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अमर उजाला एक्सक्लूसिव-------- सरसों का बीज खत्म, 4500 से अधिक किसानों ने छह गुना अधिक दामों में खरीदा बीज

Fri, 22 Oct 2021 12:24 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 22 Oct 2021 12:24 AM IST
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Farmers buying mustard seeds from outside at higher prices
बड़ौत। सरसों के तेल की बढ़ती कीमतों व बाजार मेें सरसों के अच्छे दाम मिलने के चलते इस बार जनपद में सरसों की बुवाई करने वाले किसानों की संख्या बढ़ गई है। पिछले साल की अपेक्षा इस बार जनपद में शासन द्वारा 12 क्विंटल अधिक सरसों का बीज भेजा गया था, जो कभी का खत्म हो चुका है। नतीजतन राजकीय बीज भंडार पर बीज न मिलने के कारण जनपद में लगभग 4500 से अधिक किसानों ने छह गुना अधिक दामों में बाहर से बीज खरीदा है। अभी भी किसान शासन से जनपद में सरसों का बीज भेजने की मांग कर रहे हैं।
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कृषि विभाग के अनुसार जनपद के छह राजकीय बीज भंडारों में बड़ौत, बागपत, पिलाना, खेकड़ा, छपरौली, बिनौली पर गत वर्ष शासन द्वारा 15 कुंतल सरसों का बीज भेजा गया था। जिसमें से लगभग पांच प्रतिशत बीज बच भी गया था और जनपद में लगभग 3200 हेक्टेयर सरसों की फसल की बुवाई हुई थी। उसी के सापेक्ष इस बार फिर से शासन द्वारा जनपद में 1 अक्टूबर को पूसा व हरियाणा के सीएसएसआरआई से प्रमाणित पीली व काली सरसों का तकरीबन 12 क्विंटल बीज भेजा गया था, जो आते ही खत्म हो गया। उधर किसानों की मांग को देखते हुए उप कृषि निदेशक प्रशांत कुमार ने फिर से डिमांड भेजी तो फिर से 15 क्विंटल बीज जनपद में भेज दिया गया। यानी इस बार जनपद में कुल 27 क्विंटल सरसों का बीज आया था। बाद में भेजा गया बीज 15 दिनों में खत्म हो गया है। किसान लगातार मांग कर रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि जहां राजकीय बीज भंडार पर किसानों को 93.50 रुपये प्रति किग्रा सरसों का बीज दिया जाता है। इसमें शासन द्वारा 50 प्रतिशत की छूट भी दी जाती है, वहीं बाहर की दुकानों पर सरसों का बीज 600 से लेकर 850 रुपये प्रति किग्रा मिलता है। राजकीय बीज भंडार पर बीज न मिलने के कारण जनपद के लगभग 4500 से अधिक किसानों ने बाहरी दुकानों से छह गुना अधिक दामों में बीज खरीदा है।
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ये बोले किसान
जौनमाना गांव के किसान तेजपाल व लुहारी गांव के किसान हरपाल का कहना है कि कई दिनों से सरसों के बीज के लिए राजकीय बीज भंडार के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन बीज नहीं मिल रहा है। मजबूरी में निजी दुकानों से बीज खरीदना पड़ रहा है।
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बड़ौली गांव के किसान रामकुमार व सिनौली गांव के किसान विपिन पूनिया का कहना है कि सरसों का बीज न मिलने के कारण बाहरी दुकानों से बीज खरीदकर सरसों की बुवाई की है।
ये है सरसों की बुवाई का उचित समय
बड़ौत। राजकीय बीज भंडार पर तैनात एसडीओ कृषि तेजपाल चौहान के अनुसार प्रतिवर्ष अक्तूबर माह के आगमन के साथ ही सरसों की बुवाई शुरू होती है और 15 अक्तूबर तक किसान हर हाल में बुवाई करने का कार्य पूरा कर लेते हैं, क्योंकि इसके बाद एक ओर खेतों में मानसून के दौरान हुई बारिश की नमी नहीं रहती है, वहीं सरसों की अच्छी पैदावार नहीं होती है। इस बार अच्छी बारिश होने के कारण ऊंचाई वाले समस्त खेतों में सरसों की बुवाई होने की संभावना था।

ये बोले उप कृषि निदेशक
बड़ौत। इस संबंध में जब उप कृषि निदेशक प्रशांत कुमार से बातचीत की गई तो उन्होंने बताया कि यह बात सहीं है कि इस बार जनपद मेें पिछली साल की अपेक्षा 12 कुंतल सरसों का बीज अधिक भेजा गया है। किसानों की जरूरत के हिसाब से ही डिमांड भेजी गई थी। यदि जरूरत पड़ी तो ओर भी डिमांड भेजी जाएगी।
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