{"_id":"159b2aa41291d4cfd7009123f2310e6d","slug":"farmers-also-stood-in-the-rain-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"बारिश में भी डटे किसान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बारिश में भी डटे किसान
ब्यूरो/ अमर उजाला, बागपत
Updated Mon, 08 Feb 2016 01:02 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बागपत के खेकड़ा में ग्राम सरफाबाद के जंगल में कुंडली पेरिफेरल हाइवे में अधिग्रहण की गई भूमि के बढे़ मुआवजे की मांग को लेकर किसानों के धरने का रविवार को 53वां दिन था। बरिश और ठंड के बावजूद डटे किसानों ने प्रशासन को चेतावनी दी कि यदि शीघ्र समाधान नही किया गया तो वे आंदोलन को तेज करने के लिए विवश होंगे।
ग्राम सरफाबाद के जंगल में कुंडली पेरिफेरल हाईवे के संशोधित मुआवजे की मांग को लेकर किसानों की जंग जारी है। किसान बढे़ हुए मुआवजे को लेने के लिए हाईवे का काम रोककर 53 दिनों से धरने पर बैठे हैं। हालात ये है कि ठेकेदार अपनी मशीनों को लेकर यहां से जा चुके हैं और कार्य पूरी तरह से बंद हो गया है।
किसानों का कहना है कि वे विकास के विरोध में नहीं हैं। हाईवे बनने पर उनके बच्चों को भी लाभ होगा। उनकी शेष बची जमीनें भी महंगी हो जाएगी। हालांकि हाईवे अथॉरिटी भी टोल आदि से धन कमाएंगी। ऐसे में उनको भी बढ़ी हुई कीमतों के अनुसार संशोधित राशि दी जानी चाहिए। किसानों ने चेतावनी दी कि उनको कमजोर न समझा जाए।
विज्ञापन
वे गांधीवादी तरीके से शांतिपूर्वक बैठे है। जनप्रतिनिधि, सांसद, विधायक, प्रदेश सरकार, केंद्र सरकार, हाईवे अथॉरिटी सब आंखें बंद किए बैठे है। यदि उनकी मांग जल्द नही मानी गयी तो वह आंदोलन करने को मजबूर होंगे। इस दौरान अनेक किसान मौजूद रहे।
विज्ञापन
ग्राम सरफाबाद के जंगल में कुंडली पेरिफेरल हाईवे के संशोधित मुआवजे की मांग को लेकर किसानों की जंग जारी है। किसान बढे़ हुए मुआवजे को लेने के लिए हाईवे का काम रोककर 53 दिनों से धरने पर बैठे हैं। हालात ये है कि ठेकेदार अपनी मशीनों को लेकर यहां से जा चुके हैं और कार्य पूरी तरह से बंद हो गया है।
विज्ञापन
किसानों का कहना है कि वे विकास के विरोध में नहीं हैं। हाईवे बनने पर उनके बच्चों को भी लाभ होगा। उनकी शेष बची जमीनें भी महंगी हो जाएगी। हालांकि हाईवे अथॉरिटी भी टोल आदि से धन कमाएंगी। ऐसे में उनको भी बढ़ी हुई कीमतों के अनुसार संशोधित राशि दी जानी चाहिए। किसानों ने चेतावनी दी कि उनको कमजोर न समझा जाए।
विज्ञापन
वे गांधीवादी तरीके से शांतिपूर्वक बैठे है। जनप्रतिनिधि, सांसद, विधायक, प्रदेश सरकार, केंद्र सरकार, हाईवे अथॉरिटी सब आंखें बंद किए बैठे है। यदि उनकी मांग जल्द नही मानी गयी तो वह आंदोलन करने को मजबूर होंगे। इस दौरान अनेक किसान मौजूद रहे।