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शिक्षा का निजीकरण बंद करने सहित चार प्रस्ताव पारित
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दयानन्द बाल विद्या मंदिर में आयोजित हुआ कुरीति निवारण महोत्सव
संवाद न्यूज एजेंसी
बड़ौत। दयानंद बाल विद्या मंदिर जूनियर हाईस्कूल में रविवार को आर्य सेवा समिति के तत्वावधान में कुरीति निवारण महोत्सव का आयोजन किया गया। कुरीतियों के निवारण के लिए कक्षा 10 तक की शिक्षा को मातृभाषा के माध्यम से देने और निजीकरण बंद करने सहित चार प्रस्ताव पारित किए गए।
महोत्सव का शुभारंभ विक्रम आर्य और हरपाल सिंह ने किया। वक्ताओं ने कहा कि समाज में जितनी भी कुरीतियां फैली हुई हैं, उसका कारण अशिक्षा, पाश्चात्य संस्कृति का अनुकरण और स्कूलों में संस्कारवान शिक्षा का ना दिया जाना हैं। वर्तमान में केवल किताबी ज्ञान को बढ़ावा दिया जा रहा है। आचार्य समरभानु ने कहा कि एकल परिवार के चलन और पाश्चात्य संस्कृति की ओर अधिक झुकाव के कारण आज समाज का स्तर बेहद गिर चुका हैं। महोत्सव में सभी बिंदुओं पर विचार-विमर्श करने के बाद चार प्रस्तावों पर मुहर लगाई गई। इनमें शिक्षा का निजीकरण बंद किया जाना, कक्षा 10 तक की शिक्षा को मातृभाषा के माध्यम से दिया जाना, जनपद के ग्रामीण क्षेत्रों से शराब की दुकानों को बंद कराने, स्वामी दयानंद द्वारा रचित वेदभाष्य विश्वविद्यालय के कोर्स संचालित कराया जाना शामिल हैं।
महोत्सव की अध्यक्षता हरपाल सिंह आर्य और संचालन विक्रम सिंह आर्य ने किया। इस अवसर पर भोपाल सिंह, धर्मपाल सिंह, डॉक्टर हरपाल सिंह, देवेंद्र सिंह, जयवीर सिंह तोमर एडवोकेट, इकबाल कवि, वेगराज सिंह, जयवीर सिंह, डॉक्टर ओमवीर सिंह, राजकुमार आर्य, विशाल, विपिन ढ़िकाना, आदि मौजूद रहे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बड़ौत। दयानंद बाल विद्या मंदिर जूनियर हाईस्कूल में रविवार को आर्य सेवा समिति के तत्वावधान में कुरीति निवारण महोत्सव का आयोजन किया गया। कुरीतियों के निवारण के लिए कक्षा 10 तक की शिक्षा को मातृभाषा के माध्यम से देने और निजीकरण बंद करने सहित चार प्रस्ताव पारित किए गए।
महोत्सव का शुभारंभ विक्रम आर्य और हरपाल सिंह ने किया। वक्ताओं ने कहा कि समाज में जितनी भी कुरीतियां फैली हुई हैं, उसका कारण अशिक्षा, पाश्चात्य संस्कृति का अनुकरण और स्कूलों में संस्कारवान शिक्षा का ना दिया जाना हैं। वर्तमान में केवल किताबी ज्ञान को बढ़ावा दिया जा रहा है। आचार्य समरभानु ने कहा कि एकल परिवार के चलन और पाश्चात्य संस्कृति की ओर अधिक झुकाव के कारण आज समाज का स्तर बेहद गिर चुका हैं। महोत्सव में सभी बिंदुओं पर विचार-विमर्श करने के बाद चार प्रस्तावों पर मुहर लगाई गई। इनमें शिक्षा का निजीकरण बंद किया जाना, कक्षा 10 तक की शिक्षा को मातृभाषा के माध्यम से दिया जाना, जनपद के ग्रामीण क्षेत्रों से शराब की दुकानों को बंद कराने, स्वामी दयानंद द्वारा रचित वेदभाष्य विश्वविद्यालय के कोर्स संचालित कराया जाना शामिल हैं।
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महोत्सव की अध्यक्षता हरपाल सिंह आर्य और संचालन विक्रम सिंह आर्य ने किया। इस अवसर पर भोपाल सिंह, धर्मपाल सिंह, डॉक्टर हरपाल सिंह, देवेंद्र सिंह, जयवीर सिंह तोमर एडवोकेट, इकबाल कवि, वेगराज सिंह, जयवीर सिंह, डॉक्टर ओमवीर सिंह, राजकुमार आर्य, विशाल, विपिन ढ़िकाना, आदि मौजूद रहे।
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