Exclusive: ओपन एंडेड कार्ड में अटकी नौ हजार यात्रियों की मेहनत की कमाई, फंसी 60 लाख रुपये की धनराशि
उत्तर परिवहन निगम की ओर से 2017 में ओपन एंडेड कार्ड की शुरूआत की गई थी। रोडवेज बस के यात्रियों को रिचार्ज कराने पर 20 फीसदी का फायदा मिलता था। कंपनी का परिवहन निगम से अनुबंध 2020 में खत्म हो गया था। इसके बाद से कार्ड अपडेट नहीं हुए। ऐसे में पांच रोडवेज बस डिपो के यात्रियों की 50 से 60 लाख रुपये की धनराशि फंस गई है।
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कैशलेस का दायरा बढ़ाने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश परिवहन निगम में वर्ष 2017 में शुरू हुई ओपन एंडेड कार्ड योजना मेरठ क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले पांच रोडवेज बस डिपो के करीब नौ हजार यात्रियों के लिए सिरदर्द बन गई है।
कारण है कि 2020 में कार्ड बनाने वाली कंपनी से निगम का अनुबंध खत्म हो गया, जिससे कार्ड अपडेट नहीं हुए। इससे यात्रियों का रिचार्ज के नाम पर डाली गई धनराशि कार्ड में ही फंस गई। निगम अधिकारियों की माने तो यह धनराशि 50 से 60 लाख की है। योजना बंद होने से कार्ड में फंसी धनराशि निकलवाने के लिए रोजाना लोग डिपो कार्यालयों के चक्कर काटकर रहे हैं।
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बड़ौत डिपो के स्टेशन प्रभारी नरेंद्र मान के अनुसार इससे एक हजार रुपये का रिचार्ज कराने पर 12 सौ रुपये और 2000 के रिचार्ज पर 2200 रुपये से यात्रा की जाती है। परिचालक के पास मौजूद मशीन से धनराशि स्वाइप करके काट ली जाती है।
धनराशि खत्म होने पर ऑनलाइन रिचार्ज किया जा सकता है, लेकिन इसे अपडेट कार्यालय में जाकर ही कराना होता था। जिस कंपनी के साथ ओपन एंडेड कार्ड बनाने का अनुबंध हुआ था, वह मार्च 2020 में खत्म हो गया था।
उन्होंने बताया कि मेरठ क्षेत्र के अंतर्गत पांच डिपो आते है। इनमें मेरठ, सोहराबगेट, गढ़, भैसाली और बड़ौत डिपो है। इन पांच डिपो के लगभग करीब नौ हजार यात्रियों ने ओपेन एंडेड कार्ड बनाए थे। कार्ड बनने के बाद किसी यात्री ने दो हजार का रिचार्ज कराया तो किसी ने पांच हजार का। विभागीय आंकड़ों में कार्ड बंद होने से करीब 50 से 60 लाख रुपये की धनराशि फंसी हुई है।
केस 1- तीन साल से काट रहा चक्कर, नहीं मिली धनराशि
बड़ौत नगर के अंकित जैन ने बताया कि रोडवेज की ओर से शुरू की गई इस योजना के तहत ओपन एंडेड कार्ड बनवाया था। पहले दो हजार, फिर तीन हजार की नगदी डाली थी। कार्ड बनने के कुछ माह बाद ही कार्ड ने काम करना बंद कर दिया था, शिकायत की तो जानकारी मिली कि यह योजना बंद कर दी गई है।
केस 2- पांच हजार की नगदी फंसी
सिनौली गांव निवासी विपिन कुमार ने बताया कि ओपन एंडेड कार्ड में पांच हजार की नगदी फंसी हुई है, लेकिन विभागीय अधिकारी मात्र आश्वासन दे रहे है। दो साल से चक्कर काट रहा हूूं, लेकिन धनराशि नहीं मिली। यह तो मामले तो उदाहरण मात्र है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार करीब 15 हजार यात्रियों के 50 से 60 लाख रुपये फंसे है।
दूसरी कंपनी को टेंडर देने की प्रक्रिया लगभग पूर्ण
वर्ष 2020 में ओपन एंडेड कार्ड बनाने वाली कंपनी का टेंडर का अनुबंध खत्म होने के बाद रोडवेज ने दूसरी कंपनी के साथ अनुबंध किया है। इसकी टेंडर प्रक्रिया लगभग पूर्ण हो चुकी है। रोडवेज विभाग के अफसरों का कहना है कि मई माह के अंत तक दूसरी कंपनी विभाग की योजनाओं के तहत काम करना शुरू कर देगी।
डिपो कार्ड की संख्या
मेरठ 4500
सोहराब गेट 2250
गढ़ डिपो 400
भैसाली डिपो 2610
बड़ौत डिपो 150
जल्द लौटाई जाएगी धनराशि
यात्रियों की सुविधाओं के लिए ओपेन एंडेड कार्ड योजना संचालित की गई थी, ताकि बस में छुट्टे रुपये देने की परेशानी से यात्रियों को बचाया जा सकता है। बताया कि जिन लोगों की धनराशि इस कार्ड में फंसी हुई थी, उनकी धनराशि जल्द ही वापस कर दी जाएगी। - केके शर्मा, आरएम