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पौधों को बचाने के लिए निकला हरित ट्रस्ट कार्यकर्ता
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़ौत में पौधे पर कीटनाशक दवाईयों का छिडकाव करते कर्मचारी
- फोटो : BAGHPAT
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- अब तक एक लाख पौधों का वितरण भी किया
बागपत। लॉकडाउन में जिंदगी की जद्दोजहद चल रही है। जीने का सबका अपना अंदाज और अपनी जरूरत हैं। संकट के दौर में प्रकृति बचाने के लिए भी अनूठी पहल की गई है। लॉकडाउन को देखते हुए हरित एंबुलेंस बनाई गई ताकि पौधों को पानी दिया जा सके। इसके लिए रोजाना सडक़ों पर घूमकर पानी दिया जाता है। बड़ौत का हरित ट्रस्ट पेड़-पौधों को बचाने में जुटा है। ट्रस्ट से जुड़े लोग हरित एंबुलेंस के जरिए पेड़-पौधों को खाद पानी के साथ कीटनाशक का छिडक़ाव कर रहे हैं। ट्रस्ट जिले में अब तक एक लाख पौधों का वितरण भी कर चुका है। ट्रस्ट के अध्यक्ष डाक्टर दिनेश बंसल बताते हैं कि वह पेशे से सर्जन हैं। करीब पांच वर्ष पूर्व उन्होंने उनके पास इलाज कराने वाले लोगों को एक पेड़ देने का कार्य शुरू किया था और बाद में कुछ चिकित्सकों व शिक्षकों के साथ मिलकर हरित ट्रस्ट शुरू की। पांच साल में एक लाख से अधिक पौधे मरीजों को दिए है। किसी मरीज का पौधा खराब होने पर उसे दूसरा पौधा दिया जाता है।
मेरा परिवार है हर पौधा, सबका लेखा-जोखा
बागपत। चिकित्सालय से जिसे भी पौधा दिया जाता है, उसका नाम, पता एवं मोबाईल नंबर रजिस्टर में अंकित किया जाता है। ट्रस्ट की ओर से समय-समय पर फोन के माध्यम से पौधे के बारें में जानकारी ली जाती है तथा व्हाटसअप पर पौधे के फोटो भी मंगवाए जाते हैं।
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बागपत। लॉकडाउन में जिंदगी की जद्दोजहद चल रही है। जीने का सबका अपना अंदाज और अपनी जरूरत हैं। संकट के दौर में प्रकृति बचाने के लिए भी अनूठी पहल की गई है। लॉकडाउन को देखते हुए हरित एंबुलेंस बनाई गई ताकि पौधों को पानी दिया जा सके। इसके लिए रोजाना सडक़ों पर घूमकर पानी दिया जाता है। बड़ौत का हरित ट्रस्ट पेड़-पौधों को बचाने में जुटा है। ट्रस्ट से जुड़े लोग हरित एंबुलेंस के जरिए पेड़-पौधों को खाद पानी के साथ कीटनाशक का छिडक़ाव कर रहे हैं। ट्रस्ट जिले में अब तक एक लाख पौधों का वितरण भी कर चुका है। ट्रस्ट के अध्यक्ष डाक्टर दिनेश बंसल बताते हैं कि वह पेशे से सर्जन हैं। करीब पांच वर्ष पूर्व उन्होंने उनके पास इलाज कराने वाले लोगों को एक पेड़ देने का कार्य शुरू किया था और बाद में कुछ चिकित्सकों व शिक्षकों के साथ मिलकर हरित ट्रस्ट शुरू की। पांच साल में एक लाख से अधिक पौधे मरीजों को दिए है। किसी मरीज का पौधा खराब होने पर उसे दूसरा पौधा दिया जाता है।
मेरा परिवार है हर पौधा, सबका लेखा-जोखा
बागपत। चिकित्सालय से जिसे भी पौधा दिया जाता है, उसका नाम, पता एवं मोबाईल नंबर रजिस्टर में अंकित किया जाता है। ट्रस्ट की ओर से समय-समय पर फोन के माध्यम से पौधे के बारें में जानकारी ली जाती है तथा व्हाटसअप पर पौधे के फोटो भी मंगवाए जाते हैं।
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