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तुलसी ने गणेश जी को दिया था दो शादियों का श्राप
ब्यूरो/अमर उजाला, बागपत
Updated Fri, 09 Sep 2016 12:33 AM IST
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पुराना कस्बा स्थित बागेश्वर महादेव मंदिर में चल रहे गणेश महोत्सव के चौथे दिन पंच मेवा एवं लड्डू का भोग लगाया। श्रद्धालुओं ने गणपति की पूजा अर्चना कर परिवार की सुख और शांति की कामनाएं की।
शहर में चल रहे गणेश महोत्सवों में गणपति बाप्पा मौर्या के जयकारे गूंजे। श्रद्धालुओं ने विधिविधान के साथ विघ्न विनाशक की पूजा अर्चना की। ज्योतिषाचार्य पं. राज कुमार शास्त्री ने बताया गणेश की पूजा अर्चना से ही शुभ कार्य प्रारंभ किए जाते हैं।
यात्रा प्रारंभ करने से पहले गणपति के बारह नाम उच्चारण करने से यात्रा बिना बाधा के पूर्ण होती है। इसमें महेश ठेकेदार, सुदेश विकल, नीरज, बबली, सुरेंद्र, प्रदीप, अंकुर, अखिल, अनिल, सुनील, ऋषभ, कर्मवीर, जीत सिंह, नवीन, आकाश, शिवम आदि रहे।
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दूसरी ओर बड़ा बाजार में गणेश महोत्सव के दौरान सोमदत्त शास्त्री ने बताया गणेश पर तुलसी नहीं चढ़ाई जाती है, इस पर एक कथा सुनाई। उन्होंने बताया भगवान गणेश गंगा किनारे तप कर रहे थे। कालाविध में धर्मात्मज की नवयौवना कन्या तुलसी ने विवाह की इच्छा लेकर तीर्थ यात्रा पर प्रस्थान किया।
वह भ्रमण करते गणेश जी के पास पहुंची। तुलसी उन पर मोहित हो गई। उनके मन में शादी की मंशा जागृत हुई। भगवान गणेश ने ब्रह्मचारी बताकर विवाह प्रस्ताव को नकार दिया। इससे वह दुखी हो गई।
आवेश में उन्होंने गणेश जी को दो विवाह का श्राप दे दिया। तभी गणपति ने भी उनका विवाह आसुर से होने का श्राप दिया। इस पर वह दुखी हो गई। माफी मांगने पर गणेश ने उन्हें बताया तुम भगवान विष्णु और कृष्ण की प्रिय रहोगी और कलयुग में लोगों को मोक्ष देने वाली होगी।
मगर मेरी पूजा में तुलसी चढ़ाना शुभ नहीं माना जाएगा। विधि विधान के साथ पूजा हुई और प्रसाद का वितरण किया। कुलदीप चौहान, नीरज शास्त्री, शोभित शास्त्री, कमल वर्मा, प्रदीव वर्मा, संजय वर्मा, रमेश वर्मा, रवि गुप्ता, इलू, भोलू, अरुण, रिया, गौरी मौजूद रहे। धानुक बस्ती में भी गणेश महोत्सव विधि विधान से मना।
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शहर में चल रहे गणेश महोत्सवों में गणपति बाप्पा मौर्या के जयकारे गूंजे। श्रद्धालुओं ने विधिविधान के साथ विघ्न विनाशक की पूजा अर्चना की। ज्योतिषाचार्य पं. राज कुमार शास्त्री ने बताया गणेश की पूजा अर्चना से ही शुभ कार्य प्रारंभ किए जाते हैं।
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यात्रा प्रारंभ करने से पहले गणपति के बारह नाम उच्चारण करने से यात्रा बिना बाधा के पूर्ण होती है। इसमें महेश ठेकेदार, सुदेश विकल, नीरज, बबली, सुरेंद्र, प्रदीप, अंकुर, अखिल, अनिल, सुनील, ऋषभ, कर्मवीर, जीत सिंह, नवीन, आकाश, शिवम आदि रहे।
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दूसरी ओर बड़ा बाजार में गणेश महोत्सव के दौरान सोमदत्त शास्त्री ने बताया गणेश पर तुलसी नहीं चढ़ाई जाती है, इस पर एक कथा सुनाई। उन्होंने बताया भगवान गणेश गंगा किनारे तप कर रहे थे। कालाविध में धर्मात्मज की नवयौवना कन्या तुलसी ने विवाह की इच्छा लेकर तीर्थ यात्रा पर प्रस्थान किया।
वह भ्रमण करते गणेश जी के पास पहुंची। तुलसी उन पर मोहित हो गई। उनके मन में शादी की मंशा जागृत हुई। भगवान गणेश ने ब्रह्मचारी बताकर विवाह प्रस्ताव को नकार दिया। इससे वह दुखी हो गई।
आवेश में उन्होंने गणेश जी को दो विवाह का श्राप दे दिया। तभी गणपति ने भी उनका विवाह आसुर से होने का श्राप दिया। इस पर वह दुखी हो गई। माफी मांगने पर गणेश ने उन्हें बताया तुम भगवान विष्णु और कृष्ण की प्रिय रहोगी और कलयुग में लोगों को मोक्ष देने वाली होगी।
मगर मेरी पूजा में तुलसी चढ़ाना शुभ नहीं माना जाएगा। विधि विधान के साथ पूजा हुई और प्रसाद का वितरण किया। कुलदीप चौहान, नीरज शास्त्री, शोभित शास्त्री, कमल वर्मा, प्रदीव वर्मा, संजय वर्मा, रमेश वर्मा, रवि गुप्ता, इलू, भोलू, अरुण, रिया, गौरी मौजूद रहे। धानुक बस्ती में भी गणेश महोत्सव विधि विधान से मना।