि अभी फिलहाल गांव वालों को इस बीमारी से काफी राहत है, लेकिन उनका मानना है कि जिले में इलाज तो दूर जांच की भी कोई सुविधा न होने के कारण काफी लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है।
यदि जांच की ही सुविधा जिले में हो जाए तो शुरूआत होते ही इसका पता चल जाएगा और लोग इलाज से ठीक हो जाएंगे। इसी गांव के रवींद्र राठी, गुरुशरन कहते हैं कि पिछले कुछ समय से हालात काफी सुधरे हैं, लेकिन अभी भी ग्रामीणों को इस बीमारी का डर सताता रहता है।
सवाल यह है कि इतनी गंभीर समस्या होने के बावजूद यहां कैंसर का इलाज तो छोड़ों जांच तक की व्यवस्था नहीं है। लिहाजा मरीजों को निजी अस्पतालों, मेरठ, दिल्ली और अन्य बड़े शहरों में जाना पड़ता है और यही कारण है कि जिले में कैंसर के मरीजों का कोई वास्तविक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है।
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आखिर क्यों फैल रहा है कैंसर
ग्रामीण इस बीमारी को हिंडन और कृष्णा नदी के प्रदूषण से जोड़ते हैं। इस साल मार्च में हिंडन नदी पर किए गए एक सर्वे में पानी की गुणवत्ता बेहद खराब बताई गई। कुछ जगहों पर ऑक्सीजन (डीओ) शून्य तक है। वहीं लेड (सीसा) की मात्रा सामान्य से कहीं अधिक मिली है। यह स्थिति नदी की गंभीर प्रदूषण की स्थिति की तरफ इशारा करती है।
वर्जन
जल्दी ही जिले में कैंसर के जांच की सुविधा उपलब्ध हो जाएगी। इसके लिए जिला अस्पताल में डे केयर कैंसर सेंटर की स्थापना की जा रही है। - डॉ. तीरथ लाल, सीएमओ
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प्रभावित गांवों में बीमारी के कारणों में प्रदूषित नदियों की भयावह तस्वीर सामने आई है। सवाल ये नहीं है कि कैंसर के मरीज कितने हैं, बल्कि सवाल यह है कि आखिर गांवों में यह संकट लगातार जारी है और इसकी असली वजह तक पहुंचने के लिए कोई ठोस कदम क्यों नहीं उठाए जा रहे हैं।
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फरवरी 2025 तक बागपत जिले में कैंसर के मरीजों की संख्या 400 के पार हो गई है। इसमें चौगामा क्षेत्र के दर्जनों गांव इससे प्रभावित बताए गए हैं। हिंडन और कृष्णी नदी के किनारे बसे गांवों में कैंसर के मरीजों की संख्या अधिक है। इस क्षेत्र में यह बीमारी कोई नई नहीं है।
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फरवरी 2020 में 55 गांवों में स्वास्थ्य शिविर लगाए गए थे। तब यहां करीब 60 कैंसर मरीज चिह्नित किए गए थे। उस समय मरीजों की संख्या 250 से अधिक थी। इसमें चौगामा क्षेत्र के गांव भी शामिल हैं। इसके बाद से यह आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है।
गांगनौली गांव में मई 2024 तक सक्रिय कैंसर मरीजों की संख्या काफी कम थी,लेकिन ग्रामीणों का दावा है कि यदि गंभीरता से इसकी जांच करा ली जाए तो आज यह आंकड़ा कहीं अधिक हो गया है। गांव के ही संजीव राठी ने बताया कि सेवानिवृत दरोगा सुनमेक सिंह काफी दिनों से इस बीमारी से जूझ रहे थे, काफी इलाज के बाद भी उन्हें बचाया नहीं जा सका और 24 अगस्त को उनकी मौत हो गई।
इसी गांव के दिलशाद की बेटी सहित कई अन्य अभी इस बीमारी से जूझ रहे हैं। जिनका दूसरे शहरों में इलाज चल रहा है। संजीव राठी कहते हैं कि अभी फिलहाल गांव वालों को इस बीमारी से काफी राहत है, लेकिन उनका मानना है कि जिले में इलाज तो दूर जांच की भी कोई सुविधा न होने के कारण काफी लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है।
यदि जांच की ही सुविधा जिले में हो जाए तो शुरूआत होते ही इसका पता चल जाएगा और लोग इलाज से ठीक हो जाएंगे। इसी गांव के रवींद्र राठी, गुरुशरन कहते हैं कि पिछले कुछ समय से हालात काफी सुधरे हैं, लेकिन अभी भी ग्रामीणों को इस बीमारी का डर सताता रहता है।
सवाल यह है कि इतनी गंभीर समस्या होने के बावजूद यहां कैंसर का इलाज तो छोड़ों जांच तक की व्यवस्था नहीं है। लिहाजा मरीजों को निजी अस्पतालों, मेरठ, दिल्ली और अन्य बड़े शहरों में जाना पड़ता है और यही कारण है कि जिले में कैंसर के मरीजों का कोई वास्तविक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है।
आखिर क्यों फैल रहा है कैंसर
ग्रामीण इस बीमारी को हिंडन और कृष्णा नदी के प्रदूषण से जोड़ते हैं। इस साल मार्च में हिंडन नदी पर किए गए एक सर्वे में पानी की गुणवत्ता बेहद खराब बताई गई। कुछ जगहों पर ऑक्सीजन (डीओ) शून्य तक है। वहीं लेड (सीसा) की मात्रा सामान्य से कहीं अधिक मिली है। यह स्थिति नदी की गंभीर प्रदूषण की स्थिति की तरफ इशारा करती है।
वर्जन
जल्दी ही जिले में कैंसर के जांच की सुविधा उपलब्ध हो जाएगी। इसके लिए जिला अस्पताल में डे केयर कैंसर सेंटर की स्थापना की जा रही है। - डॉ. तीरथ लाल, सीएमओ