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शुद्ध पेयजल की समस्या से जूझ रहे पांच गांव

Mon, 15 Mar 2021 11:25 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Mon, 15 Mar 2021 11:25 PM IST
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Five villages struggling with the problem of pure drinking water
इन गांवों में करीब 35 वर्ष पुरानी टंकी पड़ी हैं ठप
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नई टंकियों के निर्माण का प्रस्ताव शासन स्तर पर अटका
दोघट। पानी के मामले में चौगामा क्षेत्र रेड जोन में है। केंद्र सरकार की 1985 में त्वरित पेयजल योजना के तहत दाहा, मुलसम, भड़ल, मौजिजाबाद नांगल, गैडबरा और बामनौली में टंकियों का निर्माण कराया था। कई गांवों में टंकी का निर्माण कराकर सरकार ने ग्राम पंचायतों को इनके संचालन की जिम्मेदारी दी। पानी की टंकी की समय सीमा समाप्त हो गई है। नई के लिए प्रस्ताव शासन में अटका है। इसके चलते उक्त पांच गांवों की आबादी पेयजल की समस्या से जूझ रही है।
इन गांवों में बनी टंकियों की जिम्मेदारी जल निगम पर है। एनजीटी के आदेशानुसार चौगामा क्षेत्र के प्रत्येक गांव को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी प्रदेश सरकार की है। फिर भी इन पांच गांव की आबादी शुद्ध पेयजल से वंचित है।
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ग्राम मुलसम निवासी मेजर कृष्णपाल गुलिया का कहना है कि गांव में 35 वर्ष पूर्व टंकी का निर्माण जल निगम ने कराया था। वह कई वर्षों से ठप है। इससे गरीबों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। ग्रामीण दूषित पेयजल पीने को मजबूर हैं।
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ग्राम मौजिजाबाद नांगल निवासी राजपाल शास्त्री का कहना है कि जल निगम की उपेक्षा के चलते वर्तमान में ग्रामीण शुद्ध पेयजल से वंचित हैं। गांव कृष्णा नदी के किनारे है। इसमें प्रदूषित रसायनयुक्त पानी बहता है। जिसका असर गांव के भूमिगत जल स्रोतों पर है।
ग्राम गैडबरा निवासी पूर्व प्रधान विक्रम सिंह राणा का कहना है कि वर्ष 1985 में जल निगम ने क्षेत्र के 11 गांवों को पाइपलाइन के माध्यम से शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए टंकी का निर्माण किया था। अब ग्रामीण दूषित पानी पीने को मजबूर हैं।
ग्राम भड़ल के प्रधान देवेंद्र सिंह राणा का कहना है कि गांव में पेयजल टंकी का निर्माण अरसा पहले हुआ था। इसी टंकी से निकट के गांव निरपुड़ा व धनौरा को भी पेयजल उपलब्ध कराने की योजना थी। तीन वर्षों से टंकी का संचालन निगम ने बंद कर रखा है।

जल निगम के अवर अभियंता विवेक कुमार ने बताया कि पानी की टंकी की समय सीमा 20 वर्ष होती है। मुलसम, दाहा, भड़ल, मौजिजाबाद नांगल और गैडबरा में बनी टंकियों को 35 वर्ष हो चुके हैं। जल निगम की ओर से इन गांवों में नई टंकी के निर्माण का प्रस्ताव शासन को दो वर्ष पूर्व भेजा था। वह अभी स्वीकृत नहीं हुआ है।
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