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इंटरनेट पर मशगूल दिख रहा हर वर्ग
ब्यूरो/ अमर उजाला, बागपत
Updated Sun, 17 Jul 2016 01:01 AM IST
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बड़ौत। आज इंटरनेट का जादू हर वर्ग के सिर पर चढ़ कर बोल रहा है। बच्चे हो बड़े, सबने खुद को अपडेट रखने के लिए इंटरनेट का रुख अख्तियार लिया है। इंटरनेट ने सबसे ज्यादा युवाओं को प्रभावित किया है। इस कारण युवा पुस्तकालयों के बजाय इंटरनेट को अपना समय दे रहे हैं।
बच्चों और युवाओं की किताबें पढ़ने की आदत कम होती जा रही है। आज युवा खाली समय में घर या पुस्तकालयों में किताबें पढ़ने के बजाय कंप्यूटर या मोबाइल में इंटरनेट पर समय बिता रहे हैं। युवा इंटरनेट को अपनी सामान्य ज्ञान बढ़ाने का बढ़िया और सस्ता साधन मानते हैं।
युवा छात्र नेता राहुल कुमार तोमर व अमरदीप का कहना है कि किताब खरीदने के लिए पैसों की जरूरत होती है, लेकिन कुछ पैसे देकर किताबों को इंटरनेट पर पढ़ा जा सकता है। एक किताब जो आज से दो साल पहले लिखी थी, आज के समय में वह बेकार हो जाती है, क्योंकि उसमें करंट नॉलेज (सामयिक जानकारी) नहीं होती है। जबकि, इंटरनेट से उन्हें नई-नई जानकारी मिल जाती है। छात्रा संजू व रीतु का कहना है कि आज का युवा शार्टकट पर जोर दे रहा है। किसी चीज को प्राप्त करने के लिए संघर्ष नहीं करना चाहते है। किताबें पढ़ने में ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है।
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छात्र आकाश, सागर, शेखर व अक्षय इंटरनेट को किताबों से बढ़िया विकल्प मानते हैं। आज इंटरनेट पर आप दुनिया भर की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। चाहे साहित्य हो या विज्ञान, हर विषय की जानकारी के लिए कहीं भागने दौड़ने या अलग-अलग किताबों के पढ़ने की जरूरत नहीं होती।
जनता वैदिक कॉलेज के प्राचार्य डॉ. नरेंद्र सिंह का कहना है कि आज हाईटेक जमाना है, और आज का युवा मेहनत नहीं करना चाहता इंटरनेट पर उसे क्लिक करते ही सब कुछ मिल जाता है, जबकि किताबों में उसे पूरी किताब पढ़नी पड़ती है।
उनका कहना है कि किताबों से दूर होने का एक कारण अभिभावकों का बच्चों को किताबों के प्रति प्रेरित न करना भी है।
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बच्चों और युवाओं की किताबें पढ़ने की आदत कम होती जा रही है। आज युवा खाली समय में घर या पुस्तकालयों में किताबें पढ़ने के बजाय कंप्यूटर या मोबाइल में इंटरनेट पर समय बिता रहे हैं। युवा इंटरनेट को अपनी सामान्य ज्ञान बढ़ाने का बढ़िया और सस्ता साधन मानते हैं।
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युवा छात्र नेता राहुल कुमार तोमर व अमरदीप का कहना है कि किताब खरीदने के लिए पैसों की जरूरत होती है, लेकिन कुछ पैसे देकर किताबों को इंटरनेट पर पढ़ा जा सकता है। एक किताब जो आज से दो साल पहले लिखी थी, आज के समय में वह बेकार हो जाती है, क्योंकि उसमें करंट नॉलेज (सामयिक जानकारी) नहीं होती है। जबकि, इंटरनेट से उन्हें नई-नई जानकारी मिल जाती है। छात्रा संजू व रीतु का कहना है कि आज का युवा शार्टकट पर जोर दे रहा है। किसी चीज को प्राप्त करने के लिए संघर्ष नहीं करना चाहते है। किताबें पढ़ने में ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है।
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छात्र आकाश, सागर, शेखर व अक्षय इंटरनेट को किताबों से बढ़िया विकल्प मानते हैं। आज इंटरनेट पर आप दुनिया भर की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। चाहे साहित्य हो या विज्ञान, हर विषय की जानकारी के लिए कहीं भागने दौड़ने या अलग-अलग किताबों के पढ़ने की जरूरत नहीं होती।
जनता वैदिक कॉलेज के प्राचार्य डॉ. नरेंद्र सिंह का कहना है कि आज हाईटेक जमाना है, और आज का युवा मेहनत नहीं करना चाहता इंटरनेट पर उसे क्लिक करते ही सब कुछ मिल जाता है, जबकि किताबों में उसे पूरी किताब पढ़नी पड़ती है।
उनका कहना है कि किताबों से दूर होने का एक कारण अभिभावकों का बच्चों को किताबों के प्रति प्रेरित न करना भी है।