{"_id":"5e03b53e8ebc3e881e6a45eb","slug":"file-kept-running-bus-station-not-found-even-after-approval-baghpat-news-mrt4605725179","type":"story","status":"publish","title_hn":"दौड़ती रही फाइल, मंजूरी के बाद भी नहीं मिला बस अड्डा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दौड़ती रही फाइल, मंजूरी के बाद भी नहीं मिला बस अड्डा
विज्ञापन
बागपत में वंदना चौक पर बस के इंतजार में खडे यात्री
- फोटो : BAGHPAT
बागपत। ये साल भी चला गया, लेकिन जिला मुख्यालय पर बस अड्डे की सौगात नहीं मिली है। सीएम योगी आदित्यनाथ ने एलान किया था, लेकिन सरकारी जमीन नहीं मिली। प्रशासन चार जगह के प्रस्ताव अब तक भेज चुका है, लेकिन जमीन के दाम इतने ऊपर है कि खरीद की प्रक्रिया को पूरा नहीं किया जा सका है। प्रशासन नई जमीन की तलाश में जुटा हुआ है।
जिला मुख्यालय पर बस स्टैंड नहीं है। सीएम योगी आदित्यनाथ ने बागपत विधायक योगेश धामा के प्रस्ताव पर बस स्टैंड को मंजूरी दे दी थी। प्रशासन ने साल 2019 की शुरूआत में ही बस स्टैंड के लिए जमीन की तलाश शुरू की। सबसे पहले राष्ट्रवंदना चौक के निकट ब्लॉक में बस स्टैंड का प्रस्ताव भेजा गया। योजना थी कि ब्लॉक को कलक्ट्रेट या विकास भवन के खाली पड़े भवनों में शिफ्ट कर दिया जाएगा। प्रशासन ने प्रस्ताव भेज दिया, लेकिन इसे मंजूरी नहीं मिल सकी। इसके बाद बागपत और पाली गांव के बीच, सिसाना समेत अब तक कुल चार जगह के प्रस्ताव भेजे जा चुके हैं, लेकिन अंतिम मुहर नहीं लग सकी है। इस कारण अभी तक जिला मुख्यालय पर बस स्टैंड मंजूर होने के बावजूद इसकी शुरूआत नहीं हो सकी है।
क्या है अड़ंगा
बागपत। जिला मुख्यालय पर बस स्टैंड मंजूर हो चुका है। दिल्ली-सहारनपुर हाईवे पर सरकारी जमीन नहीं मिल रही है। नियम है कि अगर देहात क्षेत्र में निजी भूमि का अधिग्रहण किया जाएगा तो सर्किल रेट से चार गुणा और शहरी क्षेत्र में निजी भूमि का अधिग्रहण किया जाएगा तो सर्किल रेट से दो गुना मुआवजा दिया जाएगा। जिन जगह का चयन किया गया, वह इस रेट में जमीन देने के लिए तैयार नहीं है। इस वजह से जमीन की खरीद पर आकर मामला लटक गया है।
विज्ञापन
16 बीघा जमीन का 22 साल पुराना दर्द
बागपत। बागपत को जिला घोषित हुए 22 साल हो चुके हैं। मगर, अभी तक जिला मुख्यालय पर बस स्टैंड की सौगात नहीं मिली है। बस स्टैंड के निर्माण के लिए 16 से 18 बीघा जमीन चाहिए। बागपत विधायक योगेश धामा ने पहल कर बस स्टैंड मंजूर कराया था, लेकिन कार्य लटक गया है।
किस काम का बड़ौत का बस स्टैंड
बागपत। बड़ौत में रोडवेज बस स्टैंड जरूर बनाया गया, लेकिन यह आम जनता के लिए फायदे का सौदा साबित नहीं हुआ। बड़ौत से कई कि लोमीटर दूर बड़ौली गांव के निकट बस स्टैंड बनाया गया था। यहां डिपो में यात्री पहुंचते ही नहीं है। यात्री बड़ौत में दिल्ली-सहारनपुर मार्ग पर दिल्ली बस स्टैंड, बावली चुंगी, छपरौली चुंगी और औद्योगिक पुलिस चौकी से ही बसों में सवार हो जाते हैं। बुढ़ाना जाने वाली बसों के लिए बावली चुंगी पर बस स्टैंड बनाया गया था, लेकिन यहां भी यात्री नहीं पहुंच रहे हैं। इस कारण बड़ौत का बस स्टैंड भी आमजन के लिए अपेक्षित लाभदायक साबित नहीं हुआ है। जिले के यात्री सड़कों पर ही बसों का इंतजार करते हुए नजर आते हैं। एआरएम बड़ौत योगेंद्र पाल सिंह का कहना है कि बस डिपो से ही भेजी जाती है। इसके बाद ही बस शहर में पहुंचती है।
किसने क्या कहा
बागपत के भाजपा विधायक योगेश धामा का कहना है कि पहले किसी ने समस्या पर ध्यान नहीं दिया। उनकी पहल पर सीएम योगी आदित्यनाथ ने जिले के लाभ के लिए मंजूरी दी है। जमीन की तलाश कराई जा रही है। नए साल की शुरूआत में ही बस स्टैंड के लिए जगह मिल जाने की उम्मीद है। भाजपा सरकार निर्माण कार्य पूरा कराएगी।
विज्ञापन
जिला मुख्यालय पर बस स्टैंड नहीं है। सीएम योगी आदित्यनाथ ने बागपत विधायक योगेश धामा के प्रस्ताव पर बस स्टैंड को मंजूरी दे दी थी। प्रशासन ने साल 2019 की शुरूआत में ही बस स्टैंड के लिए जमीन की तलाश शुरू की। सबसे पहले राष्ट्रवंदना चौक के निकट ब्लॉक में बस स्टैंड का प्रस्ताव भेजा गया। योजना थी कि ब्लॉक को कलक्ट्रेट या विकास भवन के खाली पड़े भवनों में शिफ्ट कर दिया जाएगा। प्रशासन ने प्रस्ताव भेज दिया, लेकिन इसे मंजूरी नहीं मिल सकी। इसके बाद बागपत और पाली गांव के बीच, सिसाना समेत अब तक कुल चार जगह के प्रस्ताव भेजे जा चुके हैं, लेकिन अंतिम मुहर नहीं लग सकी है। इस कारण अभी तक जिला मुख्यालय पर बस स्टैंड मंजूर होने के बावजूद इसकी शुरूआत नहीं हो सकी है।
विज्ञापन
क्या है अड़ंगा
बागपत। जिला मुख्यालय पर बस स्टैंड मंजूर हो चुका है। दिल्ली-सहारनपुर हाईवे पर सरकारी जमीन नहीं मिल रही है। नियम है कि अगर देहात क्षेत्र में निजी भूमि का अधिग्रहण किया जाएगा तो सर्किल रेट से चार गुणा और शहरी क्षेत्र में निजी भूमि का अधिग्रहण किया जाएगा तो सर्किल रेट से दो गुना मुआवजा दिया जाएगा। जिन जगह का चयन किया गया, वह इस रेट में जमीन देने के लिए तैयार नहीं है। इस वजह से जमीन की खरीद पर आकर मामला लटक गया है।
विज्ञापन
16 बीघा जमीन का 22 साल पुराना दर्द
बागपत। बागपत को जिला घोषित हुए 22 साल हो चुके हैं। मगर, अभी तक जिला मुख्यालय पर बस स्टैंड की सौगात नहीं मिली है। बस स्टैंड के निर्माण के लिए 16 से 18 बीघा जमीन चाहिए। बागपत विधायक योगेश धामा ने पहल कर बस स्टैंड मंजूर कराया था, लेकिन कार्य लटक गया है।
किस काम का बड़ौत का बस स्टैंड
बागपत। बड़ौत में रोडवेज बस स्टैंड जरूर बनाया गया, लेकिन यह आम जनता के लिए फायदे का सौदा साबित नहीं हुआ। बड़ौत से कई कि लोमीटर दूर बड़ौली गांव के निकट बस स्टैंड बनाया गया था। यहां डिपो में यात्री पहुंचते ही नहीं है। यात्री बड़ौत में दिल्ली-सहारनपुर मार्ग पर दिल्ली बस स्टैंड, बावली चुंगी, छपरौली चुंगी और औद्योगिक पुलिस चौकी से ही बसों में सवार हो जाते हैं। बुढ़ाना जाने वाली बसों के लिए बावली चुंगी पर बस स्टैंड बनाया गया था, लेकिन यहां भी यात्री नहीं पहुंच रहे हैं। इस कारण बड़ौत का बस स्टैंड भी आमजन के लिए अपेक्षित लाभदायक साबित नहीं हुआ है। जिले के यात्री सड़कों पर ही बसों का इंतजार करते हुए नजर आते हैं। एआरएम बड़ौत योगेंद्र पाल सिंह का कहना है कि बस डिपो से ही भेजी जाती है। इसके बाद ही बस शहर में पहुंचती है।
किसने क्या कहा
बागपत के भाजपा विधायक योगेश धामा का कहना है कि पहले किसी ने समस्या पर ध्यान नहीं दिया। उनकी पहल पर सीएम योगी आदित्यनाथ ने जिले के लाभ के लिए मंजूरी दी है। जमीन की तलाश कराई जा रही है। नए साल की शुरूआत में ही बस स्टैंड के लिए जगह मिल जाने की उम्मीद है। भाजपा सरकार निर्माण कार्य पूरा कराएगी।