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लाइसेंस के बिना चल रही डेयरी में साढ़े चार क्विंटल रसगुल्ले नष्ट कराए
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छपरौली में मावा नष्ट करते हुए
- फोटो : BAGHPAT
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खाद्य सुरक्षा विभाग ने छपरौली में की कार्रवाई, सात नमूने भी जांच के लिए भेजे
जिले भर में चले अभियान में दूध, पनीर, मावा, अरारोट, रिफाइंड के कुल 17 नमूने लिए
संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत। होली पर्व को देखते हुए मंगलवार को खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने जिले भर में दूध की डेयरी, मावे की भट्टी और दिल्ली मावा लेकर जा रही गाड़ियों की जांच कर दूध, पनीर, मावा, अरारोट, रिफाइंड के 17 नमूने भरकर जांच के लिए भेजे। छपरौली में बिना लाइसेंस चल रही डेयरी में रसगुल्ले बनते मिले। टीम ने साढ़े चार क्विंटल खराब सफेद रसगुल्ले नष्ट कराए।
जिला अभिहित अधिकारी मानवेंद्र सिंह व मुख्य खाद्य अधिकारी वीके राठी ने बताया कि मंगलवार को छपरौली में जैन दुध डेयरी बिना लाइसेंस के चलती मिली। डेयरी से पनीर, सफेद रसगुल्ला, दुध, बुरा, रिफाइंड के सात नमूने जांच के लिए भेजे गए है। डेयरी पर साढ़े चार क्ंिवटल खराब सफेद रसगुल्ला नष्ट कराया गया। इसके अलावा दो लीटर रीठा घोल, दस किलो अरारोट और पांच टीन रिफाइंड सील कर दिया है। संचालक को लाइसेंस न बनवाने तक डेयरी न खोलने के निर्देश दिए गए है। इसके अलावा टीम ने पेरिफेरल से दिल्ली मावा लेकर जा रही मालेंडी शामली की गाड़ी से तीन और बागपत से दिल्ली जा रही गाड़ी से मावा के सात नमूने लेकर जांच के लिए भेजे है। नमूनों की रिपोर्ट आने पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
ऐसे करें मिलावट की पहचान
- दूध में मिलावट की पहचान करने के लिए बराबर मात्रा में पानी मिलाने पर डिटर्जेंट होने पर झाग आ जाते है।
- दूध को हथेलियों से रगड़ने पर साबुन जैसा महसूस होना और गर्म करने पर दूध का रंग हल्का पीना होने पर मिलावट होने की पुष्टि होती है।
- खोया को उंगलियों के बीच मसलने पर दाने महसूस होने पर मिलावट की पुष्टि होती है।
- चांदी के वर्क को जलाने पर सलेटी रंग होने पर मिलावटी होता है।
- नकली मावा खाने पर मुंह में चिपक जाता है, इसके अलावा नकली मावा में चीनी डालकर गर्म करने पर पानी छोड़ने लगता है।
- दो ग्राम मावा को पांच मिलीलीटर गरम पानी में घोलकर ठंडा करने पर इसमें आयोडीन सोल्युशन डालने पर नकली मावा का रंग नीला हो जाएगा।
त्योहार पर सेहत खराब न कर दे नकली मावा
सीएचसी अधीक्षक डॉ विभाष राजपूत ने बताया कि नकली मावा कई प्रकार के घातक रसायनों से तैयार किया जाता है। इसका सेवन करना शरीर के लिए घातक साबित हो सकता है। नकली मावा खाने से पाचन तंत्र, स्कीन एलर्जी, गुर्दे व लीवर पर प्रभाव पड़ता है। उन्होंने त्योहार पर घर में निकाले गए मावा का ही प्रयोग करने की सलाह दी है।
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जिले भर में चले अभियान में दूध, पनीर, मावा, अरारोट, रिफाइंड के कुल 17 नमूने लिए
संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत। होली पर्व को देखते हुए मंगलवार को खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने जिले भर में दूध की डेयरी, मावे की भट्टी और दिल्ली मावा लेकर जा रही गाड़ियों की जांच कर दूध, पनीर, मावा, अरारोट, रिफाइंड के 17 नमूने भरकर जांच के लिए भेजे। छपरौली में बिना लाइसेंस चल रही डेयरी में रसगुल्ले बनते मिले। टीम ने साढ़े चार क्विंटल खराब सफेद रसगुल्ले नष्ट कराए।
जिला अभिहित अधिकारी मानवेंद्र सिंह व मुख्य खाद्य अधिकारी वीके राठी ने बताया कि मंगलवार को छपरौली में जैन दुध डेयरी बिना लाइसेंस के चलती मिली। डेयरी से पनीर, सफेद रसगुल्ला, दुध, बुरा, रिफाइंड के सात नमूने जांच के लिए भेजे गए है। डेयरी पर साढ़े चार क्ंिवटल खराब सफेद रसगुल्ला नष्ट कराया गया। इसके अलावा दो लीटर रीठा घोल, दस किलो अरारोट और पांच टीन रिफाइंड सील कर दिया है। संचालक को लाइसेंस न बनवाने तक डेयरी न खोलने के निर्देश दिए गए है। इसके अलावा टीम ने पेरिफेरल से दिल्ली मावा लेकर जा रही मालेंडी शामली की गाड़ी से तीन और बागपत से दिल्ली जा रही गाड़ी से मावा के सात नमूने लेकर जांच के लिए भेजे है। नमूनों की रिपोर्ट आने पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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ऐसे करें मिलावट की पहचान
- दूध में मिलावट की पहचान करने के लिए बराबर मात्रा में पानी मिलाने पर डिटर्जेंट होने पर झाग आ जाते है।
- दूध को हथेलियों से रगड़ने पर साबुन जैसा महसूस होना और गर्म करने पर दूध का रंग हल्का पीना होने पर मिलावट होने की पुष्टि होती है।
- खोया को उंगलियों के बीच मसलने पर दाने महसूस होने पर मिलावट की पुष्टि होती है।
- चांदी के वर्क को जलाने पर सलेटी रंग होने पर मिलावटी होता है।
- नकली मावा खाने पर मुंह में चिपक जाता है, इसके अलावा नकली मावा में चीनी डालकर गर्म करने पर पानी छोड़ने लगता है।
- दो ग्राम मावा को पांच मिलीलीटर गरम पानी में घोलकर ठंडा करने पर इसमें आयोडीन सोल्युशन डालने पर नकली मावा का रंग नीला हो जाएगा।
त्योहार पर सेहत खराब न कर दे नकली मावा
सीएचसी अधीक्षक डॉ विभाष राजपूत ने बताया कि नकली मावा कई प्रकार के घातक रसायनों से तैयार किया जाता है। इसका सेवन करना शरीर के लिए घातक साबित हो सकता है। नकली मावा खाने से पाचन तंत्र, स्कीन एलर्जी, गुर्दे व लीवर पर प्रभाव पड़ता है। उन्होंने त्योहार पर घर में निकाले गए मावा का ही प्रयोग करने की सलाह दी है।
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